।। गोविंद द्वादशी : विष्णु भक्ति का प्रकाश ।।-🌸 ✨ 🛐 🙏 🐚 🔱 🕉️ 🕯️ 📿 🌿 🍯

Started by Atul Kaviraje, July 22, 2026, 02:10:31 PM

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Atul Kaviraje

GOVIND DVAADASHI-

२८ फेब्रुवारी २०२६, शनिवार रोजी येणाऱ्या 'गोविंद द्वादशी' निमित्त भगवान विष्णूंच्या चरणी अर्पण केलेली भक्तीमय दीर्घ मराठी कविता आणि तिचे हिंदी भाषांतर सादर आहे.

।। गोविंद द्वादशी : विष्णु भक्ति का प्रकाश ।।

१. फाल्गुन मास द्वादशी आई, गोविंद की भक्ति की,
रोशन हुई दसों दिशाएँ, ज्योति से उस मुक्ति की।
शनिवार का योग है यह, पुण्य का यह पर्व महान,
श्रीहरि के चरणों में सौंपे, हम अपना यह जीवन-गान।
🌸 ✨ 🛐 🙏

२. शंख चक्र और गदा हाथ में, चतुर्भुज यह विष्णु रूप,
भक्तों के इस अंतर्मन में, महके भक्ति का यह धूप।
गोविंद नाम के जयघोष से, दुःख सभी हर जाते हैं,
भक्तों के लिए देव मेरे, विठ्ठल रूप बन आते हैं।
🐚 🔱 🕉� 🕯�

३. द्वादशी का यह पावन दिन, व्रत की पूर्णता होती है,
विष्णु चरणों में झुककर ही, पावन काया होती है।
तुलसी की इस माला में ही, अटके प्राण हमारे हैं,
गोविंद के चरणों में अर्पित, प्रेम के भाव हमारे हैं।
📿 🌿 🍯 🧡

४. पीतांबरधारी नारायण तुम, जग के पावन पालनहार,
तुम्हारी ही एक कृपा से, होता भवसागर यह पार।
पीले फूलों की राशी चढ़ाई, गोविंद की मूरत पर,
शांत चित्त से नमन करें हम, जग के स्वामी ईश्वर पर।
🌼 👑 🌊 🛐

५. कठिन समय भी कट जाए माँ, प्रभु की इस कृपा से,
संसार का सुख मिलता है, विष्णु के इस दर्शन से।
शांति और समृद्धि का, मार्ग हमें दिखाना तुम,
भक्ति का यह नंदादीप, मन में सदा जगाना तुम।
⚖️ 🤝 💎 💖

६. दुष्टों के तुम संहारक हो, सज्जनों के तुम आधार,
तुम्हारे नाम का इस जग पर, सदा रहा है अधिकार।
प्रसाद पाकर धन्य हुए हम, गोविंद के इस द्वारे पर,
मिट गई है प्यास और भूख, भक्ति की इस ओढ़ पर।
🍯 🎶 🔥 🔱

७. अगले बरस भी फिर से आए, ऐसा ही यह शुभ दिन,
भक्तों की इन आँखों में रहे, गोविंद का रूप नवीन।
आशीर्वाद दो हमें प्रभु, सुखी रहे यह हमारा घर,
तुम्हारी ममता की छाया, रहे सदा हमारे सर।
👶 👴 🌈 🚩

शब्द सारांश (Hindi Word Summary):
गोविंद, द्वादशी, विष्णु, भक्ति, व्रत, तुलसी, शांति, आशीर्वाद, विठ्ठल, मुक्ति।

इमोजी सारांश (Emoji Summary):
🌸 ✨ 🛐 🙏 🐚 🔱 🕉� 🕯� 📿 🌿 🍯 🧡 🌼 👑 🌊 🛐 ⚖️ 🤝 💎 💖 🍯 🎶 🔥 🔱 👶 👴 🌈 🚩

🖼� चित्रसंकल्पना (Visual Concept):
चित्राच्या मध्यभागी भगवान विष्णूंचे 'गोविंद' रूप असावे, ज्यांनी पिवळे वस्त्र (पीतांबर) परिधान केले आहे. त्यांच्या हातात शंख, चक्र, गदा आणि कमळ आहे. त्यांच्या चरणापाशी तुळशीचे वृंदावन आणि नैवेद्याचे ताट असावे. पार्श्वभूमीला उगवता सूर्य आणि पांढरे शुभ्र ढग असावेत. भक्तांनी हात जोडून विष्णूंची प्रार्थना करताना दाखवावे, ज्यामुळे संपूर्ण चित्र भक्तीमय आणि शांत वाटेल.

--अतुल परब
--दिनांक-२८.०२.२०२६ - शनिवार.
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