।। जेजुरी का राणा : मल्हारी मार्तंड ।।-🚩 🔱 ⛰️ 🙏 🐎 💛 🛡️ ✨ ⚔️ 👑 🌟 🙌 🥥 🔥

Started by Atul Kaviraje, July 16, 2026, 11:43:24 AM

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Atul Kaviraje

जेजुरी गड: श्री खंडोबाच्या भक्तांसाठी माघ महिन्यातील ही षष्ठी 'चंपाषष्ठी' नंतरची एक महत्त्वाची तिथी मानली जाते.

।। जेजुरी का राणा : मल्हारी मार्तंड ।।

१. माघ मास का सोमवार आया,
जेजुरी गढ़ पर गुलाल है छाया |
येळकोट येळकोट का नाद गूँजा,
भक्त चला करने प्रभु की पूजा ||
🚩🔱⛰️🙏

२. माथे पर भंडार सोने सा गोला,
मल्हार देव का अद्भुत ये सोला |
श्वेत अश्व पर सवार खंडोबा,
भक्तों का रक्षक मेरा मल्हारबा ||
🐎💛🛡�✨

३. म्हाळसा-बाणाई संग में सोहती,
भक्तों की पुकार पर सदा दौड़ती |
खड्ग और त्रिशूल हाथ में साजे,
असुरों के दल पर डंका बाजे ||
⚔️🔱👑🌟

४. चंपाषष्ठी के बाद का समय महान,
भक्ति की धारा में करें सब स्नान |
मणी-मल्ल का अंत जिसने किया,
उस देवाधिदेव का आशीष लिया ||
💛✨🚩🙌

५. कडेपठार पर तेरा वास खंडेराया,
भक्तों पर सदा बनी रहे छाया |
घृत-नैवेद्य और आरती है पावन,
भक्तिमय हुआ आज मेरा मन ||
🥥🔥🕯�🙏

६. पर्वत और घाटियों में गूँजे डंका,
रही न मन में कोई भी शंका |
कलियुग में तू ही तारणहार है,
दुष्टों का काल, शिष्टों का आधार है ||
🥁🚩🏠💖

७. माघ षष्ठी पर चरणों में वंदन,
मिटा दो प्रभु सारे दुःख और क्रंदन |
सदानंद का येळकोट मुख से गायें,
मल्हारी की भक्ति में हम रम जायें ||
🙇�♂️🏵�✨🕉�

कविता सारांश (Hindi Meaning):
माघ महीने की यह षष्ठी जेजुरी गढ़ पर खंडोबा की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। पीले भंडार (हल्दी) की उधळण, सफेद घोड़ा और 'येळकोट येळकोट' का उद्घोष खंडोबा की भक्ति का प्रतीक है। मणी और मल्ल जैसे असुरों का वध करने वाले मल्हारी मार्तंड की पूजा से जीवन के संकट दूर होते हैं और भक्तों को सुरक्षा मिलती है।

इमोजी सारांश (Emoji Summary):
🚩 🔱 ⛰️ 🙏 🐎 💛 🛡� ✨ ⚔️ 👑 🌟 🙌 🥥 🔥 🕯� 🥁 🏠 💖 🙇�♂️ 🏵� 🕉�

शब्द सारांश (Word Summary):
मल्हारी, जेजुरी, भंडार, येळकोट, खंडोबा, माघ, षष्ठी, म्हाळसा, कडेपठार, भक्ति।

🖼� चित्रसंकल्पना (Visual Concept):
जेजुरी गडावरील पायऱ्यांचे दृश्य, जिथे आकाशात पिवळ्या धमक भंडाऱ्याची उधळण झाली आहे. केंद्रस्थानी खंडोबा देव त्यांच्या पांढऱ्या घोड्यावर (मल्हारी मार्तंड रूपात) स्वार असून त्यांच्या एका हातात लांब खड्ग (तलवार) आहे. सोबत म्हाळसा देवी आहेत. आजूबाजूला भक्तांनी कपाळाला भंडार लावला असून हातात भगवे ध्वज (निशाण) घेतले आहेत. वातावरणात सोन्यासारखा पिवळा प्रकाश आणि भक्तीचा उत्साह दिसत आहे.

--अतुल परब
--दिनांक-२३ फेब्रुवारी २०२६, सोमवार.
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