॥कोंकण की शान: कंकावली मेला ॥🏮 🥁 🎶 🚩 🌺 🛕 🤝 🚶‍♂️ 🍬 🎠 🎈 🤗 🎭 🌙 ✨ 🎭

Started by Atul Kaviraje, January 29, 2026, 09:45:05 PM

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Atul Kaviraje

कणकवली यात्रा-

कंकावली यात्रा-

सिंधुदुर्ग जिले के कंकावली गांव के देवता और वहां के मशहूर मेले के मौके पर, कोंकण की इस समृद्ध परंपरा पर आधारित यह भक्ति कविता:

॥कोंकण की शान: कंकावली मेला ॥

1. आज कंकावली शहर में खुशियों की बाढ़ सी आई हुई है, सनाई-चौघड़ा और तुरही की आवाज़ गूंज रही है। आओ गांव के देवता के चरणों में सिर झुकाएं, आओ हम सब भक्ति के इस रंग में नहाएं.. 🏮 🥁 🎶 🚩

2. आओ मेले के इस त्योहार को अपनी आंखों से संजोएं, आओ कोंकण की मिट्टी की खुशबू का स्वाद लें। पालकी फूलों से सजी है, भगवान का वजन, भक्तों की ऐसी उड़ान देखो.. 🌺 🛕 🤝 🚶�♂️

3. फूल-माला बिखरी थी, तो बच्चे और चरवाहे खुश हुए. खाने-पीने के स्टॉल से सजी है ये जगह, यहीं मिलते हैं अपने सबसे अच्छे दोस्त से.. 🍬 🎠 🎈 🤗

4. ये सीधे-सादे और भोले-भाले कोंकणी लोग, परंपरा के इस अनमोल शाही हंस को सहेज कर रखते हैं. दशावतारी खेल का रंग गोरा है, भक्त रात भर जागते हैं.. 🎭 🌙 ✨ 🎭

5. ये साने गुरुजी की यादों की धरती है, यहां संस्कृति का झरना बहता है. तुकांत शब्दों में मेले की धारा के साथ, भक्ति की इस मिठास से मन भर जाता है.. 📖 🌊 ✍️ 💖

6. यौवन की उम्र तक पहुँचने वाले ये हमारे देवता हैं, विश्वास के बल पर ये रैयत चलते हैं. ये सारी परेशानियाँ अब दूर होंगी, नाम स्मरण की धुन दिल में उठती है.. 🙏 🛡� 💎 🔔

7. अगले बरस तू फिर जल्दी आना, सुख-समृद्धि की सौगात अपने कंधों पर रख. कंकावली की हवा भाग्य की है, मेरी माँ, तेरा प्यार तेरे साथ रहे.. 🎡 🌾 ✨ 🙌

कविता का सारांश
यह कविता कंकावली के प्रसिद्ध मेले और उसके भक्तिमय माहौल का वर्णन करती है। यह मेला कोंकण संस्कृति, पालकी समारोह, दशावतारी नाटकों और लोगों की आस्था का संगम है। भगवान की कृपा और भक्तों के उत्साह से पूरा इलाका चेतना से भर गया है, यही इस कविता का मुख्य भाव है।

सिर्फ़ वर्ड समरी
कंकावली • मेला • कोंकण • पालकी • गुलाल • परंपरा • दशावतारी • आस्था • समारोह • भक्ति

सिर्फ़ इमोजी समरी
🏮 🥁 🎶 🚩 🌺 🛕 🤝 🚶�♂️ 🍬 🎠 🎈 🤗 🎭 🌙 ✨ 🎭 📖 🌊 ✍️ 💖 🙏 🛡� 💎 🔔 🎡 🌾 ✨ 🙌

--अतुल परब
--दिनांक-19.01.2026-सोमवार.
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