अष्टान्हिका भक्ति महिमा 🌺✨ 🙏 🕍 🕯️ 🐚 📿 🕉️ 🚩 🏠 💎 🏯 🙌 🤴 🕊️ 🌸 🥥 🍚

Started by Atul Kaviraje, July 17, 2026, 11:10:09 AM

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Atul Kaviraje

ASHTAANHIK PARV PRAARAMBHA-JAIN-

शीर्षक: अष्टान्हिका भक्ति महिमा 🌺

पद १
पावन पर्व यह अष्टान्हिका,
भक्ति की खिली यह मालिका।
नंदीश्वर द्वीप की है प्यास,
मन में जगा मोक्ष-विश्वास।
पद: अष्टान्हिका, मालिका, प्यास, विश्वास।
अर्थ: अष्टान्हिका का पवित्र पर्व शुरू हुआ है और भक्ति की माला खिली है। नंदीश्वर द्वीप के दर्शन की प्यास जगी है और मोक्ष का विश्वास मन में दृढ़ हुआ है।
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पद २
आठों दिन मंत्रों की गूँज,
जिनवर चरणों में मन की पुंज।
त्याग की यह बड़ी कमाई,
पुण्य की गंगा घर-घर आई।
पद: गूँज, जिनवर, कमाई, गंगा।
अर्थ: आठों दिन मंत्रों का स्वर गूँज रहा है और मन भगवान के चरणों में है। इन दिनों का त्याग ही असली कमाई है, जिससे हर घर में पुण्य का आगमन हुआ है।
📿🕉�🚩🏠💎

पद ३
बावन जिनालय नंदीश्वर में,
अकृत्रिम वैभव है कण-कण में।
देव-देवेंद्र करें वंदना,
शुद्ध रहे अपनी भावना।
पद: जिनालय, वैभव, वंदना, भावना।
अर्थ: नंदीश्वर द्वीप के ५२ जिनालयों के कण-कण में अकृत्रिम वैभव है। जहाँ देव और इंद्र वंदना करते हैं, वहाँ हमारी भावना भी सदा शुद्ध रहे।
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पद ४
अष्ट द्रव्य लेकर निज हाथ,
पूजा रचाई भक्ति के साथ।
सिद्धचक्र का महिमा भारी,
मिटे कर्म की बाधा सारी।
पद: अष्ट द्रव्य, निज, महिमा, बाधा।
अर्थ: अपने हाथों में आठ द्रव्य लेकर श्रद्धा से पूजा की है। सिद्धचक्र का महिमा इतना बड़ा है कि इससे सभी कर्मों की बाधाएँ दूर हो जाती हैं।
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पद ५
संयम धारें शुद्ध आचरण,
जिनवाणी का करें श्रवण।
मोह का यह पर्दा हटाएँ,
आत्मज्ञान की ज्योत जलाएँ।
पद: संयम, आचरण, श्रवण, ज्योत।
अर्थ: हम संयम और शुद्ध आचरण अपनाकर जिनवाणी का उपदेश सुनें। मोह-माया का पर्दा हटाकर अपने भीतर आत्मज्ञान का दीपक जलाएँ।
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पद ६
अहिंसा धर्म सबसे महान,
हर जीव में देखें भगवान।
क्षमा भाव मन में समाए,
भक्ति का यह रंग चढ़ जाए।
पद: महान, जीव, समाए, रंग।
अर्थ: अहिंसा धर्म सबसे श्रेष्ठ है, हमें हर जीव में ईश्वर के दर्शन करने चाहिए। मन में सदा क्षमा का भाव रहे और भक्ति का रंग और गहरा हो।
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पद ७
मंगल पर्व का यह प्रारंभ,
छोड़ें जीवन का सब दंभ।
सिद्ध लोक की होवे प्राप्ति,
मिले आत्मा को सच्ची शांति।
पद: प्रारंभ, दंभ, प्राप्ति, शांति।
अर्थ: इस मंगल पर्व का आरंभ हुआ है, हमें दिखावा छोड़ देना चाहिए। हमें सिद्ध गति प्राप्त हो और हमारी आत्मा को सच्ची शांति मिले।
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सारांश (Summary)
शब्द सारांश: अष्टान्हिका पर्व, नंदीश्वर द्वीप भक्ति, अष्ट द्रव्य पूजा, संयम, आत्मज्ञान और मोक्ष की मंगल भावना।

इमोजी सारांश: ✨ 🙏 🕍 🕯� 🐚 📿 🕉� 🚩 🏠 💎 🏯 🙌 🤴 🕊� 🌸 🥥 🍚 💧 🪵 🔥 📖 👂 🚫 🎭 🤝 🌍 ❤️ 🧘�♂️ 🎨 🏁 🙅�♂️ 🌌 🧘�♀️

भक्तीमय चित्रसंकल्पना (Visual Concept)
मध्यभागी: नंदीश्वर द्वीपाची ५२ जिनालये दर्शवणारी एक गोलाकार रचना, ज्यातून सोनेरी प्रकाश बाहेर पडत आहे.

वरच्या बाजूला: सिद्धचक्र यंत्राची तेजस्वी प्रतिमा.

खालील बाजूला: श्रावक-श्राविका अष्टद्रव्याचे ताट घेऊन शांतपणे बसलेले आहेत.

वातावरण: मंदिरात लावलेल्या उदबत्त्यांचा धूर आणि सभोवताली पांढऱ्या कमळांची सजावट.

--अतुल परब
--दिनांक-२४ फेब्रुवारी २०२६-मंगळवार.
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