॥ रामपुरपेठचा दरगाह: वलिसो उरुस ॥🌈🕌 🙏 🥁 ✨ 🪔 🥥 🧺 💖 🤝 🍬 ✍️ 🌈 🕯️ 🕊️ 🤝

Started by Atul Kaviraje, January 29, 2026, 09:47:38 PM

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Atul Kaviraje

वल्लीसो उरुस-रामपुरपेठ-पन्हाळा-

वलिसो उरुस-रामपुरपेठ-पन्हाला-

कोल्हापुर जिले के पन्हाला तालुका के रामपुरपेठ में हज़रत वलिसो पीर दरगाह के उरुस के मौके पर, यह इमोशनल कविता हिंदू-मुस्लिम एकता का नज़ारा दिखाती है:

॥ रामपुरपेठचा दरगाह: वलिसो उरुस ॥

1. रामपुरपेठ पन्हाला के पांव में है, वलिसो बाबा के उरुस के ढोल-नगाड़े बज रहे हैं। श्रद्धा से सिर झुकाते हैं, यहां सहारा मिलता है, दुख दूर होते हैं, खुशियां मिलती हैं। 🕌 🙏 🥁 ✨

2. चंदन और चंदन की खुशबू दरवाज़े से आई, देखो भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। चरणों में नारियल और चादर चढ़ाई गई, तो भक्तों के मन और कर्म शांत हो गए। 🪔 🥥 🧺 💖

3. सादगी भरी फुर्सत में यही भक्ति हमारी, वलिसो बाबा की कृपा हर घर में बनी रहे। शब्दों की तुक इस उरुस के बहाव से मेल खाती है, ज़िंदगी मीठी हो बाबा आपकी मिठास से.. 🤝 🍬 ✍️ 🌈

4. जाति-पाति भूलकर सब यहाँ एक साथ आते हैं, इंसानी जुड़ाव का यही सच्चा एहसास है। दीयों की रोशनी से जगमगाती है ये रात, बाबा, आप हमेशा हमारा साथ दें.. 🕯� 🕊� 🤝 🌙

5. कुश्ती का ये अखाड़ा और मेले की वो मस्ती, रामपुरपेठ का उरुस खुशियों का राजा है। कड़वी पंचमी शांति का यह संदेश सुनाती है, मन की सारी परेशानियां और नफरतें मिट जाएं.. 🤼�♂️ 🎡 🍭 🚫

6. बाबा तेरा नाम लेते ही मुसीबतें भाग जाती हैं, भक्ति के इस पथ पर ज्ञान का दीप जलता है। कविता की इन पंक्तियों से यही आभार बहता है, वलिसो बाबा, तुम ही हमारे रक्षक हो.. 🛡� 🌟 📖 🤲

7. यह समारोह अगले साल फिर आना चाहिए, यह शानदार होगा, यहां इंसानियत का सम्मान कायम रहेगा। रामपुरपेठ के उर्स की शान बड़ी है, भक्ति के इस रंग में नहाया हुआ यह बच्चा.. 🎈 🎊 🏘� 🙌

कविता का संक्षिप्त अर्थ (सारांश)
यह कविता पन्हाला तालुका के रामपुरपेठ में हज़रत वलिसो के उर्स का वर्णन करती है। यह उर्स सिर्फ़ एक धार्मिक त्योहार नहीं है बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। सैंडल, चादर और कुश्ती का अखाड़ा इस उर्स की खासियत हैं। इसमें यह संदेश दिया जाता है कि बाबा के आशीर्वाद से सबकी ज़िंदगी खुशहाल हो और इंसानियत ज़िंदा रहे।

सिर्फ़ शब्दों की समरी
रामपुरपेट • वलिसो • उरुस • पन्हाला • सैंडल • चादर • एकता • श्रद्धा • जात्रा • आशीर्वाद

सिर्फ़ इमोजी समरी
🌈🕌 🙏 🥁 ✨ 🪔 🥥 🧺 💖 🤝 🍬 ✍️ 🌈 🕯� 🕊� 🤝 🌙 🤼�♂️ 🎡 🍭 🚫 🛡� 🌟 📖 🤲 🎈 🎊 🏘� 🙌

--अतुल परब
--दिनांक-19.01.2026-सोमवार.
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