🌺 ।। मूर्तिकला के महामेरु: देवीप्रसाद राय चौधरी ।। 🌺🎨🗿🧱🇮🇳✨⚒️🏋️‍♂️🦾🔥🦁

Started by Atul Kaviraje, July 04, 2026, 05:34:09 PM

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Atul Kaviraje

15.06.2026-MONDAY-
Jun 15, 1899
Roy Chowdhury Devipasad, modern Indian sculptor and painter, was born

🕉� प्रस्तावना (हिंदी) 🕉�
आज दिनांक १५ जून २०२६, सोमवार को हम भारतीय कला जगत के एक महान और देदीप्यमान नक्षत्र को नमन कर रहे हैं। १५ जून १८९९ को आधुनिक भारतीय मूर्तिकला और चित्रकला के पुरोधा देवीप्रसाद राय चौधरी (Deviprasad Roy Chowdhury) का जन्म हुआ था। 'श्रम की विजय' (Triumph of Labour) और 'दांडी यात्रा' जैसी विश्वप्रसिद्ध मूर्तियां बनाकर उन्होंने भारतीय मिट्टी के श्रमिकों के जीवन को अमर कर दिया। उनके इस कलात्मक सफर को समर्पित ७ पदों की एक सुरीली, सरल और यमकयुक्त हिंदी कविता प्रस्तुत है। 🎨🗿धातु पत्थर 🇮🇳✨

🌺 ।। मूर्तिकला के महामेरु: देवीप्रसाद राय चौधरी ।। 🌺

पद १
पंद्रह जून का सोमवार लाया कला की पावन सुगंध,
देवीप्रसाद चौधरी के जन्मदिन पर जाग उठा नव आनंद।
१८९९ का वह पावन साल आया इस पवित्र धरती पर,
जिन्होंने कला का अनुपम संसार सजाया इस दुनिया पर।
🎨🗿धातु पत्थर 🇮🇳✨

पद २
चित्रों के रंगों और पत्थरों के सीने में उन्होंने फूंका प्राण,
मूर्तिकला के संसार में बढ़ाया मेरे भारत का मान।
कठिन परिश्रम करने वालों के स्नायु और उनकी ताकत,
मूर्तियों में सजीव कर दी उनकी वह कला पाहा अफाट।
⚒️ खुला स्नायु 🏋��♂️ 🦁

पद ३
'श्रम की विजय' गाती वह चेन्नई के समुद्र तट की मूर्ति,
कठिन कर्म की पूजा कैसी हो, इसकी दी सुंदर स्फूर्ति।
चार मजदूर मिलकर भारी पत्थर हटाते हैं जहां एक साथ,
मानव के अदम्य साहस का वह बना सबसे सुंदर हाथ।
🌊 🧱 शृंखला 🤝 😇

पद ४
'दांडी यात्रा' की अनूठी मूर्ति बनाकर गांधी जी को किया अमर,
क्रांति के उन बढ़ते कदमों को देख चकित हुई यह जमीं सारी।
कांस्य धातु के कण-कण में पिघला उनका वह देशप्रेम,
मूर्तिकला का सम्राट बनकर जग में रहा उनका नेम।
🚶�♂️ 🚩 स्वतंत्रता 🛡� 💖

पद ५
ललित कला अकादमी के पहले अध्यक्ष बनकर संभाला कार्य,
नए कलाकारों को रास्ता दिखाया, दूर किया हर एक अंधकार।
पद्मभूषण पुरस्कार से देश ने किया उनका बड़ा सम्मान,
कला के पावन मंदिर में मिला उन्हें सर्वोच्च स्थान।
📜 🏅 आदर 💎 🌈

पद ६
सादा रेखाचित्र हो या पत्थरों की वह जटिल नक्काशी,
देवीप्रसाद के हाथों ने हर कला में बिखेरी दिव्य प्रकाशी।
शब्दों के बिना इतिहास लिखने की कला उनके पास थी भाई,
उनकी ही प्रेरणा से आज कला जगत में नई चेतना आई।
🧘�♂️ 🧠 कला 🎨 🥇

पद ७
दिन बीता पर इस महान शिल्पी को करते हैं कोटि-कोटि नमन,
जिसके जादुई हाथों ने संवारा मेरे देश का यह गगन।
१५ जून के इस दिन कला की इस पावन ज्योत को जगाएं,
उनकी अद्भुत कृतियों से जीवन के सच्चे रंग सीख पाएं।
🙏 🌸 कृतज्ञता ात ात 🎉

📝 एकत्रित संक्षिप्त अर्थ (Collective Meaning)
इस कविता में आधुनिक भारतीय मूर्तिकला के जनक देवीप्रसाद राय चौधरी (जन्म: १५ जून १८९९) के कलात्मक अवदान का सुंदर वर्णन किया गया है। उन्होंने अपनी छेनी और रंगों से निर्जीव पत्थरों को जीवंत कर दिया। चेन्नई के मरीना बीच पर स्थापित उनकी कृति 'श्रम की विजय' देश के मजदूरों के अथक परिश्रम और एकता को दर्शाती है। वहीं दिल्ली में बनी उनकी 'दांडी मार्च' की कांस्य प्रतिमा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के जज्बे को जीवंत रखती है। ललित कला अकादमी के प्रथम अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कला को संस्थागत रूप दिया और भारत सरकार ने उन्हें 'पद्मभूषण' से अलंकृत किया। यह कविता उनकी महान विरासत के प्रति सम्मान प्रकट करती है।

📊 सारांश (Summary)
केवल शब्दों का सारांश (Word Summary): देवीप्रसाद राय चौधरी, १५ जून, जन्मदिन, मूर्तिकार, चित्रकार, श्रम की विजय, दांडी यात्रा, ललित कला अकादमी, पद्मभूषण, कांस्य मूर्ति, कला, इतिहास, मजदूर, नमन, प्रेरणा।

केवल ईमोजी सारांश (Emoji Summary): 🎨🗿🧱🇮🇳✨⚒️🏋��♂️🦾🔥🦁🌊🧱⛓️🤝😇🚶�♂️🚩🇮🇳🛡�💖📜🏅👏💎🌈🧘�♂️🧠🎨👑🥇🙏🌸🎨🏢🚩🎉

📌 तळटीप (Foot-Note)
💡 टिप्पणी: यह कविता १५ जून २०२६ (सोमवार) को भारत के महान आधुनिक मूर्तिकार और चित्रकार 'देवीप्रसाद राय चौधरी' की १२७वीं जयंती के अवसर पर उनकी अमर कलाकृतियों और राष्ट्र सेवा को सादर नमन करने हेतु लिखी गई है। कला चिरंतन है! 🙏 कला का सम्मान, राष्ट्र का अभिमान! 🌸🍃

--अतुल परब
--दिनांक-15.06.2026-सोमवार.
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