🌸 ॥ संत कोळबास्वामी माऊली ॥ 🌸📅 🌸 👣 🙏 🎉 🕯️ 🎵 🌊 🏡 🏰 👑 🔥 👀 📜 🤝 🌬️

Started by Atul Kaviraje, July 09, 2026, 11:58:29 AM

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Atul Kaviraje

21.06.2026-SUNDAY-
KOLBAASWAAMI JAYANTI- DHAAPEWAADAA-NAAGAPUR-

🌺 प्रस्तावना (Hindi Introduction) 🌺
आज दिनांक २१ जून २०२६, रविवार को, नागपुर के समीप धापेवाड़ा की पावन धरा के महान संत श्री कोळबास्वामी की जयंती है। 🌸 धापेवाड़ा को विदर्भ की पंढरी कहा जाता है। संत कोळबास्वामी विठ्ठल भक्ति में लीन रहने वाले एक ऐसे दिव्य संत थे, जिन्होंने अपने सीधे-सरल जीवन और मधुर भजनों से समाज को भक्ति का मार्ग दिखाया। 🙏 इस पावन अवसर पर, उनके चरणों में समर्पित एक अत्यंत सुंदर, अर्थपूर्ण, रसमय और यमकयुक्त ७ छंदों (कडवे) की हिंदी कविता और उसका संक्षिप्त भावार्थ यहाँ प्रस्तुत है। ✨

🌸 ॥ संत कोळबास्वामी माऊली ॥ 🌸

छंद १ (Stanza 1)
धापेवाड़ा पावन धरती, विठ्ठल भक्ति का है शोर, 👣
कोळबास्वामी के चरणों में, झुका रहे मन का हर छोर। 🙏
जयंती का यह शुभ दिन आया, हर्षाया सारा संसार, 🎉
भक्तों के हित दौड़े आते, साक्षात विठ्ठल के अवतार। 💖
🌻 ✨ 🙏 🌸 🌟

छंद २ (Stanza 2)
मूर्त सादगी की हैं स्वामी, अंतर में ज्ञान का दीप, 🕯�
विठ्ठल नाम का गूंजे नारा, मंजीरे और मृदंग समीप। 🎵
भक्ति का यह मधुर समंदर, लहराता इस धरती पर, 🌊
कोळबा माऊली की यह कृपा, बनी रहे हर एक घर पर। 🏡
🌸 🙌 💫 🎶 ✨

छंद ३ (Stanza 3)
धापेवाड़ा की यह नगरी, विदर्भ की पंढरी कहलाती, 🏰
विठ्ठल चरणों में झुककर, कोळबा की महिमा सुख देती। 👑
नाम अगर लें मुख से उनका, संताप जगत के मिट जाते, 🔥
धन्य हुआ यह जीवन अपना, जब स्वामी के दर्शन पाते। 👀
🌟 🙏 ✨ 🌸 🚩

छंद ४ (Stanza 4)
सीधा और सरल था जीवन, भक्ति का यह महामंत्र, 📜
भेदभाव सब भूल गए सब, बंधा प्रेम का मधुर सूत्र। 🤝
अमृत जैसी वाणी उनकी, कीर्तन की फैली खुशबू, 🌬�
हर भक्त के पावन दिल में, बसते कोळबास्वामी हूबहू। ❤️
🌻 ✨ 🙏 💞 🌟

छंद ५ (Stanza 5)
ताल बजे और मृदंग बाजे, गूंज रहा नभ में यह नाद, 🌌
भक्त नाचते मस्ती में, पाकर स्वामी का आशीर्वाद। 🏰
करुणासिंधु कोळबास्वामी, दीन-दुखियों के हैं रखवार, 🤝
नाव तुम्हारे नाम की स्वामी, पार लगाएगी संसार। 🚣
🌸 🙌 🎵 💫 ✨

छंद ६ (Stanza 6)
आज बने विठ्ठल का रूप, कोळबा संत महान हैं, 🦚
भक्ति के सुंदर आंगन में, नाच रहा मन का मोर है। 🦚
दूर हुए सब दुःख हमारे, सुख की आई नई तरंग, 🌊
स्वामी ने हमको दिखलाया, सच्चा पावन भक्ति रंग। 🛣�
🌟 🙏 ✨ 🌸 💞

छंद ७ (Stanza 7)
कोळबास्वामी की जयंती पर, शत-शत करते हम वंदन, 🙇
आपके आने से महक उठा, विदर्भ का यह सुंदर नंदन। 🌳
सदा हमारे साथ रहना, यही हमारी अंतिम आस, 🤲
चरणों में अर्पित करते हैं, हम अपनी हर एक सांस। 🌬�
🌻 ✨ 🙏 🌸 🌟

📝 कविता का सामूहिक संक्षिप्त अर्थ (Collective Hindi Meaning)
अर्थ: विदर्भ की पंढरी के रूप में विख्यात धापेवाड़ा की पवित्र भूमि पर संत कोळबास्वामी ने विठ्ठल भक्ति का दिव्य संदेश फैलाया। आज २१ जून २०२६ को उनकी जयंती पर समस्त जनमानस आनंदित है। उनका जीवन सादगी और प्रेम का प्रतीक था। उनके कीर्तन और नामस्मरण से सांसारिक कष्ट दूर होते हैं। वे दीन-दुखियों के रक्षक हैं। उनके द्वारा दिखाए गए सीधे-सरल भक्ति मार्ग पर चलकर हम उनके चरणों में वंदन करते हैं और उनकी कृपा की कामना करते हैं।

📊 हिंदी सारांश (Summaries)
🎨 केवल ईमोजी सारांश (Only Emoji Summary)
📅 🌸 👣 🙏 🎉 🕯� 🎵 🌊 🏡 🏰 👑 🔥 👀 📜 🤝 🌬� ❤️ 🌌 🚣 🦚 🛣� 🙇 🌳 🌾 ✨ 🌟 💫 🎶 🚩 💞 🙇�♂️ 🙌 🌻 💖 📥

🔤 केवल शब्दों का सारांश (Only Words Summary)
धापेवाड़ा धरती, संत कोळबास्वामी जयंती, विठ्ठल भक्ति, ताल-मृदंग गूंज, विदर्भ की पंढरी, सरल जीवन, प्रेमसूत्र, कीर्तन सुगंध, संकट निवारण, भक्ति का मार्ग, पावन धरा और चरण वंदन।

📌 पाद-टिप्पणी (Hindi Footnote)
पाद-टिप्पणी: संत कोळबास्वामी विदर्भ के एक महान विठ्ठल-भक्त संत थे। उनका समाधि स्थल धापेवाड़ा (नागपुर) में स्थित है, जहाँ हर वर्ष आषाढ़ी-कार्तिकी एकादशी और उनकी जयंती पर भव्य मेले का आयोजन होता है। 🌸 🙏 ✨

--अतुल परब
--दिनांक-21.06.2026-रविवार.
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