।। शिशिर की शीतलता: प्रकृति की भक्ति ।। ❄️ 🌫️ 🌳 😴 🌬️ 🍂 🧘‍♂️ 📜 🍃 ✨ ☀️ 🕉️

Started by Atul Kaviraje, March 28, 2026, 11:25:37 AM

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Atul Kaviraje

ऋतु: पतझड़ का मौसम।

।। शिशिर की शीतलता: प्रकृति की भक्ति ।।

१. माघ मास का समय है आया, शिशिर ऋतु की शीत लहर, पत्तों पर अब थिरक रही है, ठंड की ये मीठी पहर। भोर के उस कोहरे में, सृष्टि जैसे नहा रही, शिशिर के इस स्पर्श से, निद्रा सुख की आ रही। ❄️ 🌫� 🌳 😴 🌬�

२. पतझड़ के ये दिन आए हैं, पुराना सब अब झड़ता है, नई कोंपलों की आशा में, पेड़ शांत अब रहता है। प्रकृति की ये सीख महान, त्याग का ये प्रतीक है, शिशिर के इस मौन में, छुपा राज जो सटीक है। 🍂 🧘�♂️ 📜 🍃 ✨

३. चुभती हवा तन को लागे, सूरज की अब प्यास बढ़े, कोमल सी उस धूप में, मन भक्ति की ओर चढ़े। शंकर के इन मंदिरों से, गूँजे मंत्रों का जयकार, शिशिर की इस शांति पर है, ईश्वर का ही उपकार। 🌬� ☀️ 🕉� 🕍 🧿

४. खेतों में अब डोल रही है, गेहूँ-चने की फसल हरी, किसान की इन आँखों में, मेहनत की है सीख भरी। शिशिर की ये ऋतु जैसे, संयम और धैर्य का पाठ, सफर ये अब शुरू हुआ, बसंत ऋतु के द्वार तक का ठाठ। 🌾 🚜 🧡 📈 💎

५. पक्षियों के ये झुंड उड़ते, नीले उस अंबर में, शिशिर की इस सांज वेला, रंग घुले दिगंबर में। नदी तट पर सांज-बाती, मंद दीयों का उजास, भक्ति की इन साँसों से, भर गया ये आकाश। 🐦 🌅 🕯� 🌌 🐚

६. धूप-छाँव का ये खेल, शिशिर ऋतु में रंगता है, पुरानी यादों के झूलों पर, मन सतत अब दंगता है। सादे-सरल जीवन का, यही तो असली मर्म है, शिशिर की इस गोद में, सिमटा सारा धर्म है। ⛅ 🧸 🧠 🛐 🛡�

७. अलविदा दें हम पुराने को, नए की अब प्यास धरें, शिशिर ऋतु की इस राह पर, जीवन को हम खास करें। विठ्ठल नाम की गूँज मुख में, और माथे पर बुक्का, शिशिर की इस भक्ति का, मार्ग हमारा है पक्का। 🙏 🌸 🚩 ♾️ 🎊

EMOJI SUMMARY (HINDI):
❄️ 🌫� 🌳 😴 🌬� 🍂 🧘�♂️ 📜 🍃 ✨ ☀️ 🕉� 🕍 🧿 🌾 🚜 🧡 📈 💎 🐦 🌅 🕯� 🌌 🐚 ⛅ 🧸 🧠 🛐 🛡� 🙏 🌸 🚩 ♾️ 🎊

WORD SUMMARY (HINDI):
शिशिर ऋतु, ठंड, पतझड़, कोहरा, सूर्यप्रकाश, प्रकृति, त्याग, शांति, भक्ति, खेती, शीतलता, प्रसन्नता।

शिशिर ऋतूचा हा गारवा आपल्या आयुष्यात नवी उभारी घेऊन येवो!

--अतुल परब
--दिनांक-31.01.2026-शनिवार.
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