'सफ़र: तब और अब'-✈️🤐📱🛣️🚗👟💨🤫⏳📧✈️💭🏡🤝🍵🕒🚌📄📨✍️⏳🚉🍲❤️🌌🌅🤝🏆

Started by Atul Kaviraje, May 25, 2026, 03:06:33 PM

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Atul Kaviraje

यह कविता आज के डिजिटल ज़माने के शांत, अकेले सफ़र और 20-25 साल पहले के सफ़र के बीच का फ़र्क है, जो अपनेपन, बातचीत और अचानक मिलने वाली मस्ती से भरा है।

नीचे दी गई एक मज़ेदार, तुकबंदी वाली और इमोशनल लंबी कविता है जो बीते सफ़र की खूबसूरत यादें ताज़ा कर देती है।

📜 टाइटल: 'सफ़र: तब और अब'

1. पहला खट्टा-मीठा:
विदेश से लौटते हुए, घर की चाहत के साथ,
सफ़र अब खत्म होता है, मीठा और कड़वा।
सभी साथी अब बहुत शांत हो गए हैं,
बातचीत की पुरानी चाहत गायब हो गई है।
✈️🤐📱🛣�

मतलब: विदेश से अपने देश लौटते समय, घूमने की चाहत तो है, लेकिन अब साथी यात्री बहुत शांत और अकेले हो गए हैं। पहले सफ़र के दौरान जो बातचीत और बातचीत का मज़ा आता था, वह अब इस शांति में कहीं खो गया है।

2. दूसरी कड़वी बात:
जो कुछ नहीं कहते, वे अपनी सीट पर बैठे रहे,
सिर्फ़ ड्राइवर के दादा की, माया बातों पर ही रह गई।
किसी के जूतों की महक, कहते हो खिड़की खोलो,
अपने आप पैर घसीटते हुए, गाड़ी में सन्नाटा पसर गया।
🚗👟💨🤫

मतलब: सफ़र में कोई एक-दूसरे से बात करने को तैयार नहीं, सब अपने ही ख्यालों में खोए हुए। सिर्फ़ ड्राइवर और उसने चार अपनेपन भरे शब्द कहे। जैसे ही ड्राइवर ने कहा कि उन्हें किसी के जूतों की महक आ रही है, गाड़ी में बैठे सबने शक से अपने पैर पीछे खींच लिए, यह एक मज़ेदार मज़ाक निकला।

3. तीसरी कड़वी बात:
फ़ोन का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता, वो ई-मेल का सिलसिला,
एक-दूसरे के पास बैठी रूहें, दुनिया टेढ़ी हो गई।
उस सोलह घंटे की फ़्लाइट में, पुरानी यादें ताज़ा हो गईं,
बीस साल पहले की जान-पहचान, दिल को बहुत छू गईं। ⏳📧✈️💭

मतलब: आजकल, उसके बगल में बैठा पैसेंजर सिर्फ़ अपना फ़ोन या ई-मेल चेक करने में बिज़ी रहता है। ऐसे समय में, 16 घंटे की फ़्लाइट के दौरान, उसे 20-25 साल पहले के सफ़र का वो अंदाज़ याद आ गया, जब सफ़र के दौरान नई जान-पहचान होती थी और कुछ रिश्ते ज़िंदगी भर साथ रहते थे।

4. चौथी खट्टी-मीठी बात:
स्टैंड पर समय बिताना, जान-पहचान का वो आसरा,
अजनबी भी घर आते थे, सारी दुनिया भूलकर।
पांच-छह घंटे बातें करना, कैसे निकलें,
अजनबी भी परिवार जैसे हो जाते थे।
🏡🤝🍵🕒

मतलब: पहले, अगर शहर से बाहर से आने के बाद 5-6 घंटे बस स्टैंड पर इंतज़ार करना पड़ता था, तो अजनबी भी कार में बनी जान-पहचान के दम पर एक-दूसरे के घर आते थे और उस समय को खुशी-खुशी बातें करते हुए बिताते थे।

5. पांचवीं खट्टी-मीठी बात:
ट्रेन छूटने की उलझन में, उसे रुद्रावतार दिखे,
पैसे मिलने की उम्मीद में, उसने अपना पता बदला।
किसी और के नाम पर मनी ऑर्डर, वो आने का ज़माना,
भरोसे से रिश्ते निभाना, लोगों की वो इज्ज़त।
🚌📄📨✍️

मतलब: मुझे 83-84 के ज़माने में ST बस छूटने और फिर रिफंड के पैसे पाने के लिए किसी और के नाम का इस्तेमाल करने का मज़ा याद है। उस समय एक-दूसरे पर इतना भरोसा था कि कोई किसी और के नाम पर अपने पते पर मनी ऑर्डर लेने के लिए इधर-उधर नहीं देखता था।

6. छठी खट्टी-मीठी बात:
हर घर में फ़ोन नहीं था, इंतज़ार करने की वो आदत,
पूरा दिन स्टैंड पर, भतीजी के लिए वो प्यार।
ट्रेन छह घंटे लेट थी, कॉन्टैक्ट करने का कोई तरीका नहीं था,
आखिरकार, हम लंच के समय मिले, वो जन्नत का रास्ता था। ⏳🚉🍲❤️

मतलब: 77-78 के ज़माने में, जब फ़ोन नहीं थे, तो रिश्तेदार दिन-रात स्टैंड पर भूखे इंतज़ार करते थे। ट्रेन 6 घंटे लेट चलती थी, इसलिए उनसे कॉन्टैक्ट करने का कोई तरीका नहीं था, लेकिन जब हम आख़िरकार घर पर मिले, तो खुशी स्वर्ग जैसी थी।

7. सातवीं कड़वी बात:
वो सारी पुरानी कहानियाँ, आज कितनी शानदार लगती हैं,
टेक्नोलॉजी की इस दुनिया में, लोग अपना आपा खो चुके हैं।
सफ़र का वो असली मज़ा, अब सिर्फ़ यादों में रह गया है,
बस इतना कहना काफ़ी है कि इंसान को इंसान से बात करनी चाहिए।
🌌🌅🤝🏆

मतलब: जो चीज़ें पहले के सफ़र में मुश्किल लगती थीं, आज वो बहुत मज़ेदार और खूबसूरत लगती हैं। आज के टेक्नोलॉजिकल ज़माने में, लोगों के बीच कम्युनिकेशन और अपनापन खत्म होता जा रहा है। इससे पता चलता है कि सफ़र का असली मज़ा एक-दूसरे से बात करने में है।

🎭 सिर्फ़ इमोजी समरी

✈️🤐📱🛣�🚗👟💨🤫⏳📧✈️💭🏡🤝🍵🕒🚌📄📨✍️⏳🚉🍲❤️🌌🌅🤝🏆

--अतुल परब
--तारीख-25.05.2026-सोमवार.
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