हरि-दर्शन की प्यास और गोपियों की व्यथा👀 🌿 💧 🕊️ 📜 | ⏳ 🛤️ 🍃 💔 🌧️ | 👶 🥛

Started by Atul Kaviraje, September 11, 2026, 02:39:01 PM

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Atul Kaviraje

कवि और पद का परिचय (हिंदी)
महाकवि सूरदास हिंदी साहित्य के कृष्ण भक्त कवियों में सर्वोच्च स्थान रखते हैं। 'सूरसागर' के भ्रमरगीत प्रसंग से लिया गया यह पद गोपियों के अनन्य प्रेम और उद्धव के योग-संदेश के बीच के संवाद को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है।

पद का शीर्षक: हरि-दर्शन की प्यास और गोपियों की व्यथा

कडवे १
नैन हमारे तरस रहे हैं दर्शन को मोहन के,
रंग में डूबे हुए हैं रूप-रस के पावन मन के।
उद्धव की ये रूखी बातें सहन न होती अब,
विरह की इस पावन वेला में जलता सब शब।
भावार्थ: गोपियाँ उद्धव से कहती हैं कि उनकी आँखें केवल कृष्ण के दर्शन की भूखी हैं और उद्धव के ज्ञान के सूटकेस उन्हें अच्छे नहीं लगते।
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कडवे २
गिन-गिन कर दिन रात प्रतीक्षा हमने तो है की,
कृष्ण हमारे मन की हर धड़कन को है चीरी।
पर अब इन योग संदेशों ने दिल को बहुत दुखाया,
विरह की इस आंधी ने हमको है और गिराया।
भावार्थ: कृष्ण के आने की अवधि गिनते हुए आँखें कभी नहीं थकी थीं, लेकिन अब योग के संदेश सुनकर वे अत्यंत व्याकुल हो उठी हैं।
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कडवे ३
वही पुराना मुखड़ा हमको एक बार दिखा जा,
पत्तों के दोने में दूध पीने की याद दिला जा।
सूरदास की गोपियाँ बस यही पुकार लगाती हैं,
कृष्ण के चरणों में अपनी सुध-बुध बिसराती हैं।
भावार्थ: गोपियाँ चाहती हैं कि कृष्ण अपना वही पुराना बाल-रूप और पत्तों के दोने में दूध पीने की लीला उन्हें फिर से दिखाएँ।
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कडवे ४
रेत के ऊपर जैसे कोई नाव चला न पाएगा,
वैसे ही योग संदेश यहाँ कोई न अपनाएगा।
हमारी नदियाँ सूखी नहीं, प्रेम से भरी हैं पूरी,
ज्ञान की इन बातों से न होगी कभी दूरी।
भावार्थ: गोपियाँ उद्धव को समझाती हैं कि जिस प्रकार रेत पर नाव नहीं चल सकती, उसी प्रकार प्रेमियों के लिए योग-साधना व्यर्थ है।
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कडवे ५
रोम-रोम में बसा हुआ है सावलिया सरकार हमारा,
उसके बिना इस दुनिया में नहीं कोई भी सहारा।
ज्ञान और वैराग्य की बातें हमको न सिखलाओ,
कृष्ण-प्रेम की इस गंगा में हमको डूब जाने दो।
भावार्थ: गोपियों के रोम-रोम में केवल कृष्ण का वास है, इसलिए उन्हें ज्ञान या योग की बातें आकर्षित नहीं करतीं।
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कडवे ६
उद्धव जी तुम अपने ज्ञान की गठरी वापस ले जाओ,
प्रेम की इस बोली को तुम व्यर्थ न ठुकराओ।
हम तो केवल जानती हैं प्रीति की यह भाषा,
कृष्ण-मिलन की प्यास ही है जीवन की अभिलाषा।
भावार्थ: गोपियाँ उद्धव के योग संदेश को अस्वीकार करते हुए केवल कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को सर्वोपरि मानती हैं।
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कडवे ७
भक्ति और प्रेम की यह महिमा सबसे न्यारी है,
कृष्ण-चरणों में ही जीवन की हर इक जीत हमारी है।
सूरदास जी कहते हैं प्रेम अमर हो जाता है,
सच्चे मन का प्रेमी ही प्रभु को पा जाता है।
भावार्थ: अंततः यह पद यह संदेश देता है कि ज्ञान और योग से ऊपर केवल अनन्य प्रेम और भक्ति का मार्ग है।
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इमोजी सारांश (हिंदी):
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पद संदर्भ टीप (हिंदी)
यह पद सगुण भक्ति की महत्ता और ज्ञान-योग के अहंकार पर प्रेम की विजय का सुंदर संदेश देता है।

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--संकलन --अतुल परब--DATE-10.09.2026-THURSDAY.
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