।। दुर्गम गढ़ की पावन वारी: श्री मलंगगढ़ जत्रौत्सव ।।-⛰️ 🛕 🧗‍♂️ 🤝 🥁 ☁️ 🍛 👋👋

Started by Atul Kaviraje, March 30, 2026, 11:36:11 AM

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Atul Kaviraje

श्री मलंगगड यात्रा-कल्याण-

।। दुर्गम गढ़ की पावन वारी: श्री मलंगगढ़ जत्रौत्सव ।।

दिनांक: ०२.०२.२०२६ - सोमवार

पद १: गढ़ का भव्य दृश्य कल्याण नगरी की गोद में बसा, मलंगगढ़ ये अजय दुर्ग, ऊँचे शिखर पर विराजे देव, जैसे भू पर ही हो स्वर्ग। सोमवार की ये पावन सुबह, यात्रा का ये उत्सव महान, भक्तों के इस जयघोष से, गूँज उठा है ये आसमान। ( अर्थ: कल्याण के पास स्थित ऊँचे और दुर्गम मलंगगढ़ पर यात्रा के कारण भक्तों का भारी उत्साह है। ) ⛰️ 🛕 ✨ 🚩 🏯

पद २: कठिन सीढ़ियों की राह ऊँचे पहाड़ और दुर्गम राहें, फिर भी मन में भक्ति की प्यास, हर सीढ़ी चढ़ते हुए मिले, श्रद्धा का एक मीठा अहसास। मलंग शाह बाबा के नाम से, गूँज रहा है भक्ति का नाद, चरणों में शीश झुकाने पर, मिलता प्रभु का आशीर्वाद। ( अर्थ: चढ़ाई कठिन होने के बावजूद भक्त खुशी-खुशी गढ़ चढ़ते हैं और बाबा के चरणों में नमन करते हैं। ) 🧗�♂️ 👣 🕯� 🙏 🌬�

पद ३: विविधता में एकता का गढ़ जाति-धर्म से परे यहाँ पर, इंसानियत की एक ही रीत, हिंदू-मुस्लिम मिलकर गाते, यहाँ समानता के पावन गीत। मलंगगढ़ की इस पावन भूमि पर, गूँजती है ये एकता, भक्ति के इस प्रवाह में, मिट जाती है सारी अनेकता। ( अर्थ: मलंगगढ़ सामाजिक एकता का प्रतीक है जहाँ सभी धर्मों के लोग प्रेम और श्रद्धा से एकत्र होते हैं। ) 🤝 ❤️ 🌍 🕯� 🕊�

पद ४: पालकी और भंडारे की उधळण बजते-गाजते निकली पालकी, गुलाल और भंडारे की रास, भक्तों की इन आँखों में है, दर्शन की एक मीठी प्यास। 'मलंग बाबा के नाम का जयकार', गूँज रही है अब हर घाटी, चैतन्य का महासागर आया, चूमने इस पावन माटी। ( अर्थ: ढोल-ताशों और गुलाल की उधळण के साथ निकली पालकी से पूरा पहाड़ी क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। ) 🥁 🟡 🎊 🚶�♂️ 🙌

पद ५: प्रकृति का सुंदर स्वरूप प्रकृति के इस सानिध्य में, गढ़ का ये ठाठ निराला, ऊँचे शिखर से बहता है, भक्ति का ये शीतल नाला। कोहरे और इन बादलों के होंठों पर, गुरुदेव का ही गान, मलंगगढ़ की वारी से हुआ, जीवन का कल्याण। ( अर्थ: गढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और वहाँ का शांत वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक सुख प्रदान करता है। ) ☁️ 🌿 ⛰️ 🌬� ✨

पद ६: नैवेद्य और सेवा श्रद्धा का ये मीठा भोग, चढ़ाया हमने मन से आज, भक्तों के सब कष्टों को, दूर करेंगे ही महाराज। अन्नदान और सेवा का, यात्रा में है बड़ा महिमा, इंसानियत के इस रिश्ते की, रही न कोई अब सीमा। ( अर्थ: यात्रा में अन्नदान और सेवा की जाती है ताकि सबका कल्याण हो और मानवता की रक्षा हो। ) 🍛 🍽� 🤝 😇 ❤️

पद ७: विदाई और वंदन विदा लेते समय भारी मन, यादें बसी हैं सीने में, अगले बरस फिर आएँगे, स्वाद है तेरे संग जीने में। मलंगगढ़ की ये पावन यात्रा, देती मन को बड़ी शक्ति, तेरे ही नाम में डूबी रहे, हमारी ये अखंड भक्ति। ( अर्थ: यात्रा के समापन पर भक्त अगले वर्ष फिर आने का संकल्प लेते हैं और गुरु का आशीष साथ ले जाते हैं। ) 👋 ❤️ 🚩 💮 🙏

शब्द सारांश (Word Summary - Hindi)
मलंगगढ़, कल्याण, यात्रा, पर्वतारोहण, पालकी, एकता, भक्ति, प्रकृति, सोमवार, आशीर्वाद।

चिन्ह सारांश (Emoji Summary - Hindi)
⛰️ 🛕 🧗�♂️ 🤝 🥁 ☁️ 🍛 👋

--अतुल परब
--दिनांक-02.02.2026-सोमवार.
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