"स्वामी समर्थ का निःस्वार्थ प्रेम दर्शन"🦁 ✨ 🙏 🏵️ 🛡️ ✋ 🕯️ 🌟 🥥 🧺 💖 💎 🤝

Started by Atul Kaviraje, February 19, 2026, 10:35:48 PM

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Atul Kaviraje

श्री स्वामी समर्थ और उनका 'निस्वार्थ प्रेम' का दर्शन-
(श्री स्वामी समर्थ द्वारा निस्वार्थ प्रेम का दर्शन)
(The Philosophy of Selfless Love by Shri Swami Samarth)
Shri Swami Samarth and his 'selfless love' philosophy-

हिंदी अनुवाद: "स्वामी समर्थ का निःस्वार्थ प्रेम दर्शन"

पद १
अक्कलकोट में प्रकटे हैं, साक्षात परब्रह्म अवतार,
भक्तों की इस माउली का, प्रेम है महासागर अपार।
अपेक्षा कोई नहीं उन्हें, केवल शुद्ध भाव को जानते,
स्वामी समर्थ मेरे, सबकी पीड़ा को हैं पहचानते।
🦁 ✨ 🙏 🏵�

अर्थ: अक्कलकोट के स्वामी साक्षात ईश्वर हैं। उनका प्रेम निस्वार्थ है और वे हर भक्त का दुख दूर करते हैं।

पद २
"डरो नहीं मैं साथ तुम्हारे", मंत्र ये सबसे न्यारा,
निःस्वार्थ प्रेम का जग को, दिया यही एक सहारा।
संकट चाहे जितने आएं, स्वामी का वरदान है,
अँधियारे में भक्तों का, वे ही दिव्य प्रकाश हैं।
🛡� ✋ 🕯� 🌟

अर्थ: 'भिऊ नकोस' का संदेश निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा है। संकट में स्वामी का हाथ हमेशा भक्त की रक्षा करता है।

पद ३
वैभव सारा त्याग दिया, सादगी में वे रहते थे,
भक्तों के कल्याण हेतु, कष्ट स्वयं वे सहते थे।
देना और बस देना ही, उनका मूल स्वभाव है,
निस्वार्थ प्रेम की धारा में, कभी न कोई अभाव है।
🥥 🧺 💖 💎

अर्थ: स्वामी ने सादगी चुनी और भक्तों के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके स्वभाव में केवल परोपकार और देना ही शामिल है।

पद ४
जाति-धर्म और पंथों से, ऊपर उनका नाता है,
अहंकार का पर्वत उनके, सम्मुख ही झुक जाता है।
कण-कण के हर जीव पर, ममता उनकी एक है,
निस्वार्थ प्रेम को पाने के, मार्ग यहाँ अनेक हैं।
🤝 🌍 🌈 🕊�

अर्थ: स्वामी का प्रेम किसी भेदभाव को नहीं मानता। उनकी कृपा हर जीव पर समान रूप से बरसती है।

पद ५
भूखे उस नादान बालक को, माँ जैसे खिलाती है,
वैसी ही स्वामी की कृपा, भक्त को सहलाती है।
कर्ता स्वयं को न मानकर, विरक्ति में वे लीन रहे,
भक्तों के नयनों में केवल, प्रेम ही वे देखते रहे।
🥣 🍼 🤗 🛐

अर्थ: जैसे माँ बच्चे का ख्याल रखती है, वैसे ही स्वामी भक्त को संभालते हैं। वे सदैव निस्वार्थ और विरक्त भाव में रहते हैं।

पद ६
अपने भीतर प्रेम का, दीपक तुम जलाओ,
स्वामी की इस भक्ति में, छल-कपट न लाओ।
निस्वार्थ भाव से सेवा करो, फल की न कोई चाह हो,
कठिन डगर पर स्वामी ही, तुम्हारी सच्ची राह हों।
🪔 ❤️ ⚖️ 🌬�

अर्थ: मन में प्रेम जगाएं और बिना किसी स्वार्थ के सेवा करें। निस्वार्थ सेवा ही स्वामी तक पहुँचने का मार्ग है।

पद ७
अनंत कोटि ब्रह्मांडनायक, दत्त रूपी यह स्वामी,
भक्त की एक पुकार पर, दौड़े आते अंतर्यामी।
निःस्वार्थ प्रेम का यह सूत्र, जिसने मन में पा लिया,
स्वामी ने उस भक्त का, जीवन सफल बना दिया।
👑 🌊 🔱 😊

अर्थ: दत्त स्वरूप स्वामी अंतर्यामी हैं। जो निस्वार्थ प्रेम को समझ लेता है, स्वामी उसका जीवन धन्य कर देते हैं।

सारांश (Summary)
इमोजी सारांश (Emoji Summary):
🦁 ✨ 🙏 🏵� 🛡� ✋ 🕯� 🌟 🥥 🧺 💖 💎 🤝 🌍 🌈 🕊� 🥣 🍼 🤗 🛐 🪔 ❤️ ⚖️ 🌬� 👑 🌊 🔱 😊

शब्द सारांश (Word Summary):
परब्रह्म, अभय, निस्वार्थता, समरसता, ममता, परोपकार, त्याग, भक्ति, अक्कलकोट, परमसुख।

भक्तीमय चित्र संकल्पना (Visual Concept)
मध्य भाग: स्वामी समर्थ महाराज वडाच्या झाडाखाली (किंवा औदुंबर वृक्षाखाली) प्रसन्न मुद्रेत बसलेले आहेत. त्यांचा उजवा हात 'अभय' मुद्रेत आहे.

विशेषता: त्यांच्या एका बाजूला एक लहान बाळ आणि दुसऱ्या बाजूला एक वृद्ध व्यक्ती आहे, जे त्यांच्या सर्वसमावेशक प्रेमाचे प्रतीक आहे.

पार्श्वभूमी: अक्कलकोटचे मंदिर आणि आकाशात 'भिऊ नकोस मी तुझ्या पाठीशी आहे' ही अक्षरे तेजाप्रमाणे चमकत आहेत.

निसर्ग: स्वामींच्या सभोवताली गाई, कुत्रे आणि पक्षी निर्भयपणे फिरत आहेत, जे त्यांच्या 'चराचरातील' अस्तित्वाचे दर्शन घडवतात.

रंगसंगती: भगवा आणि सोनेरी रंगाचा वापर, जो पावित्र्य आणि ऊर्जेचे प्रतीक आहे.

--अतुल परब
--दिनांक-19.02.2026-गुरुवार.
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