🚩🙏📖✨🕉️ 🌺 निर्गुण ही अंतिम सार है 🌺🌸 🙏 📖 ✨ 🕉️ 📿 🕊️ ❤️ 💡 🚫 🗣️ ❌ 🚶

Started by Atul Kaviraje, July 24, 2026, 11:43:38 AM

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Atul Kaviraje

त्रिगुण असर निर्गुण हे सर (हरिपथ - अभंग 3)-
मराठी मतलब: तीनों तत्व (सत्व, रज, तम) नश्वर हैं; असली सार निर्गुण-निरकाश्यप का चिंतन करना है।
-संत ज्ञानेश्वर-संत, कवि / फिलॉसफर-भक्ति कविता
-मौका/इवेंट: पंढरपुर वारी के दौरान भक्तों को फिलॉसफी की आसान समझ देना।
-जगह: आलंदी / पंढरपुर मार्ग।
-तारीख/महीना/साल: लगभग AD 1290–1293।

📜 प्रस्तावना (Hindi Introduction)
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा आलंदी से पंढरपुर वारी के दौरान (लगभग ई.स. १२९०–१२९३ के बीच) भक्तों को सरल भाषा में दर्शन समझाने हेतु रचित 'हरिपाठ' के तीसरे अभंग "त्रिगुण असार निर्गुण हे सार..." में त्रिगुणों (सत्व, रज, तम) की असारता और निर्गुण-निराकार ईश्वर के नामस्मरण के शाश्वत महत्व को रेखांकित किया गया है। यह संसार माया का खेल है और केवल प्रभु का नाम ही परम सत्य है।

📍 घटना/प्रसंग: पंढरपुर वारी के दौरान भक्तों को दर्शन की सरल अनुभूति कराना | ग्रंथ संदर्भ: हरिपाठ (अभंग ३) | स्थान: आलंदी / पंढरपुर मार्ग | समय: लगभग ई.स. १२९०–१२९३ 🚩🙏📖✨🕉�

🌺 निर्गुण ही अंतिम सार है 🌺

पद १
त्रिगुण असार हैं, नश्वर सारे,
सत्व-रज-तम बंधन प्यारे।
माया यह झूठी, जगत पसारा,
निर्गुण राम ही एक सहारा।

अर्थ: सत्व, रज और तम ये तीनों गुण नश्वर हैं और मनुष्य को बंधनों में बांधते हैं। यह संसार माया है और केवल निर्गुण राम ही सच्चा आधार हैं।
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पद २
गुणों में उलझा यह जीव सारा,
व्यर्थ गंवाया जीवन धारा।
नाम बिना यह जीवन सूना,
हरि-नाम से मन हो पावन दूना।

अर्थ: मनुष्य त्रिगुणों के मोह में उलझकर अपना जीवन व्यर्थ गंवा देता है। प्रभु नाम के बिना जीवन निष्फल है और नाम से ही मन निर्मल होता है।
📿🕊�❤️💡🚫

पद ३
पंढरी के पथ पर दिंडी चले,
ज्ञानेश्वर के मधुर बोल मिले।
छोड़ो सब तर्कों के जाल,
जपो विट्ठल नाम हर हाल।

अर्थ: पंढरपुर की यात्रा में संत ज्ञानेश्वर उपदेश देते हैं कि व्यर्थ के वाद-विवाद छोड़कर केवल प्रभु विट्ठल के नाम का स्मरण करो।
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पद ४
इंद्रायणी तट भक्ति सुहानी,
नाम में ही है सार-कहानी।
जो जपे हरि को निरंतर ध्यान,
पाए वो भवसागर से त्राण।

अर्थ: आलंदी की पावन भूमि पर भक्ति की धारा बहती है। जो निरंतर प्रभु नाम का ध्यान करता है, वह इस संसार रूपी सागर से आसानी से तर जाता है।
🌊🏛�😇😊⛵

पद ५
अहंकार का बंधन तोड़ो,
राम-नाम से नाता जोड़ो।
गुणों से परे जो है भगवान,
उसी चरण में सौंपो प्राण।

अर्थ: अहंकार के बंधन को त्यागकर प्रभु राम के नाम में लीन हो जाओ। जो ईश्वर तीनों गुणों से परे है, उसी के चरणों में सच्ची भक्ति अर्पित करो।
🙇�♂️👑⚡️🌺🔱

पद ६
कठिन नहीं भक्ति का मार्ग,
यही सिखाता ज्ञानेश्वरी मार्ग।
नित्य हरिनाम जो मुख से गाए,
मोक्ष-धाम वो सहज ही पाए।

अर्थ: भक्ति का मार्ग अत्यंत सरल है। जो प्रतिदिन मुख से प्रभु का नाम लेता है, वह सहज ही परम मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।
🧘�♂️🌿🌻💫👑

पद ७
ज्ञानेश्वर कहें सुनो हे जन,
करो विट्ठल का ही चिंतन।
त्रिगुण असार, निर्गुण ही सार,
इसी से होगा सबका उद्धार।

अर्थ: संत ज्ञानेश्वर कहते हैं कि हे भक्तों! त्रिगुण नश्वर हैं और निर्गुण परमेश्वर ही अंतिम सत्य हैं; इसलिए प्रभु का ध्यान कर अपना कल्याण करें।
📣🙌💖💎🎁

📌 हिंदी तल-टीप (Foot-Note)
📝 नोट: संतों के अनुसार सांसारिक गुण और माया नश्वर हैं। इसलिए किसी बाह्य कर्मकांड में न उलझकर निर्गुण-निराकार ईश्वर के नाम का जप करना ही मानव जीवन के उद्धार का सबसे सरल मार्ग है। 🚩🙏จิต✨🕯�

🎨 हिंदी ईमोजी सारांश (Emoji Summary - Total 35)
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--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-23.07.2026-गुरुवार.
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