लोहसर के राजा - श्री भैरवनाथ-

Started by Atul Kaviraje, April 25, 2026, 11:08:16 AM

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Atul Kaviraje

02.04.2026=THURSDAY-
SHRI BHAIRAVANAATH YAATRAA-LOHASAR, TALUKA-PATHARDI-

येथे २ एप्रिल २०२६, गुरुवार रोजी अहमदनगर जिल्ह्यातील लोहसर (ता. पाथर्डी) येथे साजरा होणाऱ्या श्री भैरवनाथ यात्रेनिमित्त विशेष भक्तीमय दीर्घ मराठी कविता आणि सोहळ्याचे इतर तपशील सादर आहेत.

हिंदी अनुवाद: लोहसर के राजा - श्री भैरवनाथ

१. पाथर्डी की इस माटी में, लोहसर है महान,
भैरवनाथ के चरणों में, झुके सबका मान।
दो अप्रैल का दिन खिला, गुरुवार का है वार,
यात्रा की इस खुशी में, हर्षाए सारा संसार।

२. गुलाल की वर्षा हुई, रंगा है आसमान,
भैरवनाथ के जयघोष से, गूँजे सकल जहान।
ढोल-ताशे बजने लगे, हलगी की है गूँज,
भक्ति रस में डूब गया, गाँव का यह कुंज।

३. काँधों पर पालकी सजी, यात्रा निकली भारी,
भैरवनाथ के दर्शन को, भक्तों की बलिहारी।
नारियल-फूलों की भेंट दी, श्रद्धा का है भाव,
पावन हुई है माटी और, पावन हुआ यह गाँव।

४. पाथर्डी माटी का वैभव है, भैरवनाथ की वारी,
तेरी कृपा से घर-घर में, सुख की लहर है जारी।
संकट सारे दूर भागते, देख तुम्हारा रूप,
मंदिर के आँगन में महके, श्रद्धा वाली धूप।

५. शिखर पर ध्वज फहराता, गर्व से ऊँचा आज,
भैरवनाथ स्वामी हमारे, भक्तों पर है राज।
नैवेद्य की खुशबू आए, घर-घर में उल्लास,
भक्ति का यह आनंद आज, बढ़ाओ हमारे पास।

६. कुश्ती का अखाड़ा गूँजे, मर्दाना है खेल,
भक्ति और शक्ति का यहाँ, होता सुंदर मेल।
निर्धन हो या धनवान, सबका तू ही नाथ,
सदा बनी रहे प्रभु, हम पर तुम्हारी साथ।

७. वर्षों बाद भी वर्ष बीतें, यात्रा तेरी आएगी,
भक्ति की यह जलधारा, अविरल बहती जाएगी।
अगले बरस भी जल्दी आना, यही है अरज हमारी,
सफल हुआ यह जन्म मेरा, पाकर सूरत तुम्हारी।

भक्तीमय चित्र संकल्पना (Image Prompt)
चित्र संकल्पना: अहमदनगर जिल्ह्यातील लोहसर (पाथर्डी) येथील श्री भैरवनाथ मंदिर, मंदिरावर फडकणारा भव्य भगवा ध्वज. आकाशात केशरी गुलालाची उधळण, समोरून जाणारी सजलेली पालखी, पारंपारिक वाद्ये (हलगी) वाजवणारे भक्त आणि एका बाजूला कुस्तीचा आखाडा जिथे पैलवान कुस्ती खेळत आहेत.

AI Image Prompt:

"A vibrant digital painting of the Shri Bhairavanaath temple festival in Lohasar, Pathardi, Ahmednagar. A majestic traditional temple with a saffron flag fluttering. Devotees carrying a decorated palanquin through a massive cloud of orange gulal powder. Traditional musicians playing Halgi and Dhol. In the background, an open-air wrestling akhada (wrestling pit) with wrestlers. Bright sunny daylight, rural Maharashtra festive setting, hyper-realistic, 4K resolution."

--अतुल परब
--दिनांक-02.04.2026-गुरुवार.
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