।। भवानी माता का त्रिवेणी संगम: कर्म, धर्म और योग II-⚔️ ⚖️ 🧘‍♀️ 🚩 ✨ 🤲 🌊 🔱

Started by Atul Kaviraje, April 26, 2026, 11:23:30 AM

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Atul Kaviraje

भवानी माता का 'कर्म', 'धर्म' और 'योग' में योगदान-
(कर्म, धर्म और योग में भवानी माता की भूमिका)
(The Role of Bhavani Mata in Karma, Dharma, and Yoga)
Bhavani MatA's contribution in 'Karma' and 'Dharma' and 'Yoga'-

।। भवानी माता का त्रिवेणी संगम: कर्म, धर्म और योग II

पद १:
आदिशक्ति तू माँ भवानी, कर्म की तू जननी,
तेरी प्रेरणा से चलती, सृष्टि की ये करनी।
हाथ में लेकर कर्म-खड्ग, पाप का करती संहार,
भक्तों के इस जीवन का, हर लेती तू भार।
(अर्थ: हे माँ भवानी, तू कर्मों की माता है, तेरी प्रेरणा से सृष्टि चलती है और तू पापों का नाश करती है।)
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पद २:
धर्म की तू रक्षक माता, नीति का तू रूप,
तेरे दर्शन से जलते, अंतरमन के दीप।
अधर्म का नाश करने, अवतार तू लेती,
सत्य और न्याय की, तू ही राह दिखाती।
(अर्थ: तू धर्म की रक्षक है, तेरे दर्शन से मन का अंधेरा मिटता है और तू न्याय की स्थापना करती है।)
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पद ३:
योग साधना तूने सिखाई, चित्त शुद्धि का मार्ग,
तेरी कृपा से मिले जीव को, आनंद का स्वर्ग।
कुंडलिनी की शक्ति में, तेरा ही वास है,
योग के इस प्रवास में, तेरा ही ध्यास है।
(अर्थ: योग और चित्त शुद्धि का मार्ग तूने दिखाया, तेरी कृपा से परम सुख और कुंडलिनी जागृति मिलती है।)
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पद ४:
कर्म करो फल की तज इच्छा, तेरी यही है शिक्षा,
तेरे चरणों में अर्पित है, कर्मों की हर भिक्षा।
अहंकार का त्याग कर, सेवा हो हाथों से,
तू ही गति देती है माँ, कर्माश्रित रास्तों पे।
(अर्थ: निष्काम कर्म की शिक्षा तूने दी, हम अपने कर्म तुझे अर्पित करते हैं।)
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पद ५:
धर्म के इस मार्ग पर, तू ही हमारा आधार,
तेरी कृपा से तरते हम, ये संसार सागर।
कर्तव्य का बोध कराता, तेरा ये वरदहस्त,
तेरी भक्ति में मिट जाते, भय सारे समस्त।
(अर्थ: धर्म मार्ग पर तू ही सहारा है और तेरा आशीर्वाद हमें कर्तव्य का मार्ग दिखाता है।)
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पद ६:
योग में स्थिर रहकर माँ, ब्रह्मरूप तू होती,
भक्तों के इस हृदय में, प्रेम बीज तू बोती।
इड़ा-पिंगला सुषुम्ना, तेरे ही ताल पर,
साधक की तू रक्षा करती, इस चराचर पर।
(अर्थ: योग में तू ब्रह्म स्वरूपा है और साधकों की रक्षा करती है।)
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पद ७:
कर्म, धर्म और योग तीनों, तुझमें ही समाए,
तेरे चरणों में भक्ति के, उपवन हमने पाए।
भवानी माता जय-जयकार, गूँजे अंबर सारा,
तेरी कृपा की बनी रहे, हम पर शीतल धारा।
(अर्थ: कर्म, धर्म और योग तुझमें ही विलीन हैं, तेरी जय हो और तेरी कृपा हम पर बनी रहे।)
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💠 शब्द सारांश (Hindi):
आदिशक्ति, प्रेरणा, कर्म-खड्ग, धर्म-रक्षक, नीति, योग-साधना, निष्काम-कर्म, कर्तव्य, ब्रह्मरूप, भक्ति, कृपा।

💠 ईमोजी सारांश (Hindi):
⚔️ ⚖️ 🧘�♀️ 🚩 ✨ 🤲 🌊 🔱 🕉� 💐 🙏

--अतुल परब
--दिनांक-24.04.2026-शुक्रवार.
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