बात की बात

Started by शिवाजी सांगळे, April 06, 2026, 02:39:59 PM

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शिवाजी सांगळे

बात की बात

जो ना मिल पाया...उसे सोचना क्या
जो ना कुछ बोले..उससे बोलना क्या

रह एक भली अपनी जानी पहचानी
अनजान राह पर अकेले चलना क्या

चाहे सुहाने लगते अक्सर ढोल दूरके
जरूरत नहीं तो, जबरन देखना क्या

फिसलती है जब रेत अक्सर हाथोंसे
बेवजह आखों में उसको बसाना क्या

हरकोई बात जबभी होती है वक्त पर
तो छोड़ देना उसे,बेकार सोचना क्या

©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
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