हम मराठी, आप मराठी, महाराष्ट्र हमारा प्राण है🇮🇳 🚩 🥟 🏡 🌐 ✨

Started by Atul Kaviraje, September 03, 2026, 11:08:14 AM

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Atul Kaviraje

हम मराठी, आप मराठी, महाराष्ट्र हमारा स्वाभिमान है 🇮🇳 हम मराठी, आप मराठी, महाराष्ट्र हमारा स्वाभिमान है 🇮🇳

हम मराठी, आप मराठी, महाराष्ट्र हमारा प्राण है,
इन मराठमोले मोदकों पर हमें पूरा अभिमान है।
संस्कृति की इस अमूल्य थाती को सहेजना हमारा धर्म है,
जिसकी सुगंध से महकता यह पूरा पावन मर्म है।
अर्थ: मराठी होने पर गर्व है और इन मराठमोले मोदकों पर हमें सार्थ अभिमान है।
🇮🇳 हम मराठी, आप मराठी, महाराष्ट्र हमारा प्राण है 🇮🇳

महाराष्ट्र की यह पावन धरती संतों और वीरों की गाथा,
छत्रपति शिवाजी महाराज की यहाँ बही है महिमा-गाथा।
इसी महान भूमि पर जन्मे हमारे ये प्यारे मोदक प्यारे,
जिनके आगे फीके पड़ जाते दुनिया के सारे नजारे।
अर्थ: संतों और वीरों की इस भूमि पर मोदक जैसे पारंपरिक और पवित्र पकवान की पैदाइश है।
🚩 छत्रपति शिवाजी महाराज और संतों की इस भूमि पर मोदक जैसे पारंपरिक पकवान की पैदाइश है। 🚩

बाप्पा के चरणों में समर्पित यह मोदक हमारी शान है,
जिससे दुनिया भर में गूँजती हमारी संस्कृति की जान है।
उबले हों या तले हुए, हर कली में बसी है कला,
माँ और दादी के हाथों से इसे मिला है वरदान भला।
अर्थ: बाप्पा का प्रिय मोदक हमारी संस्कृति और कला का सबसे बड़ा प्रतीक है।
🥟 बाप्पा का प्रिय मोदक हमारी संस्कृति और कला का सबसे बड़ा प्रतीक है। 🥟

वक्त के इस पहिये के साथ भले ही सब कुछ बदला है,
पर घर के मोदक के स्वाद से प्यारा कुछ न मिला है।
आज जो संकल्प हमने मिलकर यहाँ पर उठाया है,
मोदक के उस घरपन को हमने फिर से घर बुलाया है।
अर्थ: समय बदलने के बावजूद हमने मोदक के घरपन और अपनी संस्कृति को फिर से गले लगाया है।
🏡 समय बदलने के बावजूद हमने मोदक के घरपन और अपनी संस्कृति को फिर से गले लगाया है। 🏡

अखंड भारत का हो सदा ही पावन जयजयकार,
राष्ट्रभक्ति और संस्कृति से महकता रहे यह संसार।
मोदकों की यह मिठास और महाराष्ट्र का यह स्वाभिमान,
पीढ़ी-दर-पीढ़ी रहे अमर, यही हमारा अंतिम वरदान।
अर्थ: अखंड भारत का जयजयकार हो और हमारी संस्कृति तथा मोदकों का यह अभिमान सदा अमर रहे।
🌐 अखंड भारत का जयजयकार हो और हमारी संस्कृति तथा मोदकों का यह अभिमान सदा अमर रहे। 🌐

हिंदी कविता टिपटिप: मराठी अस्मिता और मोदकों के प्रति प्रेम को समर्पित यह रचना हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करती है। ✨

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--संकलन --अतुल परब--दिनांक-०२.०९.2026-बुधवार.
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