दो स्वरूप

Started by शिवाजी सांगळे, April 01, 2026, 07:26:10 PM

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शिवाजी सांगळे

दो स्वरूप

है सारा मनगढंत खेल
ईश्वर और मानव
प्रकृति को भुलाकर हमारा मेल !

कहां है दोनों का मेला
सुरज और चंद्रमा
रात का अंधेरा दिन का उजाला !

कहां टिकता है ठाँव
आस्था एवं विश्वास
गहराता है, दुविधा में मनोभाव !

कौन पुर्णरुप स्वरूप
ईश्वर और मानव
एक मे ही हैं बसें दोनों ये रूप !

©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९
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