श्री भैरवनाथ यात्रा - काँगाँव-🙇‍♂️ 🌏 🙏 🤝🛡️ 🌈 🤝 ✨

Started by Atul Kaviraje, May 03, 2026, 11:46:36 AM

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Atul Kaviraje

14.04.2026=TUESDAY-
SHRI BHAIRAVNAATH YAATRAA-KAANGAAV, TALUKA-DAUND-

१४ एप्रिल २०२६, मंगळवार. दौंड तालुक्यातील कांगाव येथील ग्रामदैवत श्री भैरवनाथ (काळभैरव) यात्रेनिमित्त ही विशेष भक्तिमय आणि उत्साहपूर्ण काव्यरचना.

हिंदी अनुवाद: श्री भैरवनाथ यात्रा - काँगाँव

१. दौंड की इस मिट्टी में, भक्ति की महक छाई,
काँगाँव की यात्रा की, शुभ बेला है आई।
चैत्र के इस मंगल दिन, उत्सव बड़ा महान,
भैरवनाथ के चरणों में, झुकता सारा जहान।
(अर्थ: दौंड के काँगाँव में आज भैरवनाथ यात्रा का उत्साह है और हर तरफ भक्ति का वातावरण बना है।)
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२. सिंदूरी मूरत तेरी, आँखों में बस जाती है,
भैरवनाथ के चरणों में, सारी व्याधि मिटती है।
हाथ में शस्त्र लिए, तू सबका रखवाला,
तेरे नाम से मिलता, सत्य को नया उजाला।
(अर्थ: भैरवनाथ का तेजस्वी रूप देखकर मन के सारे दुख मिट जाते हैं। आप हमारे रक्षक हैं और आपके नाम से सत्य की जीत होती है।)
☀️ 🙏 🛡� 😊

३. 'भैरवनाथ के नाम का चांगभलं', गूँज रहा यह गान,
गुलाल और नारियल से, हो रहा उत्सव महान।
सासन काठियाँ ऊँची-ऊँची, नभ को छूती हैं,
भक्ति के इस सागर में, सब आँखें भीगी हैं।
(अर्थ: 'चांगभलं' के नारों और गुलाल की वर्षा के बीच ऊँची सासन काठियाँ शोभा बढ़ा रही हैं।)
🏮 🎶 🕺 🚩

४. पालकी जब निकलती है, मन में भरता उल्लास,
भैरवनाथ की कृपा का, होता है अहसास।
दुख और संकट दूर हों, देख तुम्हारा रूप,
हृदय में जलती रहे, सदा भक्ति की धूप।
(अर्थ: जब पालकी निकलती है, तो मन प्रसन्न हो जाता है। आपका रूप देखकर सारे दुख मिट जाते हैं।)
🙌 📿 🕯� ❤️

५. कुश्ती का आखाड़ा और, मेलों का यह साज,
गाँव की इस रौनक पर, तेरा ही है राज।
मिठाइयों की महक और, झूलों की है मस्ती,
भैरवनाथ देव हमारे, इस नगरी की हस्ती।
(अर्थ: मेले में कुश्ती और झूलों का आनंद है। भैरवनाथ देव ही काँगाँव के सच्चे राजा हैं।)
🤼�♂️ 🍬 🎡 🍬

६. सूखा हो या मुश्किल हो, तुम ही देते सहारा,
तुम्हारी ही दया से, बहती सुख की धारा।
मिलकर पर्व मनाते हम, एकता का पैगाम,
भक्ति का यह रिश्ता, बना रहे सुबह-शाम।
(अर्थ: आप हर मुश्किल में सहारा देते हैं। हम सब मिलजुलकर एकता के साथ यह पर्व मनाते हैं।)
🛡� 🌈 🤝 ✨

७. चरणों में नमन हमारा, यही एक वरदान माँगूँ,
समृद्धि और सुख मिले, तेरा ही यश गाऊँ।
अगले बरस फिर आएँगे, इसी प्रेम के साथ,
भैरवनाथ की यात्रा का, गान करेंगे साथ।
(अर्थ: हम आपके चरणों में झुकते हैं और सुख-समृद्धि माँगते हैं। अगले साल हम फिर इसी प्रेम के साथ आएँगे।)
🙇�♂️ 🌏 🙏 🤝

--अतुल परब
--दिनांक-14.04.2026-मंगळवार.
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