"पंचक काल: नक्षत्रों का उलझाव और भक्ति का जागरण"🌌 🔥 📜 🙏 ⚠️ 🧘‍♂️ 🛡️ 🚩 🌅 ✨

Started by Atul Kaviraje, January 30, 2026, 08:29:21 PM

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Atul Kaviraje

पंचक प्रIरंभ-

पेश है ज्योतिषीय विषय 'पंचक प्रद' पर आधारित एक खास ज्ञानवर्धक और भक्ति कविता, जो मंगलवार, 20 जनवरी, 2026 को होगी।

कविता: पंचक काल और सावधान भक्ति

टाइटल: "पंचक काल: नक्षत्रों का उलझाव और भक्ति का जागरण"

1. नक्षत्रों के चक्र में, यह खास समय आ गया है, पंचक आज से शुरू हो गया है, नियमों का यह जाल। पांच नक्षत्रों का यह मेल, शास्त्रों में, सावधान रहने और कर्म का मार्ग चुनने के लिए कहा गया है। (मतलब: ज्योतिष के अनुसार, पंचक काल पांच खास नक्षत्रों के एक साथ आने से शुरू होता है, जिसमें नियमों का पालन करना ज़रूरी है।) 🌑 🌌 📜 🕰� 🌑

2. धनिष्ठा और शततारका, पूर्वा-भाद्रपद साथी, उत्तरा और रेवती, पांच नक्षत्र मिलते हैं। मंगलवार को शुरू होने वाला यह पंचक 'अग्नि पंचक' कहलाता है, ऐसा कहा जा सकता है कि सावधानी से कदम बढ़ाएं। (मतलब: इन पांच नक्षत्रों के दौरान मंगलवार को शुरू होने वाले पंचक को 'अग्नि पंचक' कहते हैं, जिसमें आग से जुड़े कामों में सावधानी बरतनी होती है।) 🔥 ✨ 🧭 🪐 🔥

3. शुभ कामों को छोड़कर, भगवान का नाम जपें, भगवान की भक्ति में लीन रहें। कुछ बुरा न हो, यही उम्मीद रखें, इस पंचक के दौरान हमें सब्र से काम लेना है। (मतलब: इस दौरान बड़े नए शुभ कामों से बचें और भगवान का नाम जपें, मन में पॉजिटिविटी और शांति बनी रहती है।) 🙏 🕯� 🧘�♂️ 🕉� 🙏

4. घर की छत न बनाएं, लकड़ी इकट्ठा न करें, यात्रा करते समय भी सावधान रहें, यही शास्त्र हमें बताते हैं। आग का यह डर ऐसा है कि पंचक के दौरान, इस संकट के समय में, सावधानी से काम करना चाहिए। (मतलब: शास्त्र कहते हैं कि पंचक के दौरान, घर के काम, लकड़ी इकट्ठा करने या दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए।) 🏠 🚫 🪵 ⚠️ 🏠

5. आइए ग्रहों की इन चालों को, प्रकृति, भक्ति और विज्ञान के इस खेल को मिलाएं। मन में कोई डर नहीं होना चाहिए, केवल सम्मान होना चाहिए, नियमों का पालन करने से दुख की परत चढ़ जाएगी। (मतलब: ग्रहों की स्थिति प्रकृति का हिस्सा है, हम अपने मन में बिना डर ��के शास्त्रों का सम्मान करके सुरक्षित रह सकते हैं।) 🌍 🧬 🤝 🛡� 🌍

6. विट्ठल का नाम लो, या शंकर को याद करो, भक्ति का यह दीया जलाओ, डर भाग जाएगा। मंगलवार के ये स्वामी हनुमान, ताकत देते हैं, मुसीबत के बवंडर में, वही हमारे साथ रहते हैं। (मतलब: अगर हम इस समय भगवान की पूजा करते हैं, तो डर दूर हो जाता है और मंगलवार होने के कारण हनुमान हमें ताकत देते हैं।) 🚩 💪 📿 🐒 🚩

7. पांच दिनों की यह यात्रा, धैर्य के साथ पूरी करनी चाहिए, मंगलमूर्ति की कृपा से, सत्वगुणों को बचाकर रखना चाहिए। पंचक खत्म होगा, खुशियों की नई सुबह होगी, इसी विश्वास के रास्ते पर, खुशियों का रास्ता बनेगा। (मतलब: अगर हम पंचक के ये पांच दिन सब्र के साथ बिता लें, तो हम अपना काम फिर से जोश के साथ कर सकते हैं।) 🌅 🚶�♂️ 🌈 ✨ 🌅

सिर्फ़ शब्दों की समरी
नक्षत्र | पंचक | अग्नि | सावधानी | भक्ति | नक्षत्रचक्र | नियम | श्रद्धा | संयम | शांति

सिर्फ़ इमोजी समरी
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इस कविता में पंचक काल के क्लासिकल और आध्यात्मिक पहलुओं को दिखाने की कोशिश की गई है।

--अतुल परब
--दिनांक-20.01.2026-मंगळवार.
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