।। महाशक्तिपुत्र स्कंद : माघ षष्ठी महिमा ।।-🚩 🔥 🕉️ 🙏 🦚 🗡️ 🛡️ ✨ 🔱 👑 💪

Started by Atul Kaviraje, July 14, 2026, 10:32:49 PM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

माघ षष्ठी (स्कंद षष्ठी): भगवान कार्तिकेय (स्कंद) यांच्या पूजेसाठी हा दिवस शुभ मानला जातो. अनेक ठिकाणी कार्तिकेयाची विशेष पूजा केली जाते.
स्कंद षष्ठी: भगवान कार्तिकेय (स्कंद) यांच्या उपासनेसाठी हा दिवस अत्यंत शुभ मानला जातो. दक्षिण महाराष्ट्रातील काही भागांत सुब्रमण्यम स्वामींची विशेष पूजा केली जाते.

।। महाशक्तिपुत्र स्कंद : माघ षष्ठी महिमा ।।

१. माघ षष्ठी का दिन यह आया,
स्कंद देव का पर्व है छाया |
शिव-गौरी का लाड़ला लाल,
तेज जिसका है बड़ा विशाल ||
🚩🔥🕉�🙏

२. हाथ में लेकर तीक्ष्ण वो 'वेल',
असुरों का जो करता खेल |
मयूर वाहन पर होकर सवार,
भक्तों का जो करता उद्धार ||
🦚🗡�🛡�✨

३. कार्तिकेय की करें हम पूजा,
देवलोक का राजा दूजा |
शक्ति और युक्ति का दाता,
विजय का है भाग्य विधाता ||
🔱👑💪🌟

४. षडमुख जिसका रूप सलोना,
दूर भगाता दुःख का कोना |
भक्ति भाव से जो झुकाता शीश,
पाता सदा वो शुभ आशीष ||
🌸🙌🙇�♂️☀️

५. दक्षिण देश में सुब्रमण्यम नाम,
पावन करता सबका धाम |
विभूति लगा कर माथे सुंदर,
गायें महिमा उनके अंदर ||
🥥📿🎶🚩

६. अनुशासन और धैर्य का पाठ,
अन्याय पर जो करे प्रहार साठ |
देवसेनापति रक्षण करते,
सुख-समृद्धि घर में भरते ||
⚔️🛡�🏠💖

७. आज के दिन सुमरें हम देव,
अर्पण करें भक्ति का भेव |
षष्ठी की महिमा हम गायें,
स्कंद चरणों में शीश नवायें ||
🏵�🕯�🙏🕉�

कविता सारांश (Hindi Meaning):
माघ महीने की षष्ठी तिथि भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित है। वे शिव-पार्वती के पुत्र और देवताओं के सेनापति हैं। मोर उनका वाहन है और 'वेल' (भाला) उनका प्रमुख शस्त्र है। उनकी पूजा से साहस, विजय और शक्ति मिलती है। दक्षिण भारत में उन्हें सुब्रमण्यम के रूप में पूजा जाता है।

इमोजी सारांश (Emoji Summary):
🚩 🔥 🕉� 🙏 🦚 🗡� 🛡� ✨ 🔱 👑 💪 🌟 🌸 🙌 🙇�♂️ ☀️ 🥥 📿 🎶 ⚔️ 🏠 💖 🏵� 🕯�

शब्द सारांश (Word Summary):
माघ षष्ठी, स्कंद, कार्तिकेय, मयूर, सेनापति, शक्ति, विजय, सुब्रमण्यम, भक्ति, श्रद्धा।

🖼� चित्रसंकल्पना (Visual Concept for the Poem):
एक तेजस्वी चित्र ज्यामध्ये भगवान कार्तिकेय (स्कंद) त्यांच्या मयूर (मोर) वाहनावर आरूढ आहेत. त्यांच्या एका हातात सुवर्ण 'वेल' (भाला) आहे आणि त्यांच्या चेहऱ्यावर सात्विक तेज आहे. पार्श्वभूमीला दाक्षिणात्य पद्धतीचे मंदिर आणि षष्ठी पूजेसाठी सजवलेली फुले, नारळ आणि विभूती दिसत आहे. वरून आकाशातून देवांनी पुष्पवृष्टी केल्याचा भास होत आहे.

--अतुल परब
--दिनांक-२३ फेब्रुवारी २०२६, सोमवार
===========================================