।। नेवासा नगरी के राजा: श्री मोहिनीराज कुलधर्म उत्सव ।।-🚩 🙏 🏰 🔱 🎡 🥁 🍽️ 📜

Started by Atul Kaviraje, March 29, 2026, 12:16:44 PM

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Atul Kaviraje

श्री मोहिनीराज कुलधर्म कुलाचार-नेवासा खुर्द, तालुका-नेवासा, जिल्हा-नगर-

।। नेवासा नगरी के राजा: श्री मोहिनीराज कुलधर्म उत्सव ।।

दिनांक: ०१.०२.२०२६ - रविवार

पद १: कुलधर्म का मंगल आरंभ नेवासा खुर्द नगरी में आज, छाई है खुशहाली, मोहिनीराज के दर्शन को, भक्तों की भीड़ मतवाली। कुलधर्म और कुलाचार का, ये पावन त्योहार, श्रद्धा के इस संगम में, हुआ भक्ति का संचार। ( अर्थ: नेवासा खुर्द में श्री मोहिनीराज देव का कुलधर्म और कुलाचार विधि उत्साह के साथ मनाई जा रही है। ) 🚩 🏰 🙏 ✨ 🏘�

पद २: देव का दिव्य मोहिनी रूप अमृत हेतु देवों ने, लिया था मोहिनी रूप, नेवासा नगरी में खिला, भक्ति का पावन धूप। शंख-चक्र-गदा धारी, मूरत है ये अति प्यारी, दर्शन पाकर धन्य हुए, भक्त सब बारी-बारी। ( अर्थ: समुद्र मंथन के समय विष्णु जी द्वारा लिया गया मोहिनी रूप नेवासा में मोहिनीराज के रूप में पूजित है। ) 🔱 🎡 🐚 👑 😍

पद ३: जागरण और कुलाचार विधि रात बिताई जागरण में, हुआ कुलाचार का मान, मोहिनीराज के जयघोष से, जागा सारा जहान। भंडारा और गुलाल की, हुई वर्षा आज यहाँ, भक्ति की इस सुगंध से, महका सारा जहाँ। ( अर्थ: कुलाचार विधि में रात भर जागरण किया जाता है और गुलाल-भंडारा उड़ाकर उत्सव मनाया जाता है। ) 🥁 🕯� 🟠 🎊 🙌

पद ४: प्रसाद की मिठास नैवेद्य का है मान बड़ा, पूरनपोली का भोग, भक्ति भाव से जो आए, मिटे उसके सब रोग। पीढ़ियों से चली आई, ये पूर्वजों की रीत, मोहिनीराज के चरणों में, गाते हम ये गीत। ( अर्थ: भगवान को भोग लगाकर पूर्वजों से चली आ रही कुल की परंपरा को श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। ) 🍽� 🥘 🍯 😇 😋

पद ५: ज्ञानेश्वर माऊली की साक्षी नेवासा है पावन भूमि, जहाँ ज्ञानेश्वरी प्रकटी, मोहिनीराज की छाया में, भक्ति की धारा सिमटी। पैस खंभ के स्मरण से, पावन हुआ ये मन, यात्रा के इस उत्सव में, धन्य हुआ जीवन। ( अर्थ: नेवासा में ही संत ज्ञानेश्वर ने ज्ञानेश्वरी लिखी थी। इस पवित्र स्थान पर उत्सव मनाना गौरव की बात है। ) 📜 ✍️ 🏛� ✨ 🙏

पद ६: पालखी और छबिना बाजे-गाजे संग चली पालखी, उत्सव है ये न्यारा, भक्तों की इस भीड़ में, बहा खुशियों का धारा। ताल-मृदंग की थाप पर, नाच रहे सब भक्त, मोहिनीराज की कृपा से, दूर हुए सब कष्ट। ( अर्थ: ताल-मृदंग की गूँज में जब देव की पालखी निकलती है, तो भक्त आनंद में झूम उठते हैं। ) 🥁 💃 🚶�♂️ 🎊 🚩

पद ७: विदाई और अटूट श्रद्धा अगले बरस फिर आएँगे, चरणों में रख शीश, हृदय में हम ले चले, आपका पावन आशीष। नेवासा खुर्द नगरी पर, रहे सदा आपकी माया, भक्तों पर बनी रहे, प्रभु आपकी ये छाया। ( अर्थ: भक्त भगवान का आशीर्वाद लेकर और अगले वर्ष फिर आने का वादा कर विदा लेते हैं। ) 👋 ❤️ 🚩 🌸 ✨

शब्द सारांश (Word Summary - Hindi)
नेवासा खुर्द, मोहिनीराज, कुलधर्म, कुलाचार, ज्ञानेश्वरी, पालखी, भंडारा, भक्ति, आशीर्वाद, परंपरा।

चिन्ह सारांश (Emoji Summary - Hindi)
🚩 🙏 🏰 🔱 🎡 🥁 🍽� 📜 👋

--अतुल परब
--दिनांक-01.02.2026-रविवार. 
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