बस बादल हटने की देरी...

Started by dinesh.belsare, March 15, 2026, 10:49:44 AM

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dinesh.belsare

बस बादल भर को हटने की देरी,
और सूरज तैयार है देने दर्शन।
हमको घेरे किरणें उसकी,
बस चाहिए सजगता और आकर्षण।

वह प्रकाशता है हर पल,
हम अनभिज्ञ होकर बस रहते।
हर कार्य में है ऊर्जा उसी की,
हम अज्ञान के अंधेरे में ही जीते।

वह मौजूद है हर पल,
और पुकारता है एक दर्शन को।
घिरे हुए हैं अंदर-बाहर से,
बस राह तकता पलक खोलने को।

हट जाने दो बादल काले,
सभी — कुछ कमजोर, कुछ घने।
उतरेंगी फिर किरणें उसकी,
बस हट जाओ तुम बीच से अपने।