॥ अंबाबाई की पूजा: रिश्तों की गरिमा ॥🙏 🌺 🏠 ✨ 🤝 👨‍👩‍👧‍👦 💖 🍛 🌸 🤲 🧡 🩹

Started by Atul Kaviraje, January 30, 2026, 07:43:26 PM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

अंबाबाई की पूजा और 'इंसानी रिश्तों का महत्व'
(अंबाबाई की पूजा और 'मानवीय रिश्तों का महत्व')
(The Worship of Ambabai and the 'Importance of Human Relationships')
Amba Bai'S Puja and its 'importance of human relations'-

॥ अंबाबाई की पूजा: रिश्तों की गरिमा ॥

१. कोल्हापुर की अंबाबाई, गगन सी उसकी माया, पूजा में हम ढूँढें अपनी, इंसानियत की काया। भक्ति का यह दिया जलाकर, जलता मन का स्वार्थ, रिश्तों के इन धागों में ही, जीवन का सच्चा अर्थ। 🙏🌺🏠✨

२. माता-पिता और भाई-बहन, रिश्तों का यह मेला, अंबा माँ के आशीष से ही, सजे प्रीत का रेला। पूजा की यह थाल सजाना, मतलब मन का मिलन, एक-दूजे के सुख-दुख में, हो ईश्वर का दर्शन। 🤝👨�👩�👧�👦💖🍛

३. हल्दी-कुमकुम अर्पित कर हम, सौभाग्य को याद करें, कड़वाहट को छोड़ कर माता, प्रेम के रंग हम भरें। इंसान को इंसान से जोड़ना, यही तुम्हारी सच्ची भक्ति, रिश्तों की इस ममता से ही, मिलती असली शक्ति। 🌸🤲🧡🩹

४. नैवेद्य की यह मिठास जैसे, मुख में घुल मिल जाती, वैसी ही मिठास शब्दों की, क्यों न रिश्तों को भाती? पूजा के इन मंत्रों से, यही पाठ हम सीखें आज, इंसानियत के मंदिर में, हो प्रेम का ही राज। 🍯🗣�🍬🏡

५. कठिन समय में रिश्ते अपने, आधार बन कर रहते, जैसे संकट में अंबा माँ, भक्त के साथ है बहते। विश्वास का यह कच्चा धागा, कभी न टूटे हमसे, इंसानी इन रिश्तों की, रक्षा हो पूरे मन से। 🛡�🧵🤝🌟

६. अहंकार और ईर्ष्या तज कर, शीश झुकाएँ चरणों में, शुद्ध रहें सब रिश्ते अपने, जैसे गंगा के झरनों में। भक्ति केवल मंदिर में नहीं, कर्मों में भी होनी चाहिए, रिश्तों के इन फूलों से ही, जीवन बगिया खिलनी चाहिए। 🚫🧘�♂️🌊🌻

७. जय देवी अंबाबाई, तू ही हमारी जगदंबा, रिश्तों के इस गोकुल में, तू ही आधारस्तंभ अंबे। तेरी पूजा से जलती रहे, इंसानियत की ज्योति, अखंड रहे इन रिश्तों की, यह रेशम जैसी थाती। 🙏👑🚩💖

शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
ममता: स्नेह (Affection)

तज कर: छोड़ कर (Giving up)

बगिया: छोटा बगीचा (Garden)

ज्योति: लौ (Flame)

थाती: धरोहर (Heritage/Legacy)

इमोजी सारांश (Emoji Summary):
🙏 🌺 🏠 ✨ 🤝 👨�👩�👧�👦 💖 🍛 🌸 🤲 🧡 🩹 🍯 🗣� 🍬 🏡 🛡� 🧵 🤝 🌟 🚫 🧘�♂️ 🌊 🌻 🙏 👑 🚩 💖

अंबाबाईच्या पूजेचे महत्त्व आणि मानवी नातेसंबंधांची सुंदर सांगड या कवितेत घातली आहे.

--अतुल परब
--दिनांक-30.01.2026-शुक्रवार.
===========================================