🚩🙏📖✨🕉️ 🌺 क्या करूँ ऐसे संग का 🌺🌸 🙏 📖 ✨ 🕉️ 📿 🕊️ ❤️ 💡 🚫 🗣️ ❌ 🚶‍♂️

Started by Atul Kaviraje, July 24, 2026, 11:50:14 AM

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Atul Kaviraje

हमें क्या करना चाहिए, बताओ। न भक्ति, न द्वेष?
मराठी मतलब: ऐसे लोगों के साथ में हमें क्या करना चाहिए, जिन्हें न भगवान में भक्ति है और न ही दुनिया से द्वेष?
-संत एकनाथ-संत, कवि/विद्वान-भक्ति साहित्य
-मौका/घटना: पैठण के घमंडी और कर्मकांडी लोगों की निंदा करके सच्ची भक्ति का प्रचार करते हुए।
-जगह: पैठण (गोदावरी तट)।
-लगभग समय: AD 1565 - 1575।

📜 प्रस्तावना (Hindi Introduction)
संत एकनाथ महाराज द्वारा पैठण में गोदावरी के पावन तट पर (लगभग ई.स. १५६५-१५७५ के दौरान) पाखंडी और कर्मकांडी लोगों का विरोध करते हुए यह कालजयी उपदेश दिया गया था। "काय करू या सांगाती। नाही भक्ती ना विरक्ती॥" इन पंक्तियों के माध्यम से संत एकनाथ जी ने ऐसे अभागे लोगों के साथ पर दुख व्यक्त किया है, जिनके मन में न तो ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति है और न ही सांसारिक मोह-माया के प्रति विरक्ति। ऐसे शुष्क और कपटी लोगों का संग मनुष्य को भक्ति मार्ग से भटकाता है।

📍 घटना/प्रसंग: पैठण के दंभी व पाखंडी लोगों का खंडन कर सच्ची भक्ति का उपदेश देना | ग्रंथ संदर्भ: एकनाथी अभंग/गाथा | स्थान: पैठण (गोदावरी तट) | समय: लगभग ई.स. १५६५ - १५७५ 🚩🙏📖✨🕉�

🌺 क्या करूँ ऐसे संग का 🌺

पद १
क्या करूँ ऐसे संग का भाई,
भक्ति न विरक्ति मन में आई।
व्यर्थ गंवाते जीवन सारा,
माया-जाल में भटके बिचारा।

अर्थ: जिन लोगों के मन में प्रभु के प्रति न भक्ति है और न संसार से विरक्ति, ऐसे लोगों का संग करके क्या लाभ? वे अपना बहुमूल्य जीवन मोह-माया के जाल में व्यर्थ ही गंवा देते हैं।
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पद २
दंभ-दिखावा बाहर भारी,
अंदर कपट और चिंता भारी।
प्रभु न स्वीकारें ऐसा ढोंग,
दूर रहें इनसे संत-लोग।

अर्थ: ये लोग बाहर से धार्मिक होने का ढोंग करते हैं, किंतु अंदर से छल और चिंताओं से भरे होते हैं। ईश्वर ऐसे दिखावे को पसंद नहीं करते और संत भी इनसे दूर रहते हैं।
📿🕊�❤️💡🚫

पद ३
शुष्क ज्ञान की करते बात,
स्वार्थ न छोड़ें दिन और रात।
नाम का जिनको ध्यान नहीं,
उनके संग में कल्याण नहीं।

अर्थ: वे कोरे ज्ञान की बातें करते हैं पर अपना स्वार्थ कभी नहीं छोड़ते। जिन्हें प्रभु के नाम से प्रेम नहीं, उनके साथ रहने से केवल मनस्ताप ही मिलता है।
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पद ४
गोदावरी के पावन तीर,
एकनाथ समझाते धीर।
सज्जन संग में ही सुख पाए,
जीवन में जो रंग बिखराए।

अर्थ: गोदावरी के पवित्र तट पर पैठण में संत एकनाथ समझाते हैं कि सदा सत्पुरुषों की संगति करो; क्योंकि सच्चे भक्तों के साथ ही जीवन में वास्तविक आनंद आता है।
🌊🏛�😇😊⛵

पद ५
अहंकार का बंधन तोड़ो,
विषय-वासना से मुँह मोड़ो।
हरि-नाम जपो मन के भीतर,
यही श्रेष्ठ है त्रिभुवन भीतर।

अर्थ: मन के अहंकार को नष्ट कर सांसारिक वासनाओं का त्याग करो। हृदय में निरंतर हरि का नाम जपना ही तीनों लोकों में सबसे महान कार्य है।
🙇�♂️👑⚡️🌺🔱

पद ६
निर्मल भाव रखो तुम मन में,
प्रभु विराजेंगे फिर कण-कण में।
पाखंडी का संग तुम त्यागो,
भक्ति-मार्ग में जगकर जागो।

अर्थ: यदि मन में पवित्र और निष्कपट भाव होगा, तभी ईश्वर की कृपा प्राप्त होगी। इसलिए पाखंडी लोगों का साथ छोड़कर सदा भक्ति के मार्ग पर अग्रसर रहो।
🧘�♂️🌿🌻💫👑

पद ७
एका जनार्दनी कहें पुकार,
भक्ति-मार्ग है परम अधार।
राम-नाम जो मन में धारे,
भवसागर से वो तर जाए।

अर्थ: संत एकनाथ (एका जनार्दनी) कहते हैं कि हे भक्तों! भक्ति का मार्ग कभी मत छोड़ो। जो अपने मन में राम-नाम बसाता है, वह भवसागर से सहज ही पार उतर जाता है।
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📌 हिंदी तल-टीप (Foot-Note)
📝 नोट: संत एकनाथ महाराज के अनुसार ढोंगी और ईश्वर से विमुख लोगों की संगति मनुष्य को पतन की ओर ले जाती है। इसलिए कुसंग त्याग कर निष्कपट भक्ति और सत्संग करना ही आत्म-कल्याण का सुलभ मार्ग है। 🚩🙏จิต✨🕯�

🎨 हिंदी ईमोजी सारांश (Emoji Summary - Total 35)
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--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-23.07.2026-गुरुवार.
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