॥ मंगलवेढ़ा का आधार: पीर गैबीसाहेब उरुस ॥*🕌 🥁 ✨ 🙏 🪔 🌸 🌙 🙌 🤝 💖 ✍️ 🕊️ 🌏

Started by Atul Kaviraje, January 29, 2026, 09:48:57 PM

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Atul Kaviraje

पीर गैबीसाहेब उरूस-मंगळवेढा-

संतों की धरती सोलापुर जिले के मंगलवेढ़ा में मनाए जाने वाले 'हज़रत पीर गैबीसाहेब' उरुस के मौके पर, यह लंबी कविता हिंदू-मुस्लिम एकता और आस्था का प्रतीक है:

॥ मंगलवेढ़ा का आधार: पीर गैबीसाहेब उरुस ॥

1. संतों की इस धरती पर, मंगलवेढ़ा गाया जाता है, गैबीसाहेब बाबा के उरुस के ढोल बजाए जाते हैं। जो श्रद्धा से सिर झुकाते हैं, उन्हें यहाँ आराम मिलता है, भक्तों के मन में हमेशा बाबा का ध्यान रहना चाहिए। 🕌 🥁 ✨ 🙏

2. यह रात सैंडल के जुलूस से रोशन होती है, यह संगत फूलों की खुशबू से भर जाती है। चरणों में नारियल और चादरें चढ़ाई जाती हैं, मंगलवेढ़ा की यह जगह आज पवित्र हो गई है। 🪔 🌸 🌙 🙌

3. सीधी-सादी, भोली भक्ति और विश्वास का ये रिश्ता, हर भक्त अपने दुख भुलाकर यहां आता है। बाबा के जुड़वा भक्तों के नाम पर, मुसीबतें आपके एक लक्ष्य से भाग जाती हैं। 🤝 💖 ✍️ 🕊�

4. जाति-पाति और वर्ग भूलकर सब यहां एक साथ आते हैं, इंसानियत का झरना यहां हमेशा बहता है। गैबीसाहेब बाबा की महिमा बहुत गहरी है, वो भक्तों की पुकार को हमेशा आवाज़ देते हैं। 🌏 🤝 🛡� 💎

5. कुश्ती का अखाड़ा और मेले की मस्ती, मंगलवेढ़ा का उरुस आनंद का राजा है। किसानों का वो प्रसाद और खिलौनों की वो बहार, भक्ति के इस त्योहार का स्वाद कितना मीठा है। 🤼�♂️ 🎡 🍬 🍭

6. बाबा, तेरा नाम लेने से, अंदर शांति मिले, हमारे भक्तों के घरों में तेरी कृपा बनी रहे। यह कड़वी छठी हमें तेरा बड़ा सम्मान बताए, तेरे आशीर्वाद से यह जंगल रोशन हो। 🕯� 🏠 🌟 🤲

7. यह महान त्यौहार अगले साल फिर आए, इंसानियत का सम्मान यहां बना रहे। गैबीसाहेब बाबा के चरणों में यही प्रार्थना है, दुनिया खुशहाल हो और सभी मनोकामनाएं पूरी हों। 🎊 🌈 🌾 🙇�♂️

कविता का संक्षिप्त अर्थ (Summary)
यह कविता मंगलवेढ़ा के प्रसिद्ध पीर गैबीसाहेब उर्स के बारे में बताती है। यह त्यौहार हिंदू और मुस्लिम भाइयों के बीच एकता का उत्सव है। चप्पलों का जुलूस, चादर चढ़ाने की परंपरा और मेले का उत्साह बाबा के प्रति आस्था को व्यक्त करता है। इस कविता में यही भावना व्यक्त की गई है कि बाबा सभी को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।

सिर्फ़ शब्द सारांश
मंगलवेध • गैबीसाहेब • उरुस • संदल • चादर • आक्या • श्रद्धा • जात्रा • शांति • आशीर्वाद

सिर्फ़ इमोजी सारांश
*🕌 🥁 ✨ 🙏 🪔 🌸 🌙 🙌 🤝 💖 ✍️ 🕊� 🌏 🤝 🛡� 💎 🤼�♂️ 🎡 🍬 🍭 🕯� 🏠 🌟 🤲 🎊 🌈 🌾 🙇�♂️

--अतुल परब
--दिनांक-19.01.2026-सोमवार.
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