🌸॥ युगप्रवर्तक संत शांतिसागर ॥🌸🕊️ 🙏 ✨ 🌾 📿 🚶‍♂️ 💫 🕉️ ❤️ 🌟 🏳️‍🌈 🔮 🕯️

Started by Atul Kaviraje, July 19, 2026, 12:17:16 PM

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Atul Kaviraje

06.07.2026-MONDAY-
SHRI SHANTISAAGARAJI MAHAARAAJ JAYANTI-YALGUD, TALUKA-HAATKANANGALE, JILHAA-PUNE-

📖 प्रस्तावना (हिंदी)
आज सोमवार, दिनांक ०६ जुलाई २०२६ को, हातकणंगले तालुका के यलगुड (जिला: कोल्हापुर/पुणे संदर्भ) में परमपूज्य श्री शांतिसागरजी महाराज की जयंती अत्यंत भक्तिभाव के साथ मनाई जा रही है। जैन धर्म के महान संत, आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज की पावन स्मृति और उनके त्यागमय, शांत जीवन को वंदन करती हुई यह एक रसमय, सरल और यमकयुक्त ७ छंदों (४ पंक्तियों के) की दीर्घ हिंदी कविता प्रस्तुत है। 🙏✨🌸

🌸॥ युगप्रवर्तक संत शांतिसागर ॥🌸

पद १
यलगुड की इस पावन भू पर जन्म लिया संत महान,
शांति का संदेश दिया, जग का किया सदा कल्याण।
शांतिसागर महाराज गुरु की जयंती है आज आई,
भक्तिभाव से हम सबने सुंदर मंगल ज्योत जलाई।
🕊�🙏✨🌾📿

पद २
त्याग और वैराग्य की मूरत, संयम के वो महासागर,
दुखी जीवों को मार्ग दिखाते, सुख भरते वो गागर।
हातकणंगले तालुका धन्य हुआ उनके चरणों से,
अमृत की धार बही नित दिन उनके पावन वचनों से।
🚶�♂️💫🕉�❤️🌟

पद ३
सत्य का मार्ग दिखाकर उन्होंने दूर किया सब अंधियारा,
दया, क्षमा और शांति का बहता जग में अनुपम धारा।
मूरत भोली, शांत चित्त, मुख पर अनुपम आभा राजे,
जैन धर्म की विजय पताका अंबर में सुंदर साजे।

🏳��🌈🔮 आत्मज्ञान की राह पर चलते, त्यागे सब संसार,
उनकी ही कृपा से महका आज भक्तों का यह दरबार।
आचार्यश्री के पावन चरणों में झुकता हमारा शीश,
देकर जाएँ हम सब भक्तों को वो पावन आशीष।
🙌🌻👑🔥🔱

पद ५
लोभ, मोह और माया त्यागी, क्षण में तोड़े सब बंधन,
केवल भक्ति का गूंज रहा है आज हवाओं में स्पंदन।
यलगुड गाँव का नाम हुआ है पूरी दुनिया में महान,
संत के चरणों में अर्पित है हमारा तन, मन, प्राण।
🏡💖🎵🔔🕯�

पद ६
सीधे साधे शब्दों में वो कह गए जीवन का सार,
परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है, यही है सच्चा आधार।
आज के इस पावन दिन पर गाएँ उनकी पावन गाथा,
चरणों में रख शीश कहें हम, जय जिनेंद्र नवा माथा।
📜🤝🌈☀️🌸

पद ७
शांतिसागर नाम हृदय में, सुख मिलता है अपरम्पार,
भवसागर से पार कराता संतों का पावन विचार।
जयंती का उत्सव यह सुंदर, आनंद का झरना बहे,
हर एक भक्त के दिल में गुरुवर की ही मूरत रहे।
🎉🥳🕺🎈🎊

📝 कविता का संक्षिप्त सामूहिक अर्थ (Meaning)
इस कविता में आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज की यलगुड स्थित जन्मभूमि और उनकी पावन जयंती का गौरवगान किया गया है। उन्होंने त्याग, वैराग्य, सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाकर संसार के कष्टों को दूर किया। अत्यंत सरल शब्दों में उनके शांत स्वरूप और उपदेशों का वर्णन किया गया है। उनके चरणों में शीश नवाकर भक्तों को किस प्रकार सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है, यही इन ७ पदों का मूल अर्थ है।

🖼� केवल शब्दों का सारांश (Word Summary)
मुख्य शब्द: यलगुड, हातकणंगले, शांतिसागरजी महाराज, जयंती, त्याग, वैराग्य, भक्तिभाव, शांति, जय जिनेंद्र, परोपकार, भक्तों का शीश, सुख-समृद्धि।

🧩 केवल चिह्नों और इमोजी का सारांश (Emoji Summary)
🕊� 🙏 ✨ 🌾 📿 🚶�♂️ 💫 🕉� ❤️ 🌟 🏳��🌈 🔮 🕯� 🎯 🌟 🙌 🌻 👑 🔥 🔱 🏡 💖 🎵 🔔 🕯� 📜 🤝 🌈 ☀️ 🌸 🎉 🥳 🕺 🎈 🎊

ℹ️ पाद-टिप्पणी (Foot-note): हातकणंगले तालुका का यलगुड गाँव आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के कारण एक पवित्र तीर्थस्थल बना है। २०२६ के इस पावन सोमवार को उनकी जयंती पर यह काव्यांजलि सादर समर्पित है। 🌸🙏🌾

--अतुल परब
--दिनांक-06.07.2026-सोमवार.
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