गगन को छूता महावृक्ष🌳 ☁️ 🌍 ✨ 🌿 | 🪵 ⛰️ 🍃 ⏳ 🕊️ | 🐦 🏡 ☀️ 💫 🌟 | ☀️ 🌳 💛

Started by Atul Kaviraje, September 11, 2026, 08:52:07 PM

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Atul Kaviraje

यह पेड़ बहुत ऊँचा हो गया
इसकी शान से आसमान छोटा लग रहा था
यह पेड़ बहुत शानदार और विशाल था - तस्वीर

भव्य और विस्तीर्ण वृक्ष का मनमोहक चित्र - प्रस्तावना (हिंदी)
प्रकृति के विशाल पटल पर शान से खड़े, आसमान को छूते हुए किसी महाकाय वृक्ष को देखकर मन में असीम आदर की भावना जाग उठती है। जिसकी भव्यता और दूर-दूर तक फैली शाखाओं के आगे आसमान भी छोटा प्रतीत हो, ऐसे इस विशाल वृक्ष की तस्वीर पृथ्वी पर सामर्थ्य और स्थिरता का जीवंत प्रतीक है।

कविता का शीर्षक: गगन को छूता महावृक्ष

कडवे १
इतना ऊँचा बढ़ गया यह पेड़ गगन को चीरकर,
इसके आगे तो आसमान भी छोटा लगे शरीर पर।
विस्तारित शाखाओं का जैसे हो विशाल संसार,
प्रकृति के इस रुबाब पर न्योछावर है यह संसार।
भावार्थ: आकाश को छूने वाला यह विशाल पेड़ और उसकी फैली हुई शाखाएँ प्रकृति का अद्भुत रूप दर्शाती हैं।
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कडवे २
तना इसका इतना मजबूत जैसे पहाड़ की हो चट्टान,
हर एक पत्ते पर लिखी है सदियों पुरानी पहचान।
कितने ही मौसम आए और चुपचाप यहाँ से गुजरे,
इस महावृक्ष के साये में कितने ही सपने उभरे।
भावार्थ: पेड़ का मजबूत तना और उसका इतिहास प्रकृति के बदलावों की गहरी गवाही देता है।
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कडवे ३
इस विस्तीर्ण रूप के आगे सब कुछ है बौना सा,
इसकी छांव में कटता है हर एक राही का कोना सा।
पक्षी आकर घर बनाते और गीत सुरीले गाते,
इस विशाल पेड़ की छांव में सब सुकून हैं पाते।
भावार्थ: इस बड़े पेड़ की छत्रछाया में अनगिनत जीवों को आश्रय और शांति मिलती है।
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कडवे ४
सुबह की सुनहरी धूप जब इसके शिखर पर पड़ती,
तो यह महावृक्ष किसी सुनहरे ताज सा दिखता धरती।
हवा के हर झोंके पर जब पत्ते इसके लहराते,
तो धरती के इस आंचल पर सब मोहित हो जाते।
भावार्थ: सुबह की धूप में यह विशाल वृक्ष और भी अधिक तेजोमय और सुंदर प्रतीत होता है।
☀️ 🌳 💛 🌅 🍃

कडवे ५
वक्त की रफ्तार में जैसे यह थम सा गया हो कहीं,
इस भव्यता को देखकर दिल में उठे कोई लहर नहीं।
सपनों और हकीकत का यह अनोखा संगम प्यारा,
रोशन कर देता है हमेशा यह जीवन-किनारा।
भावार्थ: इस भव्य वृक्ष को देखकर समय जैसे थम जाता है और मन को असीम शांति मिलती है।
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कडवे ६
प्रकृति की यह महानता शब्दों में बयां न हो पाए,
इसकी विशालता देख हर कोई हैरान रह जाए।
इस महावृक्ष की सुंदरता में मेरा मन खोया,
ऐसा प्यारा नजारा मैंने पहले कभी न था जोया।
भावार्थ: इस विशाल वृक्ष की सुंदरता इतनी असीम है कि इसके आगे सारे शब्द फीके पड़ जाते हैं।
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कडवे ७
भव्य और विस्तीर्ण यह वृक्ष सदा गगन को चूमे,
इसकी छांव में हमेशा दुनिया खुशियों से झूमे।
प्रकृति का यह मजबूत स्तंभ यूँ ही हमेशा खड़ा रहे,
हर एक इंसान के दिल में इसका प्यार बसा रहे।
भावार्थ: यह विशाल वृक्ष हमेशा अपनी भव्यता से इस दुनिया को शीतलता और प्रेरणा देता रहे।
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इमोजी सारांश (हिंदी):
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कविता संदर्भ टीप (हिंदी):
यह कविता प्रकृति के अत्यंत भव्य, विस्तीर्ण और विशाल महावृक्ष की महिमा और उसके अद्भुत सौंदर्य का वर्णन करती है।

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--संकलन --अतुल परब--DATE-10.09.2026-WEDNESDAY.
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