।। मराठी है हमारी मातृभाषा : गौरव उत्सव ।।-🚩 📜 🗣️ 📖 🖋️ 📿 ✨ ❤️ ⚔️ 🏹 🏔️ 🚩

Started by Atul Kaviraje, July 22, 2026, 02:07:18 PM

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Atul Kaviraje

MARAATHI BHAASHAA GAURAV DIN-

२७ फेब्रुवारी २०२६ रोजी साजऱ्या होणाऱ्या 'मराठी भाषा गौरव दिन' (कुसुमाग्रज जयंती) निमित्त रसाळ आणि अर्थपूर्ण दीर्घ मराठी कविता आणि तिचे हिंदी भाषांतर सादर आहे.

।। मराठी है हमारी मातृभाषा : गौरव उत्सव ।।

१. सह्याद्री की कंदराओं में, गूँजे मराठी आवाज़,
मराठी भाषा को पहनकर, सजा रहे हम अपना साज।
कुसुमाग्रज के जन्मदिवस पर, यह भाषा का गौरव दिन,
शब्दों के इस अमृत में, हो जाएँ हम सब ही लीन।
🚩 📜 🗣� 📖

२. ज्ञानेश्वर की ओवियों में, तुकडोजी के अभंगों में,
मराठी की मिठास निराली, बहती हमारे अंगों में।
'अमृत को भी जीत ले', ऐसी हमारी यह शब्द संपदा,
मराठी की इस अमीरी से, मन महके हमारा सर्वदा।
🖋� 📿 ✨ ❤️

३. शिवराय की तलवार की, धार हमारी भाषा में है,
क्रांति और भक्ति की धारा, हमारे शब्दों की आशा में है।
सह्याद्री का पानी हमारा, और मराठी हमारा बाणा,
मराठी के स्वाभिमान से, सीधा है हमारा कणा।
⚔️ 🏹 🏔� 🚩

४. माँ-मराठी की यह तड़प, मन-मन में आज बसी है,
ज्ञान की यह गंगा पावन, आँगन-आँगन में सजी है।
साहित्य के इस उपवन में, खिले फूल ये बड़े रसीले,
मराठी के संवर्धन का, संकल्प लें हम बड़े सुशीले।
🌸 🏡 📚 🤝

५. सात समंदर पार भी भाषा, फैलाती अपनी कीर्ति,
हर मराठी मानुष की, मन में बसी है यह मूर्ति।
कवियों की कल्पनाओं में, मराठी सजी है सुंदर,
गर्व से कहते हैं हम, मराठी हमारा यह अंतर।
🌍 🏆 🎨 🧡

६. 'भाग्य से हमें मिली है', जय जय महाराष्ट्र गाएँ,
मराठी के इस ताल पर, खुशियों के गीत सुनाएँ।
विट्ठल की वारी जैसी, मराठी की यह बड़ी वारी,
सहेज कर रखेंगे हम, यह अमूल्य धरोहर प्यारी।
🎶 🚩 🙌 💎

७. गौरव हमारी भाषा का, सदा गगन में लहराए,
मराठी की अस्मिता का, दीप सदा ही जलता जाए।
कुसुमाग्रज की यादों को, करें हम आज शत-शत नमन,
मराठी के इस उत्कर्ष में, लगा रहे हमारा यह मन।
🕯� ☁️ 🙏 🌟

शब्द सारांश (Hindi Word Summary):
मराठी, गौरव, कुसुमाग्रज, सह्याद्री, ज्ञानेश्वरी, शिवराय, स्वाभिमान, साहित्य, अमृत, कीर्ति।

इमोजी सारांश (Emoji Summary):
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🖼� चित्रसंकल्पना (Visual Concept):
चित्राच्या मध्यभागी मराठी भाषेची 'अ' ही मुळाक्षराची मोठी आकृती असावी, ज्यातून ज्ञानाचा प्रकाश बाहेर पडत आहे. एका बाजूला कुसुमाग्रजांची चष्मा लावलेली प्रसिद्ध प्रतिमा आणि दुसऱ्या बाजूला ज्ञानेश्वरीची पोथी व शिवरायांची भवानी तलवार असावी. पार्श्वभूमीला गड-किल्ले आणि सह्याद्रीच्या डोंगररांगा दाखवाव्यात. संपूर्ण चित्र केशरी (भगव्या) आणि पांढऱ्या रंगाच्या छटांमध्ये असावे, जे मराठी अस्मितेचे दर्शन घडवेल.

--अतुल परब
--दिनांक-२७.०२.२०२६-शुक्रवार.
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