काली माता का मोह और मोहवश हरण-🖤⚔️🙏✨🌀🌍🕸️🥀😔👁️🔥👹🌩️😱🔱🕉️🧘‍♂️🐾💫🌅👅😮

Started by Atul Kaviraje, May 24, 2026, 11:01:26 AM

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Atul Kaviraje

काली माँ का लालच और हिरण का लालच-
(Kali Mata's Passion and Her Liberation from Attachment)

शीर्षक: काली माता का मोह और मोहवश हरण

(Kali Mata's Passion and Her Liberation from Attachment)


पद १
काली माता दुष्ट जनों का संहार सदा ही करती,
भक्तों की रक्षा की खातिर पल में आकुल होती।
पर माया का खेल अनूठा इस सृष्टि में चलता,
क्षणभर को उनका भी मन इस जग के मोह में रमता।
(अर्थ: काली माता दुष्टों का विनाश और भक्तों की रक्षा करती हैं। लेकिन इस सृष्टि में माया का खेल ऐसा है कि पल भर के लिए उनका मन भी मोह में खिंचा चला जाता है।)
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पद २
मोह थमा ना उनसे इस सुंदर धरा का न्यारा,
वासना और अहंकार के झूठे सुख का सारा।
माया के जाल में देवी क्षणभर को खुद को भूलीं,
भक्ति मार्ग को छोड़ आत्मा जग की ओर ही दौड़ी।
(अर्थ: देवी इस पृथ्वी के झूठे सुख और अहंकार के मोह में आ गईं। माया के जाल में फंसकर वे स्वयं का मूल रूप भूल गईं और संसार की ओर आकर्षित हुईं।)
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पद ३
असुरों का संहार करते क्रोध बढ़ा था भारी,
अहंकार और मोह की उसने ले ली शक्ल करारी।
सृष्टि थर-थर कांप उठी देवी के भीषण रूप से,
मोहवश हुईं माता अपनी ही शक्ति के स्वरूप से।
(अर्थ: राक्षसों का वध करते-करते माता का क्रोध इतना बढ़ गया कि उसने मोह और अहंकार का रूप ले लिया। उनके इस भयानक रूप से पूरी सृष्टि कांपने लगी।)
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पद ४
भोलेनाथ शिवशंकर तब आए उनके आगे,
लेट गए वो चरणों में तजकर सब अपने तागे।
शांत करने माता का वो अनुपम रुद्रावतार,
शिव चरणों के स्पर्श से मिटा मोह का अंधकार।
(अर्थ: माता के इस भीषण रुद्रावतार को शांत करने के लिए स्वयं भगवान शिव उनके सामने आए और उनके चरणों में लेट गए। शिव के स्पर्श से सारा अंधकार दूर हो गया।)
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पद ५
जीभ निकाली बाहर माता ने लज्जा से भरके,
मोह का वो परदा टूटा मन के द्वारे सरके।
शिव तत्त्व ने किया उनके मोह का पूर्ण हरण,
जाग उठीं फिर माता, आईं सत्य की शरण।
(अर्थ: शिव की छाती पर पैर पड़ते ही माता ने लज्जा से जीभ बाहर निकाल ली। उनके मन से मोह का पर्दा हट गया और शिव तत्त्व ने उनके मोह का हरण कर लिया।)
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पद ६
मोह ही बंधन का जग में मुख्य आधार होता,
ज्ञान और वैराग्य से ही इसका सर्वनाश होता।
काली माता ने दुनिया को यही पाठ सिखाया,
मोह त्यागकर भक्ति मार्ग ही सर्वोत्तम कहलाया।
(अर्थ: मोह ही मनुष्य को बंधनों में बांधता है, जो केवल ज्ञान और वैराग्य से नष्ट होता है। माता ने यही सीख दी कि मोह छोड़कर भक्ति का रास्ता चुनें।)
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पद ७
अब शांत हुईं माता, रूप हुआ अति सुंदर,
आशीष देतीं भक्तों को वो करुणा का सागर।
मोह नष्ट हुआ और बची सिर्फ शुद्ध भक्ती,
काली मां के चरणों में मिलती जग की शक्ती।
(अर्थ: अब माता पूरी तरह शांत हैं और उनका रूप अत्यंत मनोहर है। मोह समाप्त हो चुका है और केवल शुद्ध भक्ति शेष है, जो भक्तों को परम शक्ति देती है।)
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हिंदी कविता: इमोटिकॉन और शब्द सारांश (Emoji & Word Summary)
इमोटिकॉन सारांश (Only Emojis Summary):
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शब्द सारांश (Only Words Summary):
सृष्टि की रक्षक माता काली असुरों का वध करते समय अत्यधिक क्रोध और माया के प्रभाव में आकर क्षणभर के लिए मोह व अहंकार के वश में हो जाती हैं। उनके इस विनाशकारी रूप से सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव स्वयं उनके मार्ग में लेट जाते हैं। शिव के पावन स्पर्श से माता का मोहभंग होता है, वे लज्जा से जीभ बाहर निकालती हैं और उनका मोहवश हरण होता है। अंत में वे शांत होकर भक्तों को ज्ञान और शुद्ध भक्ति का संदेश देती हैं।

--अतुल परब
--दिनांक-22.05.2026-शुक्रवार.
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