सरकारी नौकरी और चिमणराव का आलस्य 🏢☕💤🏢 📑 🥱 🪑 💵 ⏰ ☕ 🎭 👴 😴 📚 🖋️ 🕰️ ⏳

Started by Atul Kaviraje, July 23, 2026, 07:00:20 PM

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Atul Kaviraje

सरकारी नौकरी और आलस-
"मैं उन लोगों में से था जो सरकारी नौकरी में काम किए बिना पैसे पाना अपना हक समझता था।"
-चिंतामन विनायक जोशी (सी. वी. जोशी)-राइटर, ह्यूमरिस्ट
-द चिमनराव एंड गुंड्याभाऊ क्रॉनिकल्स (चिमनराव एंड गुंड्याभाऊ सीरीज़)
-चिमनरावचे चरहट (चिमनरावचे चरहट)
-सीन/इवेंट: चिमनराव की अपने क्लर्क के प्रोफेशन पर कमेंट्री।
-जगह: मुंबई (गवर्नमेंट ऑफिस)।
-टाइम/ईयर: लगभग 1930 (मोटे तौर पर कहानी का समय)।

प्रस्तावना (Hindi Introduction) 📝
संदर्भ रेखा: प्रसंग: चिमणराव द्वारा अपनी क्लर्की और सरकारी दफ्तर के आलस्य पर किया गया हास्य-व्यंग्य | पुस्तक: 'चिमणरावाचे चऱ्हाट' | लेखक: सी. वी. जोशी (चिंतामण विनायक जोशी) | स्थान: मुंबई (सरकारी दफ्तर) | काल: १९३० का दशक 🏢💤

मराठी हास्य साहित्य के सिरमौर और प्रसिद्ध पात्र 'चिमणराव व गुंड्याभाऊ' के रचनाकार सी. वी. जोशी (चिंतामण विनायक जोशी) ने अपनी पुस्तक 'चिमणरावाचे चऱ्हाट' से सरकारी दफ्तरों की कामचोरी और आलस्य पर तीखा और मनोरंजक व्यंग्य किया है। १९३० के दशक में मुंबई के एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क चिमणराव का यह कहना कि "बिना काम किए वेतन पाना मेरा हक है", सरकारी कर्मचारियों की अकर्मण्यता पर एक सदाबहार और करारा प्रहार है।

सरकारी नौकरी और चिमणराव का आलस्य 🏢☕💤

पद १
सरकारी इस दफ्तर में मैं रोज़ सुबह आता हूँ,
काम की उन फाइलों को देख जमाई लेता हूँ।
कुर्सी पर बस बैठकर कागज़ इधर-उधर खिसकाना,
बिना काम किए वेतन लेना अपना हक माना।

पद का संक्षिप्त अर्थ: सरकारी दफ्तर में आकर केवल कुर्सी पर बैठना, फाइलों को देखकर उबासी लेना और बिना काम किए वेतन पाना चिमणराव अपना अधिकार मानते हैं।
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पद २
दस बजे टेबल पकड़ूँ, ग्यारह बजे चाय,
बिना काम के समय बिताना मेरी कला कहलाए।
साहब आएँ तो काम का ऐसा नाटक रचाता हूँ,
अंदर से तो आलस्य का ही राज चलाता हूँ।

पद का संक्षिप्त अर्थ: दफ्तर आकर चाय पीना और समय बर्बाद करना ही असली हुनर है। साहब के सामने काम का ढोंग रचना और अंदर से आलसी बने रहना ही उनका मुख्य काम है।
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पद ३
फाइलों का ढेर सामने, कलम हाथ में रखता हूँ,
नज़र उठाकर बार-बार घड़ी की सुई तकता हूँ।
एक-एक मिनट लगता जैसे कोई बड़ा पहाड़,
कब बजेंगे पाँच और कब भागूँ दफ्तर से बाहर?

पद का संक्षिप्त अर्थ: हाथ में कलम लेकर फाइलों के ढेर के बीच केवल घड़ी देखी जाती है। समय बीतना भारी लगता है और शाम के पाँच बजने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।
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पद ४
गुंड्याभाऊ जब आता है, बातों का रंग जमता है,
दफ्तर के काम का तब तो पूरा बंटाधार होता है।
काम के इस नाम पर बस आराम ही आराम करता हूँ,
सरकारी खज़ाने से अपनी जेबें में भरता हूँ।

पद का संक्षिप्त अर्थ: मित्र गुंड्याभाऊ के आते ही गपशप शुरू हो जाती है और काम ठप पड़ जाता है। काम के नाम पर केवल आराम करके सरकारी खजाने से मुफ़्त का वेतन लिया जाता है।
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पद ५
कलम की स्याही सूख जाए, कागज़ कोरा रहता है,
पंखे की ठंडी हवा में सिर झपकी लेता है।
साहब की डाँट को भी हँसकर टाल जाता हूँ,
आलस्य का यह राजा बनकर दफ्तर में इतराता हूँ।

पद का संक्षिप्त अर्थ: कागज़ कोरे रह जाएँ और कलम सूख जाए, पर पंखे की हवा में सोना ज़रूरी है। साहब की डाँट की परवाह किए बिना आलस्य का राज चलाया जाता है।
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पद ६
काम का कोई तनाव मुझको छू भी नहीं पाता है,
सरकारी इस नौकरी में कोई कष्ट न आता है।
महीने के अंत में पूरा वेतन हाथ में आता है,
क्लर्क का यह पेशा मुझको बड़ा ही भाता है।

पद का संक्षिप्त अर्थ: सरकारी नौकरी में कोई तनाव या मेहनत नहीं होती। महीने के अंत में पूरा वेतन मिलता है, इसलिए क्लर्क की यह नौकरी सबसे सुखद लगती है।
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पद ७
सी. वी. जोशी ने दर्शाया चिमणराव का ठाठ,
सरकारी इस आलस्य का पढ़ाया असली पाठ।
हँसते-हँसते बतलाया दफ्तरों का यह सत्य,
कामचोर मनोवृत्ति का यह चित्र है अत्यंत सच।

पद का संक्षिप्त अर्थ: सी. वी. जोशी ने चिमणराव के माध्यम से सरकारी दफ्तरों के आलस्य और कामचोरी का अत्यंत मनोरंजक तथा यथार्थवादी चित्रण प्रस्तुत किया है।
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हिंदी कविता - ईमोजी सारांश (Emoji Summary):
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हिंदी पाद-टिप्पणी (Hindi Footnote):
📌 टिप्पणी: सी. वी. जोशी द्वारा १९३० के दशक में रचा गया 'चिमणराव' का पात्र मराठी हास्य साहित्य का एक मील का पत्थर है। सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली और आलस्य पर किया गया उनका यह व्यंग्य आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रांजल है। 📜☕

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-22.07.2026-बुधवार.
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