शांति का बल और क्रोध का अंत-📜 ☸️ 🍷 ❌ 😊🕯️ 🧼 🤝 🌍 🌈🏆 🧠 🛑 ⚓ ✨

Started by Atul Kaviraje, July 15, 2026, 10:12:51 PM

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Atul Kaviraje

गुस्सा शांत करना
अच्छी सोच: "गुस्से को शांति से, बुराई को अच्छाई से, कंजूसी को दान से और झूठ को सच्चाई से जीतना चाहिए।"
-गौतम बुद्ध (प्राचीन भारत) – बौद्ध धर्म के संस्थापक
अवसर/घटना: जब उत्तरा नाम की एक महिला उपासक ने गुस्से के बजाय प्यार और शांति से एक महिला (सिरिमा) को जीत लिया, जो उससे नाराज़ थी, तो बुद्ध ने उसकी तारीफ़ करते हुए यह उपदेश दिया।
जगह: राजगीर (राजगृह)।
टेक्स्ट का रेफरेंस: धम्मपद, गाथा 223.
समय/तारीख: 5वीं सदी BCE.

हिंदी अनुवाद: क्रोध को शांत करना (धम्मपद - कोधवग्गो)

हिंदी प्रस्तावना (Hindi Prastavana)
सुविचार: "क्रोध को अक्रोध (शांति) से जीतना चाहिए, दुष्ट को अच्छाई से जीतना चाहिए, कंजूस को दान से जीतना चाहिए और असत्य को सत्य से जीतना चाहिए।" — गौतम बुद्ध ☸️

प्रसंग, ग्रंथ और ऐतिहासिक संदर्भ: ईसा पूर्व ५वीं सदी में, राजगृह (राजगीर) नगरी में 'उत्तरा' नाम की एक परम उपासिका पर 'सिरिमा' नाम की स्त्री अत्यंत क्रोधित हो गई और उसने उस पर खौलता हुआ तेल फेंकने का प्रयास किया। परंतु, उत्तरा ने मन में लेशमात्र भी क्रोध न लाकर सिरिमा को प्रेम और शांत चित्त से वश में कर लिया। बुद्ध ने जब यह सुना, तो उत्तरा की सराहना करते हुए 'धम्मपद' (गाथा २२३) का यह कालजयी उपदेश दिया। 🌸📜🕉�👑⏳

हिंदी कविता: शांति का बल और क्रोध का अंत

पद १
क्रोध की जलती आग को तुम शांति से ही बुझाओ,
नफरत से भरे हुए दिल में प्रेम की गंगा बहाओ।
क्रोध का उत्तर कभी तुम क्रोध से मत देना मेरे यार,
शांति के इस शस्त्र से ही होगा वैर का संहार।

अर्थ (Meaning): क्रोध की अग्नि को केवल शांति और प्रेम से ही बुझाया जा सकता है। क्रोध के बदले क्रोध करने से विनाश ही होता है।

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पद २
उत्तरा थी वो उपासिका, जिसका मन था बहुत विशाल,
सिरिमा के उस भारी क्रोध ने बिछाया था मायाजाल।
खौलता तेल गिराने को वो बढ़ी जब आगे की ओर,
उत्तरा का पावन मन था शांत-सौम्य, न था कोई शोर।

अर्थ (Meaning): उत्तरा का मन विशाल और शांत था। जब सिरिमा क्रोध में आकर उस पर खौलता तेल फेंकने बढ़ी, तब भी उत्तरा विचलित नहीं हुई।

👩�🦰 🤬 🛢� 🔥 🧘�♀️

पद ३
मन में उसके ईर्ष्या का कोई भी दाग न था,
बह रहा था नेह का झरना, कोई बैर भाव न था।
सिरिमा को उसने दिया अपनी करुणा का वरदान,
दुष्ट हृदय भी पिघल गया, पाकर पश्चात्ताप का ज्ञान।

अर्थ (Meaning): उत्तरा के निर्मल मन में कोई वैर नहीं था। उसकी इस करुणा और क्षमाशीलता को देखकर सिरिमा का कठोर हृदय पिघल गया।

🧼 ❤️ 🌊 🤝 💧

पद ४
बुद्ध बोले, "क्रोध को तुम सदा शांति से जीतो,
दुष्टता को अपनी सच्ची भलाई से तुम जीतो।
कंजूस के संकीर्ण मन को दान से बड़ा बनाओ,
झूठ के उस गहरे तमस को सत्य से मिटाओ।"

अर्थ (Meaning): बुद्ध ने सिखाया कि क्रोध को शांति से, दुष्टता को भलाई से, कंजूस को दान से और असत्य को सत्य से जीतना चाहिए।

🗣� 🎁 ☀️ ⚖️ 📜

पद ५
क्रोध पर काबू पाना ही जीवन की असली जीत,
गुस्से में बह जाने वाले गाते पतझड़ की गीत।
शांत मन ही होता है सच्चे सुख का आधार,
जिसने इसे अपनाया, उसने पा लिया भवसागर पार।

अर्थ (Meaning): क्रोध को वश में करना ही सबसे बड़ी विजय है। शांत चित्त ही मनुष्य को परम आनंद की ओर ले जाता है।

🏆 🧠 🛑 ⚓ ✨

पद ६
दान से ही जीता जाता लोभी मनुष्य का संसार,
भलाई के स्पर्श से सुधरता दुष्टों का व्यवहार।
सत्य का एक छोटा दीपक मिटाता झूठ का अंधकार,
शांति के ही मार्ग से होता मानव का उद्धार।

अर्थ (Meaning): दान लोभी को और अच्छाई दुष्ट को बदल देती है। सत्य का प्रकाश असत्य के अंधकार को नष्ट कर मनुष्य का उद्धार करता है।

🕯� 🧼 🤝 🌍 🌈

पद ७
धम्मपद की इस पावन सीख को जीवन में तुम उतारो,
क्रोध के उस हलाहल विष को तुम मन से बुहारो।
सत्य और सदाचार की राह पर जो चलता वीर,
उसका जीवन जग में बनता सबसे शांत और गंभीर।

अर्थ (Meaning): धम्मपद के इस उपदेश को अपनाकर क्रोध रूपी विष का त्याग करें। सदाचारी व्यक्ति ही जीवन में सच्ची शांति प्राप्त करता है।

📜 ☸️ 🍷 ❌ 😊

हिंदी पाद-टिप्पणी (Hindi Foot-note)
टिप्पणी: 📝 यह प्रसंग हमें यह अमूल्य सीख देता है कि बुराई का मुकाबला बुराई से करने पर संसार में केवल अशांति बढ़ती है। क्षमा, प्रेम और शांत चित्त वह अमोघ अस्त्र हैं जो बड़े से बड़े शत्रु के क्रोध को भी सदा के लिए शांत कर सकते हैं। ☸️🙏🌸

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-15.07.2026-बुधवार.
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