"दीनदयाल हनुमान"🐒 🚩 🛡️ 🌸 ⛰️ 🤝 ❤️ ⛵ ✨ 🕉️🙏 ✨ 🕉️ 🚩👹 🙅‍♂️ ⛵ 🔔🙇‍♂️ ❤️ 🥥

Started by Atul Kaviraje, February 21, 2026, 07:54:37 PM

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Atul Kaviraje

(हनुमान का जीवन के प्रति दयालु दृष्टिकोण)
जीवन के प्रति हनुमान का करुणामय दृष्टिकोण
(जीवन के प्रति हनुमान का दयालु दृष्टिकोण)
(Hanuman's Compassionate Outlook on Life)
Hanuman's 'Deendayal' approach to life-

दीर्घ हिंदी कविता: "दीनदयाल हनुमान"

१. अंजनी के लाडले, शक्ति के अवतार,
दीनदयाल बनकर करें, दुखों का संहार।
मुख में राम का नाम है, हाथ में गदा सोहे,
भक्तों की रक्षा हेतु, संकट को वो हरें।
🚩 🐒 💪 🛡�

२. सीता का दुख देखकर, व्याकुल हुआ मन,
मुद्रिका देकर किया, धीरज और दर्शन।
अशोक वाटिका में बने, आशा की किरण,
हनुमत के चरणों में, हम करते हैं अर्पण।
🌸 💍 🕯� 🙏

३. लक्ष्मण मूर्च्छित हुए जब, लाए द्रोणागिरी,
करुणा के सागर ने, भरी एक भारी।
संजीवनी से बचाए, लखन के प्राण,
हनुमान की महिमा का, जग करता गान।
⛰️ 🌱 ⚡ ✨

४. विभीषण को दिया शरण, मानकर अपना भाई,
शत्रु के भी कुल को, तुमने राह दिखाई।
भेदभाव से परे तुम्हारी, समता वाली दृष्टि,
तुझसे ही सुरक्षित है, यह सारी सृष्टि।
🤝 🌍 🌈 😇

५. असीम बल के स्वामी, फिर भी अति विनम्र,
राम की सेवा में, रहते सदा निमग्न।
गर्व नहीं है तनिक भी, सेवा का है भाव,
दीनों के तुम प्यारे हो, मिटाते सबका घाव।
🙇�♂️ ❤️ 🥥 🚩

६. भूत-प्रेत का डर भागे, नाम तुम्हारा जपते,
एक दर्शन मात्र से, भाग्य हमारे जगते।
संकटों के तूफ़ान में, तुम ही हमारी नाव,
तुम्हारी दया का प्रभु, गहरा है प्रभाव।
👹 🙅�♂️ ⛵ 🔔

७. दीनदयाल नाम तुम्हारा, सार्थक है हे देवा,
हमें भी देना सदा, अपनी पावन सेवा।
युगों-युगों तक रहेगी, तुम्हारी यह कीर्ति,
हनुमान से मिलती हमें, जीने की स्फूर्ति।
🙏 ✨ 🕉� 🚩

Emoji Summary: 🐒 🚩 🛡� 🌸 ⛰️ 🤝 ❤️ ⛵ ✨ 🕉�

Word Summary: भक्ति, करुणा, शक्ति, सेवा, राम-नाम, संकटमोचन।

🖼� चित्र संकल्पना (Visual Concept):

चित्र १: हनुमानजी श्रीरामाच्या चरणांशी नम्रतेने बसलेले आहेत, त्यांच्या हृदयातून प्रकाश बाहेर पडत असून त्यात राम-सीतेची प्रतिमा दिसत आहे.

चित्र २: एका हातात संजीवनी पर्वत आणि दुसऱ्या हातात गदा घेतलेले हनुमान आकाशातून वेगाने उडत आहेत, खाली दीन-दुबळे लोक त्यांच्याकडे आशेने पाहत आहेत.

चित्र ३: अशोक वाटिकेत हनुमान लहान रूपात फांदीवर बसून सीतामातेला अंगठी दाखवत आहेत, त्यांच्या डोळ्यांत अपार करुणा दिसत आहे.

--अतुल परब
--दिनांक-21.02.2026-शनिवार.
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