श्री रेवणसिद्धेश्वर यात्रा (लिंबी-चिंचोली)

Started by Atul Kaviraje, August 31, 2026, 10:54:07 AM

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Atul Kaviraje

SHRI REVAN SIDDHESHWAR YAATRAA-LIMBI-CHINCHOLI, TALUKA-DAKSHIN SOLAAPUR-

सोलापूर जिल्ह्यातील दक्षिण सोलापूर तालुक्यातील लिंबी-चिंचोली येथील श्री रेवणसिद्धेश्वर यांची यात्रा म्हणजे नाथ परंपरेतील भक्ती आणि श्रद्धेचा एक अलौकिक सोहळा. नवनाथांपैकी एक असलेल्या श्री रेवणसिद्ध महाराजांच्या चरणी अर्पण केलेली ही ७ कडव्यांची रसाळ मराठी कविता:

श्री रेवणसिद्धेश्वर यात्रा (लिंबी-चिंचोली)

१. पद (Pad 1)
दक्षिण सोलापुर की गोद में, लिंबी-चिंचोली सजा,
रेवणसिद्ध के रूप में, भक्तों का भाग्य जगा।
यात्रा का यह समय आया, भक्ति की शान नई,
चरणों में आने से, खुशियाँ हमें मिल गई।

२. पद (Pad 2)
नागझरी के गोमाजी जैसा, सबको है यहाँ विश्वास,
रेवणसिद्ध के चरणों में, होता सुख का अहसास।
नवनाथों के तुम देव, भक्तों के तुम रखवाले,
दर्शन को उमड़ा है यहाँ, भक्तों का काफिला निराला।

३. पद (Pad 3)
पीला जर्द यह भंडारा, और गुलाल की बौछार,
रेवणसिद्ध के नाम में, सुख का है आधार।
काठी नाचे ताल पर, 'चांगभलं' का है शोर,
भक्तों के इस दिल में, खिंची भक्ति की डोर।

४. पद (Pad 4)
चिंचोली की इस माटी को, नाथों का स्पर्श मिला,
रेवणसिद्ध के नाम का, भक्ति का फूल खिला।
संकट के हर काले बादल, नाथ ही यहाँ रोकते,
भक्तों की हर पुकार पर, वे दौड़े चले आते।

५. पद (Pad 5)
भजन के इन सुरों में, खोए हैं सब लोग,
रेवणसिद्ध नाथ के चरणों में, मिला भक्ति का संयोग।
अखंड यह नामजप, 'सिद्धेश्वर महाराज की जय' नारा,
शांति मिले मन को यहाँ, बहे प्रेम की धारा।

६. पद (Pad 6)
महाप्रसाद की मिठास, तृप्त करे सबको यहाँ,
भक्ति के इस भाव जैसा, और सुख है कहाँ?
नत मस्तक हूँ आज मैं, आपके पावन चरणों में,
कीर्ति आपकी महकती, धरती के कण-कण में।

७. पद (Pad 7)
युगों युगों की परंपरा, चिंचोली ने है पाली,
भक्तों की इस टोली पर, बरसे कृपा निराली।
रेवणसिद्धेश्वर महाराज की जय, गूँजे सारा आसमान,
भक्ति का यह उत्सव, बढ़ाए सबका मान।

📊 पीपीटी (PPT) आराखडा
Slide 1: "श्री रेवणसिद्धेश्वर यात्रा सोहळा २०२६ - लिंबी-चिंचोली (सोलापूर)".

Slide 2: लिंबी-चिंचोली येथील मंदिराचा इतिहास आणि नवनाथ परंपरेचे महत्त्व.

Slide 3-5: मराठी कविता (७ कडवे) - भंडारा उधळण आणि काठी मिरवणुकीचे फोटो.

Slide 6-8: हिंदी अनुवाद - "रेवणसिद्धेश्वर महिमा".

Slide 9: यात्रेचे आकर्षण: पालखी सोहळा, नंदीध्वज (काठी) आणि महाप्रसाद.

Slide 10: Emoji Summary आणि "नाथ प्रसन्न" संदेश.

--अतुल परब
--दिनांक-२३.०३.२०२६ - सोमवार.
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