श्रीविष्णु की व्याप्ति: धर्म का वैश्विक राज्य-🐚 🌊 🕉️ 🙏 🐟 🐢 🐗 🦁 ☀️ 🌙 ⭐

Started by Atul Kaviraje, February 19, 2026, 10:26:35 PM

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Atul Kaviraje

(विष्णु का 'धार्मिक साम्राज्य' और उसकी विशालता)
(Vishnu's 'Religious Kingdom' and Its Vastness)
Vishnu's 'religious empire' and its prevalence-

दीर्घ हिंदी कविता: विष्णु का अनंत धार्मिक साम्राज्य 🐚🕉�

शीर्षक: श्रीविष्णु की व्याप्ति: धर्म का वैश्विक राज्य

पद १:
क्षीरसागर में बसा साम्राज्य, शेषशायी भगवंत वह,
ब्रह्मांड के कण-कण में, विष्णु का ही वास वह।
धर्म का यह अथाह राज्य, सत्य और न्याय का,
पालनकर्ता बनकर विष्णु, रक्षण करें हर काय का। 🐚🌊🕉�🙏
(अर्थ: क्षीरसागर में स्थित भगवान विष्णु का साम्राज्य पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है, जो सत्य और न्याय की नींव पर टिका है।)

पद २:
दस अवतारी रूप लेकर, अधर्म का सर्वनाश किया,
धार्मिक इस साम्राज्य का, ध्वज नभ में लहरा दिया।
मत्स्य, कूर्म और वराह बनकर, पृथ्वी को तारा उन्होंने,
नरसिंह, वामन रूप धरके, संकट संहारा उन्होंने। 🐟🐢🐗🦁
(अर्थ: विष्णु ने दसों अवतार लेकर पृथ्वी से पाप मिटाया और अपने दिव्य धर्म-राज्य का विस्तार किया।)

पद ३:
वैकुंठ का द्वार खुला है, भक्तों की उस पुकार पर,
नाम सुमिरन विष्णु का दे, मुक्ति भव के द्वार पर।
व्याप्ति जिसकी असीमित है, अंत कोई न पा सके,
सूर्य, चंद्र और तारे सारे, विष्णु पद झुक जा सके। ☀️🌙⭐🏯
(अर्थ: विष्णु के साम्राज्य की विशालता ऐसी है कि समस्त खगोलीय पिंड भी उन्हीं की आज्ञा में हैं।)

पद ४:
सुदर्शन चक्र फिरे कर में, शत्रु का वह काल है,
पाञ्चजन्य शंख का नाद, धर्म का सुकाल है।
गदा, पद्म शोभित करों में, शांति और शक्ति के,
विष्णु का यह धर्म साम्राज्य, प्रतीक है बस भक्ति के। ☸️🐚🪷🔨
(अर्थ: विष्णु के अस्त्र-शस्त्र शांति, शक्ति और धर्म की स्थापना के महान प्रतीक हैं।)

पद ५:
लक्ष्मी संग विष्णु राजा, समृद्धि के दाता हैं,
चराचर के स्वामी वही, जगत के वे त्राता हैं।
भक्ति का यह मार्ग बड़ा, साम्राज्य की बुनियाद है,
विष्णु की इस छत्रछाया में, सुखों का ही प्रसाद है। 💰🪷🌍👑
(अर्थ: लक्ष्मीपति विष्णु पूरे जगत के रक्षक हैं और उनके साम्राज्य का आधार केवल शुद्ध भक्ति है।)

पद ६:
व्यापकता यह अणुरेणु में, जल में और अग्नि में,
दिखते विष्णु चराचर में, पुष्प और फल-मंजरी में।
धर्म का यह राज्य न मिटता, काल के भी प्रवाह में,
सदा बसते नारायण, भक्तों की हर राह में। 💧🔥🌸🍎
(अर्थ: विष्णु कण-कण और पंचतत्वों में समाहित हैं, उनका राज्य समय के साथ कभी समाप्त नहीं होता।)

पद ७:
चलो सुमिरें हरि विष्णु को, मुक्ति की राह पहचानें,
धार्मिक इस साम्राज्य में, भक्ति का ही मान जानें।
शंख चक्र गदा पद्म, सुमिर सदा पावन हों हम,
विष्णु के इस अनंत द्वारे, नतमस्तक सदा हों हम। 🙏✨🪈☸️
(अर्थ: भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित होकर हम उनके इस विशाल धर्म-राज्य का हिस्सा बनें।)

EMOJI SUMMARY (HINDI)
🐚 🌊 🕉� 🙏 🐟 🐢 🐗 🦁 ☀️ 🌙 ⭐ 🏯 ☸️ 🪷 🔨 💰 🌍 👑 💧 🔥 🌸 🍎 ✨ 🪈

WORD SUMMARY (HINDI)
वैकुंठ • साम्राज्य • दशावतार • पालनकर्ता • सुदर्शन • लक्ष्मी • व्यापकता • भक्ति • नारायण

भक्तीमय चित्रसंकल्पना (Visual Concept)
१. मध्य भाग: भगवान विष्णूंचे विराट स्वरूप (Cosmic Form), ज्यांच्या शरीरात अनेक आकाशगंगा, ग्रह आणि सूर्य-चंद्र फिरताना दिसत आहेत. त्यांच्या चार हातांत शंख, चक्र, गदा आणि कमळ असून त्यातून दिव्य प्रकाश उत्सर्जित होत आहे.
२. पार्श्वभूमी: निळसर अंतराळ (Outer Space) आणि त्याखाली क्षीरसागराचे दृश्य, जिथे शेषनाग आपल्या सहस्र फणांनी प्रभूला छाया देत आहे.
३. प्रतीके: सुदर्शन चक्राचे तेजस्वी वलय, लक्ष्मी माता प्रभूच्या चरणांशी बसलेली, आणि चारी कोपऱ्यात दशावतारांच्या लहान प्रतिमा.
४. रंगसंगती: गडद निळा, चकाकणारा सोनेरी आणि जांभळा रंगाचा वापर करून विष्णूची 'व्यापकता' आणि 'ऐश्वर्य' दर्शवणे.

--अतुल परब
--दिनांक-18.02.2026-बुधवार.
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