🙏✨🌸📿🙌 🌺 समर्थ संजीवास्वामी चरणों में भक्तिसुमन 🌺🎉🎈🌊🙌🔔

Started by Atul Kaviraje, July 21, 2026, 01:43:31 PM

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Atul Kaviraje

10.07.2026-FRIDAY-
SAMARTH SANJIVAASWAAMI PUNYATITHI-NAAZARE,  TALUKA-SAANGOLAA-

📝 प्रस्तावना (हिंदी)
१० जुलाई २०२६, शुक्रवार को सांगोला तहसील के नाझरे इस पवित्र भूमि में समर्थ संजीवास्वामी महाराज की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। यह उत्सव अत्यंत भक्तिभाव और पवित्र माहौल में संपन्न हो रहा है। स्वामी के चरणों में समर्पित, उनकी अगाध भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति की महिमा गाने वाली एक सरल, रसमय और तुकबंदी युक्त ७ छंदों (कडवे) की हिंदी कविता यहाँ प्रस्तुत है। 🙏✨🌸📿🙌

🌺 समर्थ संजीवास्वामी चरणों में भक्तिसुमन 🌺

छंद १
नाझरे गांव की पावन यह भूमी,
भक्ति के रंग में रंगे हैं हम भी।
संजीवास्वामी का नाम सुमरते,
पुण्यतिथि दिन चरणों में झुकते।

अर्थ: सांगोला तहसील के नाझरे गांव की भूमि अत्यंत पवित्र है, जहाँ हम सब भक्ति के रंग में सराबोर हैं। आज समर्थ संजीवास्वामी महाराज की पुण्यतिथि पर हम उनके नाम का सिमरन कर उनके चरणों में शीश नवाते हैं।
🌸🙏📿✨🙌

छंद २
भक्ति और शक्ति का बहाया झरना,
स्वामी ने सिखाया सच की राह चलना।
भक्तों के मन में जगाई जोत,
दूर हुआ भ्रम, मिला सुख-श्रोत।

अर्थ: स्वामी ने अपने जीवन से भक्ति और कर्म का अखंड झरना बहाया और सबको सत्य का मार्ग दिखाया। उन्होंने भक्तों के दिलों में ज्ञान का दीपक जलाकर उनके मन के सारे भ्रम और अंधकार को मिटा दिया।
📖💡❤️🌟😇

छंद ३
सरल और साधी उनकी वाणी,
अमृत से मीठी लगी यह कहानी।
नाझरे नगरी में गूंजे यह गान,
कृपा आपकी रहे मेहरबान।

अर्थ: स्वामी की वाणी बहुत ही सरल, सहज और अमृत से भी मधुर थी। आज पूरी नाझरे नगरी में उनका जयकार गूंज रहा है, और प्रार्थना है कि उनकी कृपा हम सभी भक्तों पर हमेशा बनी रहे।
🎤🎶🏰🌾🤲

छंद ४
छोड़कर सारा जग यह असार,
ईश्वर भक्ति को किया स्वीकार।
संजीवास्वामी संत वो ज्ञानी,
कीर्ति जिनकी गाए त्रिलोकी सारी।

अर्थ: संसार की नश्वर चीजों को त्याग कर उन्होंने भगवान की महान भक्ति का मार्ग चुना। समर्थ संजीवास्वामी ऐसे परम ज्ञानी और सामर्थ्यशाली संत थे, जिनकी कीर्ति तीनों लोकों में फैली हुई है।
🌍🧘�♂️🚩🥁📜

छंद ५
चरणों पे रखकर हम अपना माथा,
गा रहे आपकी पावन गाथा।
हृदय में रहे बस आपका वास,
यही हमारी अंतिम आस।

अर्थ: हम सभी भक्त स्वामी के चरणों में अपना सिर रखकर उनकी पवित्र महिमा गा रहे हैं। हमारे हृदय में सदा स्वामी का ही निवास रहे, यही हमारी अंतिम इच्छा और आस है।
🙇�♂️💖🤙🏡🌈

छंद ६
दुख और दैन्य सब दूर भाग गए,
स्वामी जब से मन में समा गए।
चरण आपके हर घर में आए,
भक्तों के जीवन धन्य हो जाए।

अर्थ: जब से स्वामी हमारी यादों और मन में बसे हैं, तब से सारे दुःख और दरिद्रता समाप्त हो गए हैं। उनके चरण मानो हर घर में पड़ गए हैं और सभी भक्तों का जीवन धन्य हो गया है।
😊🏡🌻💰🎉

छंद ७
पुण्यतिथि का यह उत्सव महान,
भक्ति में भूले हम देहभान।
संजीवास्वामी नाम मुख में रहे,
भक्ति का सागर यूँ ही बहे।

अर्थ: आज पुण्यतिथि का यह पावन अवसर इतना महान है कि हम भक्ति में अपनी सुध-बुध भूल गए हैं। हमारे मुख पर सदा 'संजीवास्वामी' नाम रहे और दिल में भक्ति का सागर हिलोरे लेता रहे।
🎉🎈🌊🙌🔔

📊 हिंदी सारांश (Summary)
शब्दों का सारांश (Word Summary): यह कविता समर्थ संजीवास्वामी महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर नाझरे (सांगोला) के भक्तिमय वातावरण को दर्शाती है। स्वामी की सरल वाणी, परमार्थ भक्ति, भक्तों पर उनकी कृपा और उनके नाम स्मरण की महिमा को सुंदर तुकबंदी के साथ प्रस्तुत किया गया है।

इमोजी सारांश (Emoji Summary): 🙏 (भक्ति) 🌸 (समर्पण) 📖 (ज्ञान) 🚩 (संत परंपरा) 🏰 (नाझरे नगरी) 😊 (प्रसन्नता)

📝 पाद-टिप्पणी (Footnote):

यह काव्य रचना १० जुलाई २०२६ को सोलापुर जिले के सांगोला तहसील के नाझरे में आयोजित समर्थ संजीवास्वामी महाराज पुण्यतिथि उत्सव के पावन अवसर पर भक्तों की आत्मिक प्रेरणा हेतु रची गई है। 📜📌🌸

--अतुल परब
--दिनांक-10.07.2026-शुक्रवार.
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