🚩🙏📖✨🕉️ 🌺 एक तत्त्व नाम दृढ धरी मना 🌺🌸 🙏 📖 ✨ 🕉️ 📿 🕊️ ❤️ 💡 🚫 🗣️ ❌

Started by Atul Kaviraje, July 24, 2026, 11:45:03 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

भगवान के एक नाम के सिद्धांत को मज़बूती से थामे रहो (हरिपथ - अभंग 5)
मराठी मतलब: हे मन, भगवान के एक नाम के सिद्धांत को मज़बूती से थामे रहो, यानी तुम दुनिया के सभी दुखों से आज़ाद हो जाओगे।
-संत ज्ञानेश्वर-संत, कवि / फिलॉसफर-भक्ति कविता
-मौका/इवेंट: हरिपथ उपदेश।
-जगह: आलंदी।
-तारीख/महीना/साल: लगभग AD 1290–1293।

📜 प्रस्तावना (Hindi Introduction)
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा आलंदी में (लगभग ई.स. १२९०–१२९३ के दौरान) रचित 'हरिपाठ' के पाँचवें अभंग "एक तत्त्व नाम दृढ धरी मना..." में मानव मन को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शाश्वत उपदेश दिया गया है। यह मन अत्यंत चंचल है और संसारी भ्रम, चिंताओं तथा दुखों में निरंतर भटकता रहता है। इस चंचल मन को स्थिर करने और संसार के दुखों से मुक्त करने का एकमात्र अचूक उपाय प्रभु का नामस्मरण ही है! यदि ईश्वर के एक नाम को ही परम तत्व मानकर मन में दृढ़ता से धारण कर लिया जाए, तो जीवन के समस्त दुखों का अंत हो जाता है।

📍 घटना/प्रसंग: हरिपाठ उपदेश (चंचल मन को नामस्मरण का दृढ़ उपदेश देना) | ग्रंथ संदर्भ: हरिपाठ (अभंग ५) | स्थान: आलंदी | समय: लगभग ई.स. १२९०–१२९३ 🚩🙏📖✨🕉�

🌺 एक तत्त्व नाम दृढ धरी मना 🌺

पद १
एक तत्त्व नाम दृढ धारो मना,
भटको न तुम यूँ ही बन-बना।
राम-नाम ही है शाश्वत सार,
तरेगा इसी से यह संसार।

अर्थ: हे मन! ईश्वर के एक नाम रूपी तत्व को ही हृदय में दृढ़ता से धारण करो और व्यर्थ के विषयों में मत भटको। राम-नाम ही परम सत्य है और इसी से संसार पार होगा।
🌸🙏📖✨🕉�

पद २
चंचल यह मन भागे दूर,
संसार में लाए दुखों का पूर।
नाम की डोरी से बांधो इस मन को,
शांति मिलेगी फिर जीवन को।

अर्थ: मनुष्य का मन बड़ा चंचल है, जो भटककर जीवन में दुख लाता है। यदि इस मन को नामस्मरण की डोरी से बांध दिया जाए, तो जीवन में अखंड शांति प्राप्त होती है।
📿🕊�❤️💡🚫

पद ३
शुष्क ज्ञान का न करो अभिमान,
नाम में समाया प्रभु का ध्यान।
सरल मार्ग यह छोड़ो न कभी,
कटेगा संसारी रोग सभी।

अर्थ: कोरे ज्ञान का घमंड मत करो; क्योंकि प्रभु नाम में ही समस्त ध्यान समाहित है। इस सरल मार्ग को कभी मत छोड़ो, यही संसार रूपी रोग की अचूक दवा है।
🗣�❌🚶�♂️🌈🔓

पद ४
इंद्रायणी तट संत ज्ञानेश्वर,
समझाते मन को यही परमेश्वर।
विट्ठल का नाम जपो निरंतर,
मिलेगी शांति मन के भीतर।

अर्थ: इंद्रायणी के पावन तट पर संत ज्ञानेश्वर मन को समझाते हैं कि निरंतर प्रभु विट्ठल के नाम का जप करो; इससे मन के भीतर असीम शांति का वास होगा।
🌊🏛�😇😊⛵

पद ५
अहंकार त्यागो, नाम में रहो,
हरी के रूप का आनंद लहो।
नाम की शक्ति है अपरंपार,
हटाए जो दुखों का भार।

अर्थ: अहंकार को त्याग कर प्रभु नाम में लीन हो जाओ और ईश्वर के मंगल रूप का आनंद लो। नामस्मरण की शक्ति अपार है, जो जीवन के सारे दुख हर लेती है।
🙇�♂️👑⚡️🌺🔱

पद ६
न चाहिए कठिन कोई साधना,
पूर्ण होगी मन की भावना।
हरि का नाम जो जपते नित्य,
पाते हैं वही परम सत्य।

अर्थ: किसी कठिन साधना की आवश्यकता नहीं है, नाम जप से ही मन की सात्विक इच्छाएं पूर्ण होती हैं। जो प्रतिदिन प्रभु नाम जपते हैं, वही परम सत्य को प्राप्त करते हैं।
🧘�♂️🌿🌻💫👑

पद ७
ज्ञानेश्वर कहें सुनो हे जन,
नाम में लगाओ अपना यह मन।
एक तत्त्व नाम धारो अंतरी,
कल्याण करेंगे श्री हरि।

अर्थ: संत ज्ञानेश्वर कहते हैं कि हे लोगों! अपने मन को प्रभु नाम में लगा दो। ईश्वर के एक नाम को ही परम तत्व मानकर हृदय में बसाओ, श्री हरि तुम्हारा कल्याण करेंगे।
📣🙌💖💎🎁

📌 हिंदी तल-टीप (Foot-Note)
📝 नोट: संतों के उपदेशानुसार मन की चंचलता और संसार के दुखों को समाप्त करने के लिए ईश्वर के एक नाम को ही परम तत्व मानकर हृदय में दृढ़ता से धारण करना ही मानव कल्याण का एकमात्र मार्ग है। 🚩🙏จิต✨🕯�

🎨 हिंदी ईमोजी सारांश (Emoji Summary - Total 35)
🌸 🙏 📖 ✨ 🕉� 📿 🕊� ❤️ 💡 🚫 🗣� ❌ 🚶�♂️ 🌈 🔓 🌊 🏛� 😇 😊 ⛵ 🙇�♂️ 👑 ⚡️ 🌺 🔱 🧘�♂️ 🌿 🌻 💫 👑 📣 🙌 💖 💎 🎁

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-23.07.2026-गुरुवार.
===========================================