प्राजक्ता की पुकार –🌳 🍃 🌸 🤍 ✨ 🌼 💧 💛 🌱 🕊️ ☀️ 🌿 ✨ 💖 🌙 ⭐ 🔥 💫 🌹 🛤️

Started by Atul Kaviraje, September 11, 2026, 02:57:52 PM

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Atul Kaviraje

प्राजक्ता की पुकार –

उस सीमेंट के इस घने और उजाड़ जंगल से,
हे प्राजक्त, तुझे ढूंढने का प्रयास कर रही हूँ।
एक कड़वे सत्य का सामना करते हुए,
तू मेरे जीवन में बार-बार लौट आए, ऐसी इच्छा होती है।

कडवे १ / Stanza 1
मन के इस दबाव से बाहर निकलकर, तेरी उस कोमलता का स्पर्श पाने को दिल करता है
दौड़-भाग भरी इस कृत्रिम और ठहरी हुई दुनिया में, तेरी वह जीवंत सुगंध मिलने की चाह है
अंधेरी राहों पर चलते हुए जब अकेलापन सताता है, तब तेरा सुनहरी कालीन रास्ता दिखाता है
खोई हुई इस शांति की तलाश करते हुए, मन फिर एक बार तेरी ही ओर दौड़ा चला जाता है
अर्थ: कृत्रिम दुनिया के अकेलेपन में प्राजक्त की महक और फूल मन को शांति और सही राह दिखाते हैं।
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कडवे २ / Stanza 2
झरने वाले हर एक फूल में एक संदेश छुपा होता है, हंसते-हंसते जीवन कैसे जिएं, यह वह सिखाता है
जीवन के पथ पर मुश्किलें भले ही आएं, बिना थके फिर से नए सिरे से खिलते जाना पड़ता है
मुरझाने से पहले दूसरों को सुख देना, यही तो असल जीवन की असली पूंजी होती है
यह गूढ सत्य आज जब फिर से समझ आता है, तेरे जैसा निःस्वार्थ होने को दिल करता है
अर्थ: फूलों का गिरना और मुस्कुराना हमें संकटों में भी निःस्वार्थ भाव से जीने की प्रेरणा देता है।
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कडवे ३ / Stanza 3
सुबह के उस पहले पहर में जब, तेरी सफेद-शुभ्र कलियां जमीन पर बिखर जाती हैं
हरी-भरी पत्तियों से फिसलकर जब, ओस की बूंदें बदन पर अलगद आके गिरती हैं
वेदना के इस सागर से पार निकलते हुए, आंसुओं के साथ सारे गम बह जाते हैं
तेरे एक स्पर्श से मन के सभी, टूटे हुए अरमान फिर से जुड़ जाते हैं
अर्थ: प्राजक्त के सानिध्य में आने से मन के सारे दुख और दर्द दूर होकर नई उम्मीद जागती है।
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कडवे ४ / Stanza 4
कालरात्रि के इस घेरे से बाहर निकलकर, उम्मीद का एक नया सूरज तलाश रही हूँ
तेरी उन नाजुक शाखाओं को कसकर गले लगाकर, पुरानी यादों को फिर से ताजा कर रही हूँ
जो भी सुंदर था वह सब पीछे छूट गया हो, पर वर्तमान में जीने का हौसला पा रही हूँ
तेरे इस रूप से मेरी इस आत्मा को मानो, एक नया और पवित्र जन्म सा मिल गया है
अर्थ: अतीत की यादों को पीछे छोड़ते हुए प्राजक्त के सहारे वर्तमान में जीने की नई ताकत मिलती है।
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कडवे ५ / Stanza 5
कांटों भरी इस राह पर चलते हुए, पैरों में चुभने वाले जख्म अब जाने पहचाने से हो गए हैं
पर तेरे उस नरम कालीन पर कदम पड़ते ही, थके हुए मन के सारे घाव भर आए हैं
किसी से कोई भी शिकायत किए बिना जीना, मैंने आज तुझसे यही तो सीख लिया है
सीमेंट की इस बंजर और वीरान मिट्टी में भी, प्रेम का एक पेड़ ऐसे ही खिलाते रहना है
अर्थ: जीवन की पीड़ा सहते हुए प्राजक्त हमें चुपचाप सहनशीलता और प्रेम का पाठ पढ़ाता है।
🌹 🛤� 🍃 🤝 ✨

कडवे ६ / Stanza 6
समय के पटल पर अंकित तेरा यह रूप, आंखों के कैमरे में हमेशा के लिए कैद करना चाहती हूँ
सांसों में बसी यह महक कभी न खत्म होने वाली, मेरे अंतःकरण की गहराइयों में उतारना चाहती हूँ
सत्य और सौंदर्य का यह अद्भुत संगम, जिंदगी भर के लिए मेरी संगिनी बन जाए
आखिरी सांस तक यह रिश्ता यूं ही बना रहे, हे प्राजक्त, तेरी ही छांव में विश्राम पाना चाहती हूँ
अर्थ: प्राजक्त का सौंदर्य और सुगंध जीवन के अंतिम पल तक साथ रहे, यही तीव्र अभिलाषा है।
⏳ 📖 🌸 🕊� 🙏

कडवे ७ / Stanza 7
मेरी उस असीम तलाश का सफर अब थमा, हे प्राजक्त, तू मुझे मेरे ही भीतर मिल गया है
जिसे मैं पूरी दुनिया में बाहर ढूंढ रही थी, वह आनंद का स्रोत तो मेरे ही अंदर बह रहा है
कड़वे सत्य का यह सफर अब आसान हो गया, क्योंकि तू मुझे जीवन का असली अर्थ समझा गया
धन्य हो गया यह जीवन तेरे पावन स्पर्श से, अब तो मेरा हर एक सांस केवल तेरे नाम हो गया है
अर्थ: बाहरी दुनिया में भटकने के बजाय अपने ही भीतर प्राजक्त रूपी आत्मिक आनंद और जीवन का सार मिल जाता है।
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हिंदी तळटीप (Tal-Tip): सीमेंट के इस कृत्रिम और भागदौड़ भरे संसार में यदि खुद को और आत्मिक शांति को पाना है, तो प्रकृति और प्राजक्त के सात्विक प्रेम की शरण में जाना ही एकमात्र उपाय है।

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--संकलन --अतुल परब--09.09.2026-WEDNESDAY.
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