॥ कविता: गजानन का अंतर-मिलन ॥✨ 🙏 🐘 🌸 🍃 🍬 🛡️ 🌊 👋 💖 ✅

Started by Atul Kaviraje, February 10, 2026, 10:06:50 PM

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Atul Kaviraje

(गणेश व्रत पूजन की आध्यात्मिक यात्रा
(गणेश व्रत पूजा की आध्यात्मिक यात्रा)
(The Spiritual Journey of Ganesh Vrat Worship)
Spiritual journey of Ganesha Vrat Puja-

॥ कविता: गजानन का अंतर-मिलन ॥

१. संकल्प का दीप जलाकर, शुरू किया यह पावन सफर,शुद्ध भाव से मस्तक झुका, महक उठा अपना ही घर।(अर्थ: संकल्प के साथ पूजा आरंभ की और श्रद्धा से घर में सात्विकता भर गई।)

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२. प्राण-प्रतिष्ठा की मूरत की, दिव्य ज्योति है छाई,मिट्टी की उस काया में, स्वयं देव की सूरत आई।(अर्थ: मूर्ति में प्राणों का आह्वान किया और दिव्य शक्ति का अनुभव हुआ।)

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३. फूलों और सुगंध से प्रभु, कीर्तन मन में जागा,चरणों में जो शीश झुकाया, टूटा मोह का धागा।(अर्थ: सुगंध और भक्ति से मन शांत हुआ और सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिली।)

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४. हरी दूब की ठंडक पाई, मन का ताप मिटाया,मोदक के उस मधुर स्वाद ने, आत्मज्ञान कराया।(अर्थ: दुर्वा से शांति और मोदक से सुखद ज्ञान की प्राप्ति हुई।)

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५. मंत्र गूँजे जब अंबर में, शक्ति का संचार हुआ,विघ्नहर्ता के आशीष से, संकट बेड़ा पार हुआ।(अर्थ: मंत्रों से ऊर्जा मिली और गणेश जी की कृपा से बाधाएं दूर हुईं।)

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६. विसर्जन की लहरों पर जब, नम आँखें मुस्काईं,अगले बरस तुम जल्दी आना, यही दुआएँ छाईं।(अर्थ: विदाई के समय दुःख तो था, पर फिर मिलने की आशा भी थी।)

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७. सागर में मिल गई मूरत, पर मन में घर कर बैठे,इस व्रत की पावन यात्रा से, हम जीवन नया पा बैठे।(अर्थ: मूर्ति विसर्जित हुई पर ईश्वर हृदय में बस गए, जिससे जीवन सार्थक हुआ।)

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कविता सारांश (Emoji Summary):

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शब्द सारांश (Word Summary):

श्रद्धा • संकल्प • चैतन्य • भक्ति • शांति • आनंद • ऊर्जा • विदाई • परिवर्तन।

--अतुल परब
--दिनांक-10.02.2026-मंगळवार.
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