गृहिणीओं का बाहर काम करना और मोदकों का बाजारीकरण 👩‍🍳💼🛒🏭📉👩‍🍳 💼 🛒 🏭 📉

Started by Atul Kaviraje, September 03, 2026, 11:06:07 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

गृहिणीओं का बाहर काम करना और मोदकों का बाजारीकरण 👩�🍳💼🛒🏭📉

गृहिणी जब सुबह-सभरे बाहर काम पर जाती हैं,
समय की इस दौड़-भाग में वे मोदक भूल जाती हैं।
इसी व्यस्तता के चलते वे घर के पकवान छूटे,
और हाथों की वे सुंदर कलाएं हमसे हैं रूठे।
अर्थ: गृहिणी के बाहर काम करने से घर में मोदक बनने की परंपरा पीछे छूट गई है।
👩�🍳💼🛒🏭📉

नारियल और गुड़ की वह सौंधी खुशबू अब कहाँ है,
बाजार के डिब्बों में सिमटा हुआ यह जहाँ है।
यहीं कारण है कि आज मोदकों का बाजारीकरण हुआ,
हर दुकान पर पैकेटबंद मोदक का अम्बार दिखा हुआ।
अर्थ: व्यस्त जीवन के कारण आज मोदक पूरी तरह बाजार के हवाले हो गए हैं और पैकेटबंद मिलते हैं।
📦🛍�💰🏭🏪

मशीनों से बने वे मोदक दिखने में सुंदर लगते हैं,
पर उनमें वे माँ के हाथों के जादुई रंग नहीं रखते हैं।
पैसों से तो वह डिब्बा खरीदकर घर ले आते हैं,
पर घर के स्वाद को हम बहुत दूर छोड़ जाते हैं।
अर्थ: बाजार के मोदक सुंदर तो होते हैं पर उनमें माँ के हाथों का वो प्यार नहीं होता।
🤖⚙️🧊🍽�❌

वक्त का यह पहिया है जो सबको चलाता है,
बाजार की चमक-दमक में हर इंसान खो जाता है।
घर के पटरे पर बैठकर मोदक बनाने का वह दौर,
अब यादों में सिमटकर रह गया है चारों ओर।
अर्थ: समय के बदलाव के साथ घर पर मोदक बनाने की परंपरा अब यादों में रह गई है।
⏳💵📉🏙�🛒

पर बाप्पा के प्रति श्रद्धा हमारी आज भी है वैसी,
चाहे मोदक घर का हो या दुकान की थैली जैसी।
भाव देखकर बाप्पा तो भोग स्वीकार कर लेते हैं,
भक्तों के इस पावन प्रेम को वे दिल से अपनाते हैं।
अर्थ: मोदक घर का हो या बाजार का, बाप्पा हमेशा भक्तों का सच्चा भाव देखते हैं।
🐘🙏💖🏠✨

इतिहास के पन्ने हमें ज्ञान यह सिखलाते हैं,
बदलाव के साथ हम नए रास्ते अपनाते हैं।
अखंड भारत का हो सदा ही पावन जयजयकार,
हमारी संस्कृति का प्यार रहे सदा
अर्थ: समय के बदलाव के साथ हम आगे बढ़ते हैं, पर अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैं।
🧠📖🙏🌿🌐

अखंड भारत का हो सदा ही पावन जयजयकार,
बाजार की भीड़ में भी सजे हमारा यह संसार।
मोदकों की यह मिठास दिलों में सदा बसी रहे,
खुशियों की यह गाड़ी यूं ही हमेशा चलती रहे।
अर्थ: अखंड भारत का जयजयकार हो और मोदकों की मिठास हमेशा हमारे दिलों में बनी रहे।
📢🚩😊🌿🎉

हिंदी कविता टिपटिप: कामकाजी जीवनशैली के कारण मोदकों का बाजारीकरण होना आज के आधुनिक समाज का एक बड़ा यथार्थ है। 🥟🛒📉

👩�🍳 💼 🛒 🏭 📉 📦 🛍� 💰 🏭 🏪 🤖 ⚙️ 🧊 🍽� ❌ ⏳ 💵 📉 🏙� 🛒 🐘 🙏 💖 🏠 ✨ 🧠 📖 🙏 🌿 🌐 📢 🚩 😊 🎉

===========================================
--संकलन --अतुल परब--दिनांक-०३.०९.2026-गुरुवार.
===========================================