समय का चक्र: अंत और नई शुरुआत-⏳🥀🍃🌧️ ➡️ 💔🌪️⏳Empty ➡️ 🛑🧘‍♂️🌃🌅 ➡️ 🍂🌿🌱📖

Started by Atul Kaviraje, May 25, 2026, 03:28:11 PM

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Atul Kaviraje

(पूर्ण अंत के बाद स्वीकृति, घावों के भरने और शक्ति पाने पर एक प्रेरणादायक  कविता)

समय का चक्र: अंत और नई शुरुआत-

पद १
कभी-कभार लगता है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा,
समय जैसे बदलेगा, सुख का नया मार्ग लाएगा।
पर कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसा मोड़ आता है,
जहाँ समय का यह प्रवाह सब कुछ मिटा जाता है।

⏳ 🥀 🍃 🌧� *

पद २
सपने टूटते हैं आँखों के सामने, मन व्याकुल होता है,
दुख के इस बवंडर में कोई जवाब नहीं मिलता है।
जिस चीज़ को हमने जान से ज़्यादा चाहा हमेशा,
वही रेत की तरह हाथों से फिसल जाती है ज़रा सा।

💔 🌪� ⏳ Empty *

पद ३
अंत हमेशा बुरा ही हो, ऐसा नहीं होता मेरे यार,
वह रोक देता है मन की रोज़-रोज़ की कशमकश और भार।
अंधेरा जब रात का बेहद घना और गहरा होता है,
वही तो एक नई और खिली सुबह का रास्ता खोलता है।

🛑 🧘�♂️ 🌃 🌅 *

पद ४
पेड़ से पत्तों का गिरना तो प्रकृति का नियम पुराना है,
उसी खाली डाली को फिर से धैर्य से मुस्कुराना है।
जो खत्म हो गया उसे अब दिल से विदा कर दो,
नई कोरी स्लेट पर लिखे सत्य को स्वीकार कर लो।

🍂 🌿 🌱 📖 *

पद ५
मन का बोझ सबसे पहले थोड़ा हल्का करके देखो,
जो चीज़ बदल नहीं सकती, उसे हठ से मत परखो।
बिना हारे एक बार फिर खुद को खड़ा करते हैं,
इन खाली हाथों से ही चलो ज़माना फिर जीतते हैं।

🎈 🙅�♂️ 💪 🌍 *

पद ६
अनुभवों की यही तो सबसे बड़ी पूंजी होती है,
जो संकट के समय में हमें भीतर से मज़बूती देती है।
दुख आया तो क्या, कभी कदम पीछे मत हटाना,
हिम्मत से सामना करना ही है जीवन का असली तराना।

💎 🛡� 🚶�♂️ ✨ *

पद ७
चलो आज ही इस कड़वे सच को हम स्वीकार करें,
बीती बातों को भूलकर एक नया आगाज़ करें।
सब खत्म हो गया तो क्या, उम्मीद अभी भी ज़िंदा है,
स्वच्छ मन के भरोसे ही आने वाला कल चुनिंदा है।

🎯 🤝 😊 👑 *

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--अतुल परब
--दिनांक-25.05.2026-सोमवार. 
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