।। रेंदाळ का राजा : श्री बिरदेव माऊली ।।-🚩 ✨ 🛐 🙏 🟡 🥁 ☁️ 🕺 🎺 🎼 🏹 🌅 🎊

Started by Atul Kaviraje, July 22, 2026, 01:55:39 PM

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Atul Kaviraje

SHRI BIRDEV YAATRAA-RENDAAL, TALUKA-HAATKANANGALE-

कोल्हापूर जिल्ह्यातील हातकणंगले तालुक्यातील रेंदाळ येथील श्री बिरदेव यात्रेनिमित्त भक्तीपूर्ण दीर्घ मराठी कविता आणि तिचे हिंदी भाषांतर सादर आहे.

।। रेंदाळ का राजा : श्री बिरदेव माऊली ।।

१. हातकणंगले तालुक में रेंदाळ गाँव का नाम,
बिरदेव के चरणों में जगे भक्तों के भाव तमाम।
आज यात्रा का यह उत्सव, खुशियों की है खान,
बिरदेव के दर्शन से बढ़ता हमारा मान।
🚩 ✨ 🛐 🙏

२. पीले पावन भण्डारे की उड़ रही है धूल,
'चांगभलं' के जयघोष से खिले भक्ति के फूल।
हाथ में लाठी लेकर और कंधे पर कमली,
भक्त नाचते भक्ति में बिरदेव की यह टोली।
🟡 🥁 ☁️ 🕺

३. शिंगे बजते तुतारी गूँजे, ढोल ताशों का नाद,
बिरदेव माऊली देती भक्तों की पुकार पर साद।
धनगर समाज का देव, सारे जग का है वाली,
तेरे दर्शन से मैया, जीवन में आई खुशहाली।
🎺 🎼 🏹 🌅

४. पालकी निकली बिरदेव की, फूलों से है सजी,
भक्तों की यह भीड़ आज, रेंदाळ में है जगी।
श्रद्धा का यह पर्वत और भक्ति की यह बाढ़,
तेरी कृपा से संकट होंगे, हमसे कोसों पार।
🎊 🛖 🤝 🌊

५. माथे पर लगाया भण्डारा, भूले अपना भान,
तेरे चरणों में अर्पण है, हमारा जीवन-गान।
हल्दी के इस रंग में नहाई, सारी रेंदाळ की पेठ,
भक्त और भगवान की, आज हुई है भेंट।
🌼 🧡 🕯� 🛐

६. नैवेद्य पावन अर्पण किया, तुमको है मन से,
दुःख हमारे दूर हों, तुम्हारे सुमिरन से।
गाँव-गाँव से लोग आए, लेने तेरा दर्शन,
बिरदेव की भक्ति में, सबका मन हुआ प्रसन्न।
🍯 🥥 💖 🏡

७. अगले बरस भी फिर आए, ऐसा ही भक्ति का मेला,
भक्तों की इन आँखों में रहे, तेरा ही प्रेम अकेला।
आशीर्वाद दो बिरदेवा, सुखी रहे हमारा संसार,
तेरे ही नाम का गूँजेगा, नित्य यह जयजयकार।
🙌 🌟 🌍 🚩

शब्द सारांश (Hindi Word Summary):
रेंदाळ, बिरदेव, यात्रा, भण्डारा, चांगभलं, पालकी, भक्ति, श्रद्धा, आशीर्वाद, जयघोष।

इमोजी सारांश (Emoji Summary):
🚩 ✨ 🛐 🙏 🟡 🥁 ☁️ 🕺 🎺 🎼 🏹 🌅 🎊 🛖 🤝 🌊 🌼 🧡 🕯� 🛐 🍯 🥥 💖 🏡 🙌 🌟 🌍 🚩

🖼� चित्रसंकल्पना (Visual Concept):
चित्राच्या मध्यभागी श्री बिरदेवाची भव्य मूर्ती किंवा चांदीचा मुखवटा असावा. चित्रात सगळीकडे पिवळ्या हळदीची (भंडाऱ्याची) उधळण दिसत असावी. भक्तांनी पांढरा सदरा, धोतर आणि खांद्यावर काळी घोंगडी घेतलेली असावी. पार्श्वभूमीला रेंदाळचे मंदिर आणि उंच डोलणारी पालखी असावी. आकाशात केसरी ध्वज आणि हवेत उडणारा पिवळा भंडारा एक मंगलमय दृश्य तयार करेल.

--अतुल परब
--दिनांक-२७.०२.२०२६-शुक्रवार.
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