🌾 महाराष्ट्र की कृषि संस्कृति: नए धान्य का पूजन और वसंत का आनंद 🌾🌿 🌍 🚜 🌾

Started by Atul Kaviraje, February 22, 2026, 09:49:03 AM

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Atul Kaviraje

खेती-बाड़ी की संस्कृति: ग्रामीण महाराष्ट्र में नई फसल आने पर जश्न मनाया जाता है और कुछ जगहों पर नए अनाज की पूजा की जाती है।

🌾 महाराष्ट्र की कृषि संस्कृति: नए धान्य का पूजन और वसंत का आनंद  🌾

१. वसंत के कदमों से धरती माँ मुस्काई, खेतों में आज नई फसलों की रास है आई। काली मिट्टी की ये ममता, उमड़-उमड़ कर बहती, किसान खुश हुआ, अपनी मेहनत की कहानी कहती। (अर्थ: वसंत ऋतु के आते ही धरती प्रसन्न हो गई है और खेतों में नई फसलें तैयार हैं। प्रकृति की कृपा देख किसान बहुत खुश है।) 🌿 🌍 🚜 🌾 😊

२. खलिहानों में आज देखो, अनाज की ये पूजा, नई फसल के इस पर्व का, मोल नहीं है दूजा। ज्वार-बाजरे की बाली, सोने सी है चमकती, मेहनत किसान की देखो, आज फल है देती। (अर्थ: खलिहानों में नए अनाज की पूजा हो रही है। पसीने से उगाई गई फसल सोने जैसी चमक रही है और किसान के परिश्रम का फल मिल गया है।) ✨ 🥥 🌾 🎖� 🙏

३. वसंत पंचमी का पर्व, समृद्धि की है दस्तक, ग्रामीण महाराष्ट्र में आज, झुका भक्ति में मस्तक। प्रकृति के आशीष से, घर-आँगन हैं भरे, काली मिट्टी की भक्ति में, नए सपने हैं खरे। (अर्थ: यह पर्व खुशहाली की शुरुआत है। प्रकृति के आशीर्वाद से गाँव के घर अनाज से भर गए हैं और किसानों का जीवन सुखमय हुआ है।) 🏡 💰 🌳 🌈 🙌

४. हरी चुनर से सज गई, ये वनराई सारी, पक्षियों की चहक से, हुई दुनिया ये प्यारी। जंगली फल और फसलों की, ये माया अपार, प्रकृति देवी के चरणों में, हम करते नमस्कार। (अर्थ: प्रकृति हरी-भरी हो गई है और पक्षी चहक रहे हैं। प्रकृति से मिलने वाले इस उपहार के लिए हम उसके आभारी हैं।) 🍃 🐦 🍒 🌌 ✨

५. पसीने की इन बूंदों से, मोती आज हैं उगे, परंपरा के इस मार्ग पर, संस्कार हमें हैं मिले। नई फसल का ये भोग, ईश्वर को अर्पण किया, कृषि संस्कृति का ये विरसा, हमने मन से जिया। (अर्थ: किसान के पसीने से अनाज रूपी मोती उगे हैं। नई फसल का भोग ईश्वर को लगाकर हम अपनी कृषि संस्कृति का सम्मान करते हैं।) 💧 💎 🍮 🕉� ✅

६. एकता का ये उत्सव, किसान साथ हैं आते, एक-दूजे के सहयोग से, प्रगति के स्वप्न सजाते। आपसी मेल-जोल की ये प्रथा, इंसानियत की आस, कृषि संस्कृति के इस गीत में, है ममता का अहसास। (अर्थ: इस उत्सव पर सभी किसान एकजुट होते हैं और मिल-जुलकर उन्नति का विचार करते हैं। यह पर्व भाईचारे का प्रतीक है।) 🤝 👬 📈 🎶 😊

७. समृद्ध रहे खेती हमारी, यही चरणों में प्रार्थना, किसान के इस जीवन में, न रहे कोई यातना। अखंड मिले तेरा आशीष, हे निसर्ग देवा, तेरी ही कृपा से चमके, हमारा ये भक्ति का मेवा। (अर्थ: हमारी खेती सदा लहलहाती रहे और किसान को कभी कष्ट न हो। प्रकृति देव सबका कल्याण करें, यही मंगल कामना है।) | 🌾 🙌 🕊� 🔔 🔱 |

📊 इमोजी सारांश (Emoji Summary)
🌿 🌍 🚜 🌾 😊 ✨ 🥥 🌾 🎖� 🙏 🏡 💰 🌳 🌈 🙌 🍃 🐦 🍒 🌌 ✨ 💧 💎 🍮 🕉� ✅ 🤝 👬 📈 🎶 😊 🌾 🙌 🕊� 🔔 🔱

🔠 शब्द सारांश (Word Summary)
कृषि संस्कृति, महाराष्ट्र, नया अनाज, वसंत पंचमी, किसान, काली मिट्टी, पूजन, समृद्धि, प्रकृति, मेहनत, परंपरा, आनंद।

--अतुल परब
--दिनांक-23.01.2026-शुक्रवार.
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