प्राजक्त का नाज़ुक स्पर्श🌳 🌿 🌸 💚 ✨🌿 💧 ✨ 🤍 🌸

Started by Atul Kaviraje, September 11, 2026, 02:56:23 PM

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Atul Kaviraje

हिंदी कविता - प्राजक्त का नाज़ुक स्पर्श

वह प्राजक्त की नियमित पखरण
कभी-कभी अंगों पर लेनी सी लगती है
तनु पर उस हल्के से स्पर्श के लिए,
पेड़ के नीचे से बार-बार गुजरना अच्छा लगता है।

भोर की उस ठंडी और सुहानी हवा में,
फूलों का यह कालीन बिछा हो जैसे जमीं पर।
न रहे अब किसी भी बात की कोई शिकन,
प्राजक्त के साए में महक उठे मेरा हर एक पल।
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सफेद और नारंगी उन सुंदर फूलों की बहार,
देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है मेरा यह संसार।
नरम-मुलायम उन फूलों का वह जादुई अहसास,
खींच लाता है मुझे हर बार उसके ही पास।
🌸 🌼 💫 🍃 💖

तन पर जब गिरती है वह फूलों की बूंद,
मानो धुल जाती हो मन की हर एक गंध।
जीवन के सारे तनाव और सारी उलझनें,
खो जाती हैं उस नाज़ुक स्पर्श की फुहारों में।
🌿 💧 ✨ 🤍 🌸

यही बना रहे प्राजक्त का यह प्यारा सा डेरा,
जिससे रोशन रहे मेरा यह जीवन का सवेरा।
प्रकृति के इस रूप में ही पा लूं मैं हर ख़ुशी,
यही तमन्ना है दिल की, यही है मेरी बेखुदी।
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--संकलन --अतुल परब--दिनांक-09.09.2026-WEDNESDAY.