।। संत रोहिदास जयंती: मानवता का प्रकाश ।।-🚩 ✨ 🙏 🌊 🤝 ⚖️ 👞 📜 👋

Started by Atul Kaviraje, March 29, 2026, 12:21:10 PM

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Atul Kaviraje

संत रोहिदास जयंती-

।। संत रोहिदास जयंती: मानवता का प्रकाश ।।

दिनांक: ०१.०२.२०२६ - रविवार

पद १: जयंती का मंगल उत्सव भक्ति का ये सूर्य उगा, मंगल दिन ये आज आया, संत रोहिदास जयंती का, उत्सव महान है छाया। रविवार का ये शुभ मुहूर्त, भक्तों का ये मेला लगा, समता का ये महामंत्र, हर हृदय में है जगा। ( अर्थ: आज संत रोहिदास जी की जयंती है और सभी भक्त उनकी पावन स्मृति में हर्षोल्लास के साथ एकत्र हुए हैं। ) 🚩 ✨ 🙏 ☀️ 🎊

पद २: 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' "मन चंगा तो कठौती में गंगा", विचार तुम्हारा ये महान, शुद्ध हृदय से ही मिले, ईश्वर का वो पावन ज्ञान। बाह्य आडंबर से है श्रेष्ठ, मन की ये शुद्धि ही, तुम्हारी इसी शिक्षा में, मानवता की मूरत बसी। ( अर्थ: यदि मन शुद्ध है तो गंगा आपके पास ही है; उन्होंने सिखाया कि बाहरी दिखावे से अधिक मन की पवित्रता आवश्यक है। ) 🌊 🧘�♂️ ✨ ❤️ 😊

पद ३: समता और भाईचारा जाति-पाति का भेद मिटाया, दिया समता का संदेश, मानवता ही धर्म श्रेष्ठ, चमका ये भारत देश। अमीर हो या गरीब कोई, तेरे दर पर सब समान, भक्ति के इस प्रवाह ने, बढ़ाया सबका यहाँ मान। ( अर्थ: रोहिदास महाराज ने जातिवाद को नकारते हुए समानता का मार्ग दिखाया और समाज में भाईचारे की भावना जगाई। ) 🤝 🌍 ⚖️ 🙌 🕊�

पद ४: कर्म की महिमा महान चर्मकार कुल में जन्म लेकर, कर्म को ही माना देव, हाथों के उस काम में भी, रखा सदा भक्ति का भाव। मेहनत करने वाला हर हाथ, ईश्वर का ही रूप है, तुम्हारे इन महान कर्मों का, साक्ष्य ये जग स्वरूप है। ( अर्थ: उन्होंने अपने काम को ही पूजा माना और श्रम को ईश्वर का दर्जा देकर कर्मठता का संदेश दिया। ) 👞 🧵 🪡 💪 😇

पद ५: अंतर्मन के विठ्ठल काबा-काशी कहाँ ढूँढते, देव बसते तेरे भीतर, भक्ति के इस सागर में, पावन हुए सब मन-मन्दिर। निर्गुण निराकार ईश्वर का, किया तुमने अखंड चिंतन, तुम्हारे शब्दों ने किया, समाज का ये नूतन मनन। ( अर्थ: ईश्वर को बाहर खोजने की आवश्यकता नहीं, वह हमारे हृदय में ही वास करता है, यही उनकी मूल शिक्षा थी। ) 🔱 🛐 🕯� 🧘 ✨

पद ६: शांति और ज्ञान का दीप तुम्हारे पदों से मिलती है, शांति और समाधान, दुखी और पीड़ित जीवों को, मिला एक नया वरदान। अंधकार सारा दूर हुआ, ज्ञान का ये दीप जला, संत रोहिदास की कृपा से, मानवता का फूल खिला। ( अर्थ: उनकी वाणी ने समाज से अज्ञानता का अंधेरा मिटाया और पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन जीने की राह दिखाई। ) 📜 🕯� 💡 🌻 😌

पद ७: वंदन और कृतज्ञता कोटि-कोटि वंदन तुमको, हे संतों के शिरोमणि, तुम्हारी ही शिक्षा रहे, हमारे इस सदैव मन में। समता, ममता और भक्ति का, अखंड बहे यहाँ झरना, तुम्हारे विचारों का मार्ग ही, जग का है सुखद ठिकाना। ( अर्थ: संत रोहिदास जी के चरणों में नमन करते हुए हम उनके समानता के विचारों को अपनाने का संकल्प लेते हैं। ) 👋 ❤️ 🌸 🚩 ✨

शब्द सारांश (Word Summary - Hindi)
रोहिदास, जयंती, समता, मानवता, भक्ति, कर्म, मन चंगा, शांति, उत्सव, वंदन.

चिन्ह सारांश (Emoji Summary - Hindi)
🚩 ✨ 🙏 🌊 🤝 ⚖️ 👞 📜 👋

--अतुल परब
--दिनांक-01.02.2026-रविवार. 
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