समझ की दवा और ढिम्म स्वभाव🤝 ❤️ 🌍 ✨ 📘 💡 🩺 🌿 🎯 😌 🏹 💊 🔄 🙏 💫 🗿 🚫 🤷‍♂

Started by Atul Kaviraje, September 02, 2026, 12:10:47 PM

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Atul Kaviraje

तो ऐसे मूर्खों की समाज सेवा के तौर पर हम उन्हें जितना हो सके समझाने की कोशिश करते हैं, उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं, हमें लगता है कि उन्हें थोड़ी अक्ल आनी चाहिए, ज़्यादा नहीं तो, और समाज में इज़्ज़त और समझदारी से पेश आना चाहिए, हमें लगता है कि इस समाज में एक इंसान को लाने से हमें हल मिल जाएगा। इसलिए हमें ऐसे लोगों को समझदारी का घूंट पिलाना होगा, उनकी बेवकूफी की यही एक दवा है, हम हमेशा कोशिश करते हैं, कि बाबा, यह दवा लेने के बाद तुम सुधर जाओ और थोड़ी और समझदारी से पेश आओ,
लेकिन जैसा था, तुम कितनी भी कोशिश करो, कितना भी समझाने की कोशिश करो, कितना भी समझाने की कोशिश करो, कितना भी समझाने की कोशिश करो, कितनी भी दवा लो, यह तुम्हारा अपना वहम है, मेरा सच, जो मैं कहता हूँ वही सच है,

प्रस्तावना - हिंदी कविता
समाज सेवा की भावना से किसी नासमझ को राह पर लाने के लाख प्रयास करने के बाद भी जब उसके स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आता, तो यह रचना उसी बेबस सच्चाई को बयां करती है।

समझ की दवा और ढिम्म स्वभाव

समाज सेवा का मन में भाव जगाकर,
हम समझाते हैं उसे दिल से अपनाकर,
वह थोड़ी सी समझदारी तो अपना ले,
इस समाज में इज्जत से जीना सीख ले।
इस पद का संक्षेप में अर्थ: समाज सेवा के भाव से हम उसे समझाते हैं कि वह थोड़ी समझदारी अपनाकर इज्जत से जिए।
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एक इंसान को राह पर लाने का सुकून,
बड़ा प्यारा होता है उसका जुनूनी जून,
इसीलिए उसे काढ़ा पिलाना पड़ता है,
उसके इस रोग को मिटाना पड़ता है।
इस पद का संक्षेप में अर्थ: एक इंसान को सुधारने का सुकून पाने के लिए हम उसे समझ की दवा देते हैं।
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यही एकमात्र अचूक उपाय होता है,
जिससे इंसान का भाग्य सोता है,
हम बार-बार यही कोशिश करते हैं,
कि वह सुधरकर सही राह पर चले।
इस पद का संक्षेप में अर्थ: यह रामबाण उपाय मानकर हम बार-बार उसे सही रास्ते पर लाने की कोशिश करते हैं।
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पर स्थिति वैसी की वैसी ही रहे,
कितना भी समझाओ वह कुछ न सहे,
उसका स्वभाव पत्थर जैसा ढिम्म है,
उसके आगे हर प्रयास बिल्कुल निम्न है।
इस पद का संक्षेप में अर्थ: लाख कोशिशों के बाद भी उसकी स्थिति वैसी ही रहती है क्योंकि उसका स्वभाव पत्थर जैसा ढिम्म है।
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बस मेरी ही बात सही और मैं ही महान,
यही रहता है उसका हमेशा अभिमान,
कितनी भी मिन्नतें करो या समझाओ,
उसके कान पर जूं तक न रेंगो लाओ।
इस पद का संक्षेप में अर्थ: 'मैं ही सही हूँ' की जिद में वह किसी की बात नहीं सुनता और उसके कान पर जूं नहीं रेंगती।
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कौई भी काढ़ा या दवा उसे पिलाओ,
उसके दिल पर असर न लाओ,
वही ढिम्म रवैया उसका रहता सदा,
बदलाव का न दिखता कोई भी छटा।
इस पद का संक्षेप में अर्थ: कोई भी दवा उसे पिला लो, उसके रवैये में कभी कोई बदलाव नहीं दिखता।
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अंततः हमारे सारे प्रयास थक जाते हैं,
उम्मीद के दिए बुझ से जाते हैं,
जो खुद न बदलना चाहे अपनी चाल,
उसे सुधारना है बस बेहाल।
इस पद का संक्षेप में अर्थ: अंत में हमारे सभी प्रयास थक जाते हैं क्योंकि जो खुद बदलना नहीं चाहता, उसे सुधारना असंभव है।
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इमोजी सारांश - हिंदी कविता
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तात्पर्य - हिंदी टीप
जो व्यक्ति अपनी जिद पर अड़ा हो, उसे लाख समझाने पर भी बदला नहीं जा सकता; ऐसे में अपने प्रयासों को सीमित करना ही बुद्धिमानी है।
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--संकलन --अतुल परब          दिनांक- 02.09.2026.
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